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अररिया में जमीन रिकॉर्ड घोटाले का बड़ा आरोप: पूर्व सीओ समेत 55 लोगों पर एफआईआर, डिजिटल जमाबंदी में छेड़छाड़ का मामला

Published: 23/6/2026, 2:06:01 am2 viewsSeemanchal Live

अररिया: बिहार के अररिया जिले में भूमि रिकॉर्ड में कथित फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। फुलकाहा थाना क्षेत्र के डुमरिया गांव निवासी एक किसान की…

अररिया में जमीन रिकॉर्ड घोटाले का बड़ा आरोप: पूर्व सीओ समेत 55 लोगों पर एफआईआर, डिजिटल जमाबंदी में छेड़छाड़ का मामला
अररिया: बिहार के अररिया जिले में भूमि रिकॉर्ड में कथित फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। फुलकाहा थाना क्षेत्र के डुमरिया गांव निवासी एक किसान की शिकायत पर पूर्व अंचलाधिकारी (सीओ), वर्तमान अधिकारियों, राजस्व कर्मचारियों और कथित भू-माफियाओं सहित कुल 55 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामले ने जिले में भूमि अभिलेखों की सुरक्षा और डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसान की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला डुमरिया गांव निवासी किसान बैद्यनाथ बहरदार ने आरोप लगाया है कि उनकी खतियानी जमीन की जमाबंदी और ऑनलाइन भूमि अभिलेखों में अवैध रूप से बदलाव कर अन्य लोगों के नाम दर्ज कर दिए गए। शिकायत के आधार पर फुलकाहा थाना में मामला दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पूर्व और वर्तमान अधिकारियों पर भी आरोप प्राथमिकी में कई अधिकारियों और कर्मचारियों को नामजद किया गया है। इनमें पूर्व अंचलाधिकारी Shambhu Prakash, अंचलाधिकारी Uttam Rahul, वर्तमान अधिकारी Ravindra Kumar, राजस्व कर्मचारी Jitendra Kumar Rai तथा Jamiur Rahman सहित कई अन्य लोगों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। डिजिटल रिकॉर्ड में हेरफेर का आरोप शिकायतकर्ता का आरोप है कि सरकारी डिजिटल हस्ताक्षर (डोंगल) का दुरुपयोग कर ऑनलाइन भूमि रिकॉर्ड में बदलाव किए गए। उनका कहना है कि मूल दस्तावेजों में किसी प्रकार के वैध आधार के बिना जमीन की जमाबंदी और अभिलेखों में संशोधन कर अन्य व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दिए गए। यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल व्यक्तिगत विवाद नहीं बल्कि डिजिटल भूमि प्रबंधन प्रणाली से जुड़ी गंभीर अनियमितता का उदाहरण माना जा सकता है। न्यायालय के आदेश की अवहेलना का दावा प्राथमिकी में यह भी आरोप लगाया गया है कि न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद कुछ लोगों ने विवादित भूमि पर कब्जा करने का प्रयास किया। शिकायतकर्ता के अनुसार इस दौरान उनकी फसल को नुकसान पहुंचाया गया और विरोध करने पर कथित तौर पर हथियार दिखाकर धमकाया गया। मामले से जुड़े वीडियो फुटेज और अन्य दस्तावेज भी पुलिस को सौंपे गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। भूमि रिकॉर्ड सुरक्षा पर उठे सवाल इस मामले ने बिहार की डिजिटल भूमि अभिलेख व्यवस्था की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकारी लॉगिन, डिजिटल हस्ताक्षर या रिकॉर्ड सिस्टम का दुरुपयोग कर भूमि अभिलेखों में बदलाव संभव है, तो इसकी व्यापक जांच होनी चाहिए। पुलिस ने शुरू की जांच Phulkaha Police Station ने प्राथमिकी दर्ज कर भूमि रिकॉर्ड में कथित हेरफेर, दस्तावेजी फर्जीवाड़े और अवैध कब्जे से जुड़े आरोपों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जाएगी। एसपी ने दिया कार्रवाई का भरोसा अररिया के पुलिस अधीक्षक Jitendra Kumar ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है और प्राथमिकी के आधार पर जांच जारी है। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। "मामला संज्ञान में आया है। प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है। जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।" — जितेन्द्र कुमार, पुलिस अधीक्षक, अररिया किसानों में बढ़ी चिंता घटना के बाद क्षेत्र के किसानों में भूमि रिकॉर्ड की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी शिकायतें सामने न आएं। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि भूमि अभिलेखों में वास्तव में किसी प्रकार की अनियमितता या फर्जीवाड़ा हुआ था या नहीं।

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