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प्रधानमंत्री मोदी ने बेंगलुरु में ‘मस्तिष्क अनुसंधान केंद्र’ का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री मोदी ने बेंगलुरु में ‘मस्तिष्क अनुसंधान केंद्र’ का उद्घाटन किया , 20 जून (भाषा) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) परिसर में 280 करोड़ रुपये की लागत से बने मस्तिष्क अनुसंधान केंद्र (सीबीआर) का सोमवार को उद्घाटन किया, जिसकी आधारशिला उन्होंने स्वयं रखी थी। प्रध

प्रधानमंत्री मोदी ने बेंगलुरु में ‘मस्तिष्क अनुसंधान केंद्र’ का उद्घाटन किया

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प्रधानमंत्री मोदी ने बेंगलुरु में ‘मस्तिष्क अनुसंधान केंद्र’ का उद्घाटन किया , 20 जून (भाषा) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) परिसर में 280 करोड़ रुपये की लागत से बने मस्तिष्क अनुसंधान केंद्र (सीबीआर) का सोमवार को उद्घाटन किया, जिसकी आधारशिला उन्होंने स्वयं रखी थी। प्रधानमंत्री ने इस कार्यक्रम के दौरान 832 बिस्तर वाले ‘बागची-पार्थसारथी मल्टीस्पैशियलिटी’ अस्पताल की भी आधारशिला रखी। अधिकारियों ने बताया कि सीबीआर को अपनी तरह के एक अलग अनुसंधान केंद्र के रूप में विकसित किया गया है और इसमें उम्र से संबंधित मस्तिष्क विकारों के समाधान के लिए साक्ष्य-आधारित जन स्वास्थ्य उपचार मुहैया कराने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण अनुसंधान करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत, मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई, केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, सूचना प्रौद्योगिकी की दिग्गज कंपनी इंफोसिस के सह-संस्थापक एस गोपालकृष्णन और उनका परिवार भी इस कार्यक्रम में मौजूद था। अधिकारियों ने बताया कि गोपालकृष्णन और उनकी पत्नी सुधा गोपालकृष्णन की मदद से आईआईएससी में एक स्वायत्त, गैर-लाभकारी अनुसंधान संगठन के रूप में मस्तिष्क अनुसंधान केंद्र की स्थापना की गई है। उन्होंने कहा कि सीबीआर परोपकारी संगठनों एवं व्यक्तियों द्वारा वित्त पोषित है और इसे कई अनुदान एजेंसियों से विशिष्ट परियोजनाओं के लिए अनुसंधान अनुदान प्राप्त होता है। गोपालकृष्णन ने आईआईएससी परिसर के भीतर सीबीआर के लिए अत्याधुनिक भवन के निर्माण के वास्ते भी धन प्रदान किया है और उनका यह उपहार भारत के इतिहास में वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए किसी व्यक्ति द्वारा प्रदान किया गया सबसे बड़ा समर्थन है। ‘बागची-पार्थसारथी मल्टीस्पैशियलिटी’ अस्पताल आईआईएससी बेंगलुरु के परिसर में विकसित किया जाएगा और यह प्रतिष्ठित संस्थान विज्ञान, इंजीनियरिंग और चिकित्सा को एकीकृत करने में मदद करेगा। अधिकारियों ने कहा कि यह देश में नैदानिक अनुसंधान को बड़ा प्रोत्साहन देगा और देश में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए मददगार नवोन्मेषी समाधान खोजने की दिशा में काम करेगा। आईआईएससी ने बागची-पार्थसारथी अस्पताल की स्थापना के लिए परोपकारी सुष्मिता एवं सुब्रतो बागची और राधा एवं एन एस पार्थसारथी के साथ फरवरी में साझेदारी की। आईआईएससी के निदेशक प्रोफेसर गोविंद रंगराजन ने कहा था, ‘‘ये जोड़े 800 बिस्तरों वाले मल्टी स्पैशियलिटी अस्पताल के निर्माण के लिये सामूहिक रूप से 425 करोड़ रुपये (लगभग छह करोड़ डॉलर) दान करेंगे। आईआईएससी की स्थापना के बाद से उसे यह सबसे बड़ा निजी दान प्राप्त हुआ है ।’’ सुब्रतो बागची और एन एस पार्थसारथी माइंडट्री के सह-संस्थापक हैं जो सूचना प्रौद्योगिकी सेवा और परामर्श कंपनी है जिसका मुख्यालय बेंगलुरु में है । सुष्मिता ने ‘पीटीआई भाषा’ से कहा था, ‘‘परोपकारी होने का मतलब दूसरों के लिए सहानुभूति पैदा करना है, दूसरों के लिए महसूस करना और संवेदनशील बनना है। ये ऐसे मूल्य हैं जो हमारे माता-पिता से हमें मिले।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमने उनके पद चिह्नों पर चलते हुए छोटे-छोटे तरीके अपनाए। जब हम 1990 के दशक में अमेरिका में रहते थे, तो समुदाय में हर कोई मुद्दों के साथ जिस तरह से जुड़ा हुआ था, उससे हम बहुत प्रभावित हुए। जिस तरह से वे अपने आपको पेश करते हैं और मदद करते हैं, उससे हमें भारत लौटने पर संस्थानों से जुड़ने में मदद मिली।’’ राधा ने कहा कि वे लोग लंबे समय से छोटे-मोटे परमार्थ के काम में लगे हुये हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, यह पहला मौका है जब हम आईआईएससी जैसी बड़ी संस्था में इतना बड़ा योगदान दे रहे हैं ।’’ यह पूछे जाने पर कि इतनी बड़ी धन राशि दान करने की प्रेरणा उन्हें कहां से मिली, राधा ने कहा कि उन्होंने कड़ी मेहनत की है और अब जब संसाधन उनके पास हैं तो उनका मानना ​​है कि यह उन तक सौभाग्य से पहुंचे हैं। राधा ने कहा, ‘‘हम मानते हैं कि नियति ने हमें ये संसाधन दिए हैं और ऐसे में इनका इस्तेमाल ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम’’ के सिद्धांत के आधार पर लोगों की भलाई के लिए किया जाना चाहिये।’’ इस अस्पताल के 2024 तक शुरू हो जाने की उम्मीद है।

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