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India

Rabies Vaccine के नाम पर नकली खेल: 17 अंतर से पकड़े गए फर्जी vials, चार गिरफ्तार; पूरे देश में Alert

कुत्ते के काटने के बाद लगने वाली Vaccine भी नकली! दिल्ली में खुला बड़ा खेल, 17 अंतर से पकड़ा गया फर्जी Abhayrab; पूरे देश में Alert Mukherjee Nagar के बिना…

Rabies Vaccine के नाम पर नकली खेल: 17 अंतर से पकड़े गए फर्जी vials, चार गिरफ्तार; पूरे देश में Alert

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कुत्ते के काटने के बाद लगने वाली Vaccine भी नकली! दिल्ली में खुला बड़ा खेल, 17 अंतर से पकड़ा गया फर्जी Abhayrab; पूरे देश में Alert

Mukherjee Nagar के बिना लाइसेंस वाले फ्लैट से मिले Rabies Vaccine के संदिग्ध vials potency test में फेल; Batch KE25012 को लेकर DCGI ने सभी राज्यों को बढ़ाई निगरानी के निर्देश दिए, Delhi Police ने चार लोगों को गिरफ्तार किया

नई दिल्ली, 6 सितंबर 2026: कुत्ते या किसी दूसरे स्तनधारी जानवर के काटने के बाद जिस rabies vaccine पर मरीज की जिंदगी निर्भर हो सकती है, उसी vaccine के नाम पर कथित नकली उत्पाद मिलने का गंभीर मामला सामने आया है।

देश की शीर्ष drug regulator Central Drugs Standard Control Organisation (CDSCO) ने सभी राज्यों को commonly used anti-rabies vaccine Abhayrab के नाम से मिले एक संदिग्ध batch को लेकर सतर्क रहने को कहा है।

मामला Batch Number KE25012 से जुड़ा है।

दिल्ली के Mukherjee Nagar में एक unlicensed residential premises से जब्त vials की laboratory जांच में वे potency requirement पर खरे नहीं उतरे। जांच में उन्हें “not of standard quality” और “misbranded” पाया गया।

सबसे चौंकाने वाली बात—

निर्माता Indian Immunologicals Limited यानी IIL के मुताबिक जब्त vials और उसी batch के genuine reference samples के बीच 17 अलग-अलग अंतर मिले।

एक फ्लैट से शुरू हुई जांच

यह मामला अचानक 6 सितंबर को सामने नहीं आया।

दिल्ली पुलिस की Crime Branch ने Drugs Control Department के inspectors के साथ 22 अप्रैल को North Delhi के Mukherjee Nagar स्थित एक residential flat पर छापा मारा था।

यह licensed vaccine distribution premises नहीं था।

यहीं से Abhayrab label वाले vials बरामद किए गए। बाद में samples को Central Drugs Laboratory, Kasauli भेजा गया।

Laboratory testing के बाद मामला गंभीर हो गया।

जिस vaccine का काम rabies virus के खिलाफ protective immune response तैयार करना है, उसका field sample required potency standard पूरा नहीं कर पाया।

17 अंतर ने खोला राज

Counterfeit medicine हमेशा पहली नजर में नकली दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है।

इसीलिए इस मामले में genuine और seized product की detailed comparison महत्वपूर्ण रही।

Indian Immunologicals के अनुसार laboratory में रखे genuine retention sample और seized vial के बीच 17 differences दर्ज किए गए।

इनमें packaging और labelling से जुड़े कई अंतर थे।

QR code verification अलग था।

Vial cap का रंग अलग था।

Company logo और artwork में अंतर था।

Licence details अलग थीं।

Fonts और text spacing में discrepancies थीं।

यहां तक कि packaging पर प्रसिद्ध वैज्ञानिक Louis Pasteur के नाम से जुड़े text में “Pasteur” की जगह कथित तौर पर “Posteur” लिखा हुआ मिला।

