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प्राइवेट यूनिवर्सिटी और शैक्षिक संस्थानों को भा रहा है बिहार, जानें वजह

प्राइवेट यूनिवर्सिटी और शैक्षिक संस्थानों को भा रहा है बिहार, जानें वजह देशभर के शैक्षिक संस्थानों व निजी विश्वविद्यालयों को बिहार भा रहा है। बिहार में निजी विश्वविद्यालयों के अपने विस्तार की चाह उफान पर है। यही वजह है कि राज्य में निजी विश्वविद्यालय एक्ट लागू होने के महज छह वर्षों के भीतर तीन दर्जन

प्राइवेट यूनिवर्सिटी और शैक्षिक संस्थानों को भा रहा है बिहार, जानें वजह

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प्राइवेट यूनिवर्सिटी और शैक्षिक संस्थानों को भा रहा है बिहार, जानें वजह देशभर के शैक्षिक संस्थानों व निजी विश्वविद्यालयों को बिहार भा रहा है। बिहार में निजी विश्वविद्यालयों के अपने विस्तार की चाह उफान पर है। यही वजह है कि राज्य में निजी विश्वविद्यालय एक्ट लागू होने के महज छह वर्षों के भीतर तीन दर्जन से अधिक निजी विश्वविद्यालयों ने इस प्रदेश में अपनी स्थापना की मंशा राज्य सरकार के समक्ष जाहिर की है। अब भी करीब दर्जनभर निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के प्रस्ताव सरकार के पास विचारार्थ हैं। गौरतलब है कि राज्य में बड़ी तादाद में विद्यार्थी इंटर की परीक्षा पास कर रहे हैं। इसके बाद स्नातक अथवा किसी तकनीकी या व्यावसायिक कोर्स में नामांकन के लिए न तो उतने संस्थान हैं, न ही उतनी सीटें। लिहाजा बिहार में उच्च शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) पिछड़ा हुआ है। इसे दुरुस्त करने और उच्चशिक्षा के लिए सूबे से पलायन रोकने को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने वर्ष 2013 में राज्य में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना का निर्णय लिया। इसी साल के आखिर में 27 दिसम्बर को बिहार निजी विश्वविद्यालय अधिनियम अधिसूचित किया गया। इसके बाद प्राइवेट यूनिवर्सिटी खोलने के लिए लगातार प्रस्ताव शिक्षा विभाग के उच्चशिक्षा निदेशालय को मिलने लगे। विभाग ने अधिनियम के प्रावधानों के आलोक में समिति गठित कर प्रस्ताव भेजने वाले संस्थानों की जमीनी हकीकत, उद्देश्य आदि की जांच आगे बढ़ानी शुरू कर दी और अब उसके फलाफल भी दिखने लगे हैं। राज्य सरकार से स्थापना की अनुमति पाने वाले कई ऐसे निजी विश्वविद्यालय अब प्रदेश में काम कर रहे हैं, जहां से सैकड़ों की संख्या में कई संकायों में विद्यार्थी उत्तीर्ण हो चुके हैं। ये विश्वविद्यालय चल रहे हैं उच्चशिक्षा निदेशालय में अबतक 20 निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना का प्रस्ताव आया है। इनमें से 7 को सरकार ने नियमों की कसौटी पर कसते हुए स्थापना की अनुमति पिछले दो-तीन वर्षों में दी। संचालित विश्वविद्यालयों में संदीप विवि सिजौल, मधुबनी, अमेटी विवि पटना, केके विवि बिहारशरीफ नालंदा, डॉ. सीवी रमण विविवैशाली, अलकरीम विवि कटिहार, गोपाल नारायण सिंह विवि जमुहार सासाराम एवं माता गुजरी विवि किशनगंज शामिल हैं। निदेशालय ने निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना की चाह रखने वाले पांच संस्थानों को अभी आशय पत्र जारी किया है। इनमें जगेश्वरी मेमोरियल तुर्की, मुजफ्फरपुर, शांजा विवि मधुबनी, संत जेवियर्स विवि पटना, एसबीएन विवि मुजफ्फरपुर एवं सुभाष विवि बिहटा, पटना हैं। शेष बचे आठ प्रस्तावों में से 7 की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) की जांच में उच्चशिक्षा निदेशालय जुटा है। इसके लिए कमेटी का गठन कर दिया गया है। स्रोत-हिन्दुस्तान

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