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नेपाल में आनुपातिक प्रणाली के तहत 3,400 से अधिक उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे

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नेपाल में आनुपातिक प्रणाली के तहत 3,400 से अधिक उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे

नेपाल के चुनावी इतिहास में बड़ी भागीदारी

नेपाल में आनुपातिक प्रणाली के तहत 3,400 से अधिक उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे, जो देश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। नेपाल के निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को जानकारी दी कि आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (Proportional Representation System) के तहत होने वाले चुनावों में इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवार मैदान में उतरेंगे।

इन चुनावों के जरिए संघीय संसद की 110 सीटों पर प्रतिनिधियों का चयन किया जाएगा।


आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली क्या है?

नेपाल में संसद के चुनाव दोहरी प्रणाली के तहत होते हैं:

  1. प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली (FPTP)

  2. आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (PR)

आनुपातिक प्रणाली के तहत राजनीतिक दलों को मिले कुल मत प्रतिशत के आधार पर संसद में सीटें आवंटित की जाती हैं। इसका उद्देश्य समाज के सभी वर्गों—महिलाओं, दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों और पिछड़े समुदायों—को उचित प्रतिनिधित्व देना है।


110 सीटों के लिए 3,400+ उम्मीदवार

निर्वाचन आयोग के अनुसार:

  • कुल 110 सीटें आनुपातिक प्रणाली के तहत भरी जाएंगी

  • 3,400 से अधिक उम्मीदवार विभिन्न राजनीतिक दलों की सूची में शामिल हैं

  • दर्जनों राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दल इस प्रक्रिया में भाग ले रहे हैं

यह आंकड़ा नेपाल की बहुदलीय लोकतांत्रिक व्यवस्था को दर्शाता है।


राजनीतिक दलों में कड़ी प्रतिस्पर्धा

नेपाल के प्रमुख राजनीतिक दल—

  • नेपाली कांग्रेस

  • सीपीएन (माओवादी केंद्र)

  • सीपीएन (यूएमएल)

  • राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी

सहित कई क्षेत्रीय और छोटे दलों ने अपनी-अपनी सूची निर्वाचन आयोग को सौंप दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों की मौजूदगी से चुनावी मुकाबला काफी रोचक और प्रतिस्पर्धात्मक होगा।


महिलाओं और अल्पसंख्यकों को मिलेगा प्रतिनिधित्व

आनुपातिक प्रणाली का सबसे बड़ा उद्देश्य सामाजिक समावेशन है। नेपाल के चुनाव कानून के अनुसार:

  • महिलाओं को न्यूनतम प्रतिनिधित्व

  • दलित, जनजाति, मधेसी और अल्पसंख्यक समुदायों की भागीदारी

  • क्षेत्रीय संतुलन

को सुनिश्चित करना अनिवार्य है।

इस वजह से उम्मीदवारों की संख्या स्वाभाविक रूप से अधिक हो जाती है।


निर्वाचन आयोग की भूमिका

नेपाल निर्वाचन आयोग ने कहा है कि वह:

  • उम्मीदवारों की सूची की सख्त जांच

  • चुनावी आचार संहिता का पालन

  • पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव

सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले दलों या उम्मीदवारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


लोकतंत्र के लिए अहम चुनाव

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह चुनाव नेपाल के लोकतंत्र के लिए बेहद अहम हैं।
पिछले कुछ वर्षों में नेपाल ने:

  • राजनीतिक अस्थिरता

  • सरकारों के बार-बार बदलाव

  • संवैधानिक विवाद

का सामना किया है।

ऐसे में यह चुनाव देश को स्थिर सरकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।


मतदाताओं की भागीदारी पर नजर

विशेषज्ञ यह भी देख रहे हैं कि इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के बीच मतदाता किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं।
आनुपातिक प्रणाली में मतदाता का एक वोट पूरे दल की स्थिति को प्रभावित करता है, जिससे मतदान का महत्व और बढ़ जाता है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आनुपातिक प्रणाली के तहत इतने बड़े पैमाने पर उम्मीदवारों की भागीदारी यह दर्शाती है कि नेपाल में लोकतांत्रिक प्रक्रिया मजबूत हो रही है। इससे संसद में विविध विचारों और समुदायों की आवाज पहुंचेगी, जिससे नीतिगत फैसलों में संतुलन और समावेशिता बढ़ेगी।


आगे की तस्वीर क्या कहती है?

चुनाव नतीजों के बाद यह साफ होगा कि:

  • कौन-सा दल सबसे ज्यादा समर्थन हासिल करता है

  • संसद में किसे बहुमत या गठबंधन बनाना पड़ेगा

  • नेपाल की राजनीति किस दिशा में जाएगी

लेकिन इतना तय है कि 3,400 से अधिक उम्मीदवारों की भागीदारी नेपाल के लोकतांत्रिक ढांचे को और मजबूत करती है।


❓ नेपाल में कितनी सीटें आनुपातिक प्रणाली से भरी जाएंगी?

कुल 110 सीटें।

❓ कितने उम्मीदवार चुनाव लड़ेंगे?

3,400 से अधिक उम्मीदवार।

❓ इस प्रणाली का उद्देश्य क्या है?

सभी सामाजिक वर्गों को समान प्रतिनिधित्व देना।

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