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Bihar Job Protest: पटना में नौकरी अभ्यर्थियों का बड़ा आंदोलन, Lok Bhavan मार्च के दौरान पुलिस से टकराव; कई प्रदर्शनकारी हिरासत में

PhD धारक, Guest Faculty और शिक्षक अभ्यर्थी सड़कों पर; UGC नियम लागू करने, Assistant Professor भर्ती में उम्र सीमा 55 वर्ष करने और BPSC TRE-4 को Single-Tier…

Bihar Job Protest: पटना में नौकरी अभ्यर्थियों का बड़ा आंदोलन, Lok Bhavan मार्च के दौरान पुलिस से टकराव; कई प्रदर्शनकारी हिरासत में

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PhD धारक, Guest Faculty और शिक्षक अभ्यर्थी सड़कों पर; UGC नियम लागू करने, Assistant Professor भर्ती में उम्र सीमा 55 वर्ष करने और BPSC TRE-4 को Single-Tier करने की मांग पटना: बिहार में सरकारी नौकरी और शिक्षक भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज होता जा रहा है। शनिवार, 22 अगस्त 2026 को बड़ी संख्या में PhD धारक, research scholars, guest faculty और शिक्षक भर्ती अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर Lok Bhavan की ओर मार्च करने निकले। पुलिस ने पटना के R-Golumber के पास barricading कर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की हुई और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। यह आंदोलन केवल एक भर्ती परीक्षा तक सीमित नहीं है। अलग-अलग समूह Assistant Professor recruitment, BPSC TRE-4, UGC regulations, age limit, domicile policy और Hindi-medium candidates से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। R-Golumber पर पुलिस ने रोका मार्च प्रदर्शनकारी Lok Bhavan की तरफ बढ़ रहे थे, लेकिन प्रशासन ने R-Golumber के पास barricades लगा रखे थे। अधिकारियों के मुताबिक जब कुछ प्रदर्शनकारियों ने barricades पार करने की कोशिश की तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए “mild force” का इस्तेमाल किया और कई लोगों को हिरासत में लिया। City SP (Central) Mamta Kalyani ने कहा कि किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था। PhD Holders का आंदोलन क्यों? बिहार के विश्वविद्यालयों से जुड़े PhD holders और guest faculty पिछले दो सप्ताह से ज्यादा समय से प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांग Assistant Professor की नियुक्ति में UGC Regulation 2018 को लागू करने की है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि recruitment process में academic qualifications और UGC द्वारा निर्धारित नियमों का पालन किया जाए। इसके साथ Assistant Professor applicants की maximum age limit बढ़ाकर 55 वर्ष करने की भी मांग की जा रही है। 19 दिनों से भूख हड़ताल इस आंदोलन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ PhD holders लंबे समय से hunger strike पर हैं। Times of India की रिपोर्ट के अनुसार शनिवार तक आंदोलनकारियों में शामिल कुमुद पटेल 19 दिनों से भूख हड़ताल पर थे और प्रदर्शन में wheelchair पर पहुंचे। यानी शनिवार का Lok Bhavan march अचानक शुरू हुआ आंदोलन नहीं था। इसके पीछे कई दिनों से चल रहा विरोध और सरकार से बातचीत की मांग है। Guest Faculty की Regularisation की मांग बिहार के अलग-अलग universities में काम कर रहे guest faculty members भी आंदोलन में शामिल हैं। इनमें से कई शिक्षकों का कहना है कि वे वर्षों से universities में पढ़ा रहे हैं, लेकिन उनके employment की स्थिति स्थायी नहीं हुई है। प्रदर्शनकारी Assistant Professor appointments को regular करने और लंबे समय से काम कर रहे guest teachers के अनुभव को recruitment process में उचित महत्व देने की मांग कर रहे हैं। BPSC TRE-4 को लेकर भी नाराजगी इसी समय बिहार में BPSC Teacher Recruitment Examination-4 (TRE-4) को लेकर भी बड़ा आंदोलन चल रहा है। BPSC ने TRE-4 के तहत 32,388 शिक्षक पदों की भर्ती की घोषणा की है और applications 1 सितंबर से शुरू होने की जानकारी सामने आई है। लेकिन notification आने के बाद भी आंदोलन समाप्त नहीं हुआ। Teacher aspirants का कहना है कि उनकी कई महत्वपूर्ण मांगें अभी बाकी हैं। Single-Tier Exam की मांग TRE-4 अभ्यर्थियों की सबसे प्रमुख मांगों में परीक्षा को single-tier रखना शामिल है। प्रदर्शनकारी भर्ती प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने की मांग कर रहे हैं। इसके साथ Hindi-medium candidates को समान अवसर दिए जाने का मुद्दा भी उठाया गया है। यही कारण है कि 32 हजार से अधिक vacancies की घोषणा के बावजूद