बगहा:
बिहार में मानव तस्करी के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पश्चिम चंपारण जिले के बगहा में पुलिस ने तीन नाबालिग बच्चियों को तस्करी का शिकार बनने से बचाते हुए सुरक्षित रेस्क्यू किया है। इस मामले में मानव तस्करी गिरोह से जुड़े पश्चिम बंगाल के रहने वाले मां-बेटे को गिरफ्तार किया गया है, जो बच्चियों को बहला-फुसलाकर बंगाल ले जाने की कोशिश कर रहे थे।
इस पूरे मामले की जानकारी रामानंद कौशल, पुलिस अधीक्षक, बगहा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी।
गुप्त सूचना पर हरकत में आई पुलिस
एसपी रामानंद कौशल ने बताया कि गुरुवार दोपहर करीब 2:30 बजे नौरंगिया थाना को गुप्त सूचना मिली थी कि थाना क्षेत्र से अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय की तीन नाबालिग बच्चियों को बहला-फुसलाकर बाहर ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष शुभम कुमार सिंह के नेतृत्व में त्वरित कार्रवाई शुरू की गई।
संयुक्त टीम ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन
मामले की गंभीरता को देखते हुए बगहा पुलिस की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU), नौरंगिया थाना पुलिस और जन शक्ति फाउंडेशन की संयुक्त टीम बनाई गई। टीम ने संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखते हुए छापेमारी की और मानव तस्करी की कोशिश को समय रहते नाकाम कर दिया।
पुलिस ने तीनों नाबालिग बच्चियों को सुरक्षित मुक्त कराया और मौके से दो आरोपियों को हिरासत में ले लिया।
गिरफ्तार आरोपी: मां और बेटा
पुलिस ने इस मामले में नियोति देवी (43 वर्ष) और उसके पुत्र नागेश भुइंया (19 वर्ष) को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी पश्चिम बर्धमान, पश्चिम बंगाल के निवासी हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दोनों बच्चियों को बेहतर जीवन और काम का झांसा देकर पश्चिम बंगाल ले जा रहे थे।
तीनों नाबालिग बच्चियां सुरक्षित
रेस्क्यू की गई तीनों नाबालिग बच्चियां नौरंगिया थाना क्षेत्र की निवासी हैं। उनकी उम्र लगभग 4 वर्ष, 6 वर्ष और 12 वर्ष बताई जा रही है। पुलिस ने बच्चियों को सुरक्षित थाने लाकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की और बाल संरक्षण से जुड़े प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई शुरू की।
बच्चियों की काउंसलिंग कराई जा रही है और उन्हें उनके परिजनों के सुपुर्द करने की प्रक्रिया संबंधित विभागों के सहयोग से की जा रही है।
एफआईआर दर्ज, जांच तेज
जन शक्ति फाउंडेशन की संचालिका लक्ष्मी खत्री के आवेदन पर नौरंगिया थाना में कांड संख्या 05/26 (दिनांक 22 जनवरी 2026) दर्ज किया गया है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मानव तस्करी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल फोन और रेलवे टिकट भी बरामद किया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि बच्चियों को ट्रेन के जरिए बंगाल ले जाने की योजना थी।
तस्करी नेटवर्क की जांच जारी
एसपी रामानंद कौशल ने बताया कि यह मामला सिर्फ दो लोगों तक सीमित नहीं हो सकता। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इसके पीछे कोई बड़ा मानव तस्करी नेटवर्क सक्रिय है। अन्य संभावित सहयोगियों और संपर्कों की भी जांच की जा रही है।
उन्होंने आम लोगों से अपील की कि अगर कहीं भी नाबालिग बच्चों को ले जाने या बहला-फुसलाने जैसी गतिविधियां दिखें, तो तुरंत पुलिस या 112 नंबर पर सूचना दें।
मानव तस्करी पर सख्ती का संदेश
इस कार्रवाई से साफ है कि बिहार पुलिस मानव तस्करी जैसे संगीन अपराधों के खिलाफ पूरी तरह सतर्क है। समय रहते कार्रवाई नहीं होती, तो तीन मासूम बच्चियां एक बड़े अपराध का शिकार हो सकती थीं।
यह मामला न सिर्फ पुलिस की तत्परता को दर्शाता है, बल्कि समाज के लिए भी चेतावनी है कि बच्चों की सुरक्षा में किसी तरह की लापरवाही भारी पड़ सकती है।



