बायसी समेत सीमांचल के कई इलाकों में प्रशासन अलर्ट, बारिश के बाद नदियों के जलस्तर पर लगातार निगरानी
पूर्णिया। सीमांचल में बाढ़ का संकट अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। बारिश के बीच पूर्णिया और आसपास के इलाकों में महानंदा, कनकई और परमान नदियों के जलस्तर में लगातार उतार चढ़ाव हो रहा है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने नदी के जलस्तर के साथ साथ संवेदनशील इलाकों में कटाव की निगरानी भी बढ़ा दी है।
बायसी क्षेत्र में नदियों के जलस्तर में बदलाव को लेकर प्रशासन लगातार जानकारी जुटा रहा है। अधिकारियों के अनुसार बारिश के कारण कहीं जलस्तर बढ़ रहा है तो कहीं इसमें कमी भी दर्ज की जा रही है। ऐसे में नदी किनारे रहने वाले लोगों के लिए अगले कुछ दिन महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
महानंदा और परमान पर प्रशासन की नजर
महानंदा नदी सीमांचल के लिए हमेशा से महत्वपूर्ण और संवेदनशील नदी रही है। इसके जलस्तर में थोड़ी भी तेजी आने पर पूर्णिया, किशनगंज और आसपास के निचले इलाकों में चिंता बढ़ जाती है।
ताजा जानकारी के अनुसार किशनगंज के तैयबपुर में महानंदा का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन बारिश के कारण इसमें लगातार उतार चढ़ाव जारी है।
पूर्णिया के डेंगराह घाट क्षेत्र में भी महानंदा के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई है। प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
अररिया की ओर परमान नदी भी महत्वपूर्ण निगरानी बिंदु बनी हुई है। यहां भी बारिश के बाद जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई है, हालांकि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है।
कनकई नदी ने भी बढ़ाई चिंता
कनकई नदी का जलस्तर भी लगातार बदल रहा है। पश्चिम बंगाल के चरघरिया क्षेत्र में इसके जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई है।
सीमांचल में नदियों की स्थिति को अलग अलग देखकर समझना आसान नहीं है, क्योंकि एक नदी में पानी बढ़ने का असर दूसरे क्षेत्रों में भी पड़ सकता है। खासकर भारी बारिश होने पर निचले इलाकों में जलजमाव और नदी कटाव की समस्या तेजी से बढ़ सकती है।
इसी वजह से प्रशासन केवल जलस्तर ही नहीं बल्कि नदी के किनारे होने वाले कटाव पर भी नजर रख रहा है।
कटाव बना सबसे बड़ा खतरा
बाढ़ के दौरान पानी का बढ़ना जितना खतरनाक होता है, उससे कम खतरा नदी के कटाव का नहीं है।
पूर्णिया, अररिया और किशनगंज के कई ग्रामीण इलाकों में हर साल नदी कटाव से जमीन और सड़कें प्रभावित होती हैं। कई जगह लोगों के घर और खेती की जमीन भी नदी के कटाव की चपेट में आती है।
प्रशासन की ओर से संवेदनशील स्थानों पर जरूरत के अनुसार कटाव निरोधक कार्य कराए जा रहे हैं। जल संसाधन विभाग की टीम भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
लेकिन स्थानीय लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि अस्थायी कटाव निरोधक काम कब तक समस्या का समाधान कर पाएंगे।
क्या फिर बढ़ सकती है बाढ़ की चिंता
बिहार में पहले से ही बाढ़ ने बड़ी आबादी को प्रभावित किया है। ऐसे समय में सीमांचल में फिर बारिश होना चिंता बढ़ाने वाला है।
अगर लगातार बारिश होती है और नदियों का जलस्तर एक साथ बढ़ता है तो निचले इलाकों में पानी का दबाव बढ़ सकता है। खासकर नदी किनारे बसे गांवों और कमजोर तटबंध वाले इलाकों में प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी।
बिहार के आधिकारिक बाढ़ निगरानी आंकड़ों में भी किशनगंज की कनकई और कटिहार के कुरसेला में कोसी समेत कई नदी बिंदुओं पर जलस्तर चेतावनी या खतरे के स्तर से ऊपर दर्ज किया गया है।
इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि सीमांचल में बाढ़ का खतरा पूरी तरह समाप्त हो गया है।
ग्रामीणों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए
नदी किनारे रहने वाले लोगों को जलस्तर बढ़ने की स्थिति में नदी के पास जाने से बचना चाहिए। बच्चों और पशुओं को नदी के आसपास नहीं जाने देना चाहिए।
अगर किसी गांव में अचानक कटाव शुरू होता है या पानी तेजी से बढ़ता है तो इसकी सूचना तत्काल स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीम को देनी चाहिए।
बाढ़ प्रभावित परिवारों को प्रशासन की ओर से बनाए गए सुरक्षित स्थानों और राहत केंद्रों की जानकारी अपने पास रखनी चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल
सीमांचल के लोगों के लिए हर साल बाढ़ और कटाव एक जैसी समस्या बनकर सामने आती है। सवाल सिर्फ यह नहीं है कि इस बार प्रशासन कितनी जल्दी राहत पहुंचाता है।
बड़ा सवाल यह है कि महानंदा, कनकई और परमान जैसी नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को स्थायी सुरक्षा कब मिलेगी।
क्या हर साल राहत और कटाव निरोधक काम ही समाधान है, या सीमांचल के लिए बड़े स्तर पर नदी प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण की स्थायी योजना जरूरी है?
आपकी राय
आपके इलाके में नदी का जलस्तर कैसा है?
क्या आपके गांव या आसपास कटाव की समस्या शुरू हुई है?
अगर आप पूर्णिया, अररिया, किशनगंज या कटिहार के किसी बाढ़ प्रभावित इलाके से हैं तो अपनी स्थिति कमेंट में बताएं। आपकी जानकारी से दूसरे लोगों को भी स्थिति समझने में मदद मिलेगी।