यानी नकली product को असली जैसा दिखाने की कोशिश की गई थी, लेकिन छोटी-छोटी गलतियों ने उसकी authenticity पर सवाल खड़े कर दिए।

QR Code भी Verify नहीं हुआ

आज pharmaceutical packaging में QR code और traceability systems का महत्व लगातार बढ़ रहा है।

इस मामले में seized packaging पर मौजूद QR code को भी genuine product से अलग पाया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक code की verification में समस्या सामने आई।

यही कारण है कि regulators के लिए packaging केवल design नहीं बल्कि drug-security mechanism भी बनती जा रही है।

Counterfeiters अगर medicine का नाम और box copy कर भी लें, तो batch records, licence details, QR verification और laboratory testing उन्हें पकड़ने में मदद कर सकते हैं।

Room Temperature पर रखी थी Vaccine

जांच में storage को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आया।

Abhayrab vaccine के label के अनुसार इसे 2°C से 8°C temperature में store किया जाना चाहिए।

लेकिन जिस premises से samples मिले, वहां vaccine room temperature पर रखी हुई थी।

Vaccines की cold chain महत्वपूर्ण होती है।

Temperature requirements का पालन नहीं होने पर product की effectiveness प्रभावित हो सकती है।

हालांकि इस मामले में regulator की चिंता storage तक सीमित नहीं है—product की identity और authenticity पर ही गंभीर सवाल हैं।

चार लोग गिरफ्तार

CDSCO के अनुसार Delhi Police ने मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है।

आगे की investigation और legal action जारी है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि गिरफ्तारी का अर्थ अदालत से दोषसिद्धि नहीं होता।

Investigation में अब यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि suspected counterfeit vials कहां से आए, कितनी मात्रा में तैयार या circulate किए गए और distribution network कितना बड़ा था।

पूरे देश में Alert क्यों?

Drugs Controller General of India ने 27 अगस्त को सभी State Drugs Controllers को communication भेजा।

इसमें inspectorate staff को alert करने और संबंधित batch की movement, distribution तथा availability पर strict vigilance रखने को कहा गया।

यानी मामला केवल Delhi Police investigation तक सीमित नहीं रखा गया है।

राज्यों के drug-control authorities को भी market surveillance बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

यही इस खबर को national public-health issue बनाता है।

असली Batch भी KE25012 है—तो पहचान कैसे होगी?

यहां सबसे महत्वपूर्ण और थोड़ा confusing point समझना जरूरी है।

IIL के मुताबिक उसने KE25012 नंबर का genuine batch भी बनाया था

Company का कहना है कि genuine batch की 83,370 vials government testing के बाद authorised distribution network के जरिए supply की गई थीं।

इसलिए सिर्फ batch number देखकर यह कहना सही नहीं होगा कि KE25012 लिखा हर vial नकली है।

जांच में मिले suspected counterfeit vials ने genuine batch number का इस्तेमाल किया था।

यही वजह है कि packaging, source और authorised supply chain महत्वपूर्ण हैं।

Company ने क्या कहा?

Indian Immunologicals ने स्पष्ट किया है कि जांच में मिले संदिग्ध vials उसके द्वारा manufactured product नहीं थे।

Company ने manufacturing और distribution records CDSCO को उपलब्ध कराए हैं और counterfeit product के source का पता लगाने की मांग की है।

Company का यह भी कहना है कि authorised channels से hospitals और licensed pharmacies को supply किए गए vaccines इस मामले से प्रभावित नहीं हैं।

इसलिए लोगों को यह समझना जरूरी है कि खबर पूरे Abhayrab brand को unsafe घोषित करने की नहीं है।

मामला suspected counterfeit product का है।

मरीजों को Panic करना चाहिए?