Gardanibagh में प्रदर्शन जारी है। Upper Age Limit 55 वर्ष करने की मांग PhD holders की एक महत्वपूर्ण मांग Assistant Professor recruitment में maximum age limit को 55 years करने की है। उनका तर्क है कि PhD और academic qualifications हासिल करने में कई वर्ष लगते हैं। ऐसे में कम age limit होने से बड़ी संख्या में qualified candidates recruitment process से बाहर हो सकते हैं। सरकार इस मांग पर क्या निर्णय लेती है, यह आने वाले दिनों में आंदोलन की दिशा तय करने वाला प्रमुख मुद्दा होगा। Domicile Policy भी बनी बड़ा मुद्दा प्रदर्शनकारी recruitment में domicile policy लागू करने की भी मांग कर रहे हैं। बिहार में सरकारी नौकरी और शिक्षक भर्ती में domicile का मुद्दा पहले भी राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय रहा है। एक पक्ष का कहना है कि बिहार की सरकारी नौकरियों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। दूसरी तरफ recruitment rules को constitutional और legal framework के भीतर लागू करना भी आवश्यक होता है। इसलिए domicile की मांग पर सरकार का रुख महत्वपूर्ण रहेगा। सरकार को सौंपा छह सूत्री ज्ञापन शनिवार के प्रदर्शन के दौरान केवल पुलिस-प्रदर्शनकारी टकराव ही नहीं हुआ। करीब 90 मिनट के प्रदर्शन के बाद छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारियों से मुलाकात की और छह सूत्री memorandum सौंपा। रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों की मांगें वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। इसके बाद कुछ प्रदर्शनकारी वापस लौट गए, जबकि कुछ को पुलिस ने हिरासत में लिया। 24 अगस्त तक बातचीत नहीं हुई तो आंदोलन और तेज अब इस आंदोलन में अगली महत्वपूर्ण तारीख 24 अगस्त है। प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने चेतावनी दी है कि अगर 24 अगस्त तक सरकार के साथ meaningful dialogue नहीं हुआ, तो वे 25 अगस्त को मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास का घेराव कर सकते हैं। इससे साफ है कि आंदोलन अभी समाप्त होने वाला नहीं है। अगले 24–48 घंटे बिहार सरकार और प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण होंगे। Bihar Bandh की भी चेतावनी TRE-4 recruitment process में बदलाव की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों ने इससे भी आगे जाने की चेतावनी दी है। PTI की रिपोर्ट के अनुसार मांगों पर विचार नहीं होने की स्थिति में Bihar Bandh बुलाने की चेतावनी भी दी गई है। हालांकि अभी किसी bandh की अंतिम तारीख या आधिकारिक programme सामने नहीं आया है। इसलिए इसे फिलहाल प्रदर्शनकारियों की चेतावनी के रूप में ही देखना चाहिए। Gardanibagh बना आंदोलन का केंद्र पटना का Gardanibagh इन दिनों विभिन्न recruitment-related आंदोलनों का प्रमुख केंद्र बन गया है। Teacher aspirants, guest faculty और PhD holders अलग-अलग मांगों के साथ यहां प्रदर्शन कर रहे हैं। रविवार, 23 अगस्त को आंदोलन का एक हिस्सा सातवें दिन में प्रवेश कर चुका है। यही वजह है कि बिहार में employment और recruitment transparency एक बार फिर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है। Tejashwi Yadav ने भी दिया समर्थन विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने भी छात्रों और नौकरी अभ्यर्थियों के आंदोलन का समर्थन किया है। उन्होंने paper leaks, unemployment और recruitment irregularities जैसे मुद्दे उठाते हुए आंदोलनकारियों की मांगों के प्रति समर्थन जताया है। इससे recruitment protest अब केवल administrative issue नहीं रह गया है। इस पर राजनीतिक टकराव भी बढ़ने की संभावना है। 25 अगस्त पर अब सबकी नजर फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत होती है या नहीं। अगर 24 अगस्त तक कोई समाधान या meaningful dialogue नहीं होता, तो 25 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास के घेराव की चेतावनी के कारण पटना में एक बार फिर बड़े प्रदर्शन की स्थिति बन सकती है। सरकार के लिए चुनौती यह होगी कि recruitment process की वैधानिकता और administrative requirements बनाए रखते हुए लंबे समय से आंदोलन कर रहे candidates की चिंताओं का समाधान कैसे किया जाए। वहीं अभ्यर्थियों के लिए आने वाले दो दिन निर्णायक होंगे—क्योंकि अब उनकी लड़ाई UGC Regulation 2018, Assistant Professor recruitment, 55 वर्ष age limit, domicile policy और TRE-4 examination pattern जैसे कई मुद्दों पर एक साथ केंद्रित हो गई है।

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