नहीं—लेकिन सावधानी जरूरी है।

अगर किसी व्यक्ति को हाल में dog bite के बाद rabies vaccination दिया गया है, तो केवल इस खबर के कारण treatment बीच में रोकना खतरनाक हो सकता है।

Rabies एक बेहद गंभीर बीमारी है और exposure के बाद timely medical treatment महत्वपूर्ण होता है।

किसी मरीज को अपने vaccine की authenticity को लेकर संदेह हो तो स्वयं निर्णय लेने के बजाय उस hospital/clinic या qualified doctor से संपर्क करना चाहिए जहां vaccination कराया गया था।

Vaccine course को अपने आप बंद करना या dose skip करना उचित नहीं होगा।

Vaccine कहां से लगवाएं?

इस मामले के बाद सबसे practical lesson यही है—

Rabies vaccine government healthcare facility, hospital, authorised clinic या licensed pharmacy जैसे legitimate channel से ही लेना चाहिए।

CDSCO ने भी कहा है कि hospitals, clinics और government healthcare facilities में vaccines licensed pharmacies के जरिए dispense की जाती हैं।

Unknown seller, unlicensed premises या suspiciously cheap medical product से बचना जरूरी है।

Medicine के मामले में थोड़ी बचत भी बड़ा health risk बन सकती है।

Rabies में Vaccine इतनी महत्वपूर्ण क्यों?

Rabies के symptoms विकसित हो जाने के बाद बीमारी लगभग हमेशा fatal होती है।

इसलिए animal bite के बाद wound care और समय पर post-exposure treatment बेहद महत्वपूर्ण है।

भारत में rabies आज भी बड़ा public-health burden है।

एक ICMR-linked nationwide study ने भारत में सालाना करीब 5,726 human rabies deaths का अनुमान लगाया था।

इसी वजह से anti-rabies vaccine की supply chain में counterfeit product का प्रवेश सामान्य fake-medicine case से कहीं ज्यादा गंभीर माना जाता है।

यह दूसरी चेतावनी

Abhayrab के नाम से counterfeit product को लेकर यह पहली चिंता नहीं है।

2025 में भी दूसरे batch number से जुड़े counterfeit doses की जानकारी सामने आई थी और कुछ foreign health regulators ने India में vaccination कराने वाले travellers के लिए precautionary advice जारी की थी।

नया मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पता चलता है कि high-value और life-saving medicines की supply chain को counterfeiters से सुरक्षित रखना लगातार चुनौती बना हुआ है।

Bihar और Seemanchal के लिए क्या जरूरी?

Delhi में racket पकड़ा गया है, लेकिन DCGI ने alert सभी राज्यों को भेजा है।

इसलिए Bihar के drug inspectors और health authorities के लिए भी surveillance महत्वपूर्ण होगी।

पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज जैसे जिलों में बड़ी rural population animal bites के बाद government hospitals और local pharmacies पर निर्भर करती है।

ऐसे में district hospitals, PHCs और pharmacies की authorised supply chain पर भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी है।

लोगों को WhatsApp या social media की इस तरह की अफवाह पर भरोसा नहीं करना चाहिए कि—

“Rabies की सारी vaccine नकली है।”

यह गलत और खतरनाक निष्कर्ष होगा।

असली सवाल—नकली Vaccine पहुंची कहां तक?

चार गिरफ्तारियां महत्वपूर्ण हैं।

17 differences महत्वपूर्ण हैं।

Lab test fail होना बेहद गंभीर है।

लेकिन investigation का सबसे बड़ा सवाल अभी बाकी है—

suspected counterfeit vials वास्तव में market में कितनी दूर तक पहुंचीं?

सरकार को supply chain trace करके इसका स्पष्ट जवाब देना होगा।

क्योंकि मामला किसी cosmetic product का नहीं है।

यह उस vaccine का मामला है जिसे इंसान जानलेवा rabies infection से बचने के लिए लगवाता है।

फिलहाल सबसे सुरक्षित संदेश साफ है—

Dog bite के बाद vaccination में देरी न करें, treatment बीच में न छोड़ें और anti-rabies vaccine केवल authorised medical channel से ही लगवाएं।

साथ ही Batch KE25012 से जुड़ी authenticity पर संदेह हो तो panic करने के बजाय healthcare provider और drug-control authority से verification कराएं।

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