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डॉ. संदीप मारवाह बने अखिल भारतीय गुरुकुल एवं गौशाला अनुसंधान संस्थान के लाइफटाइम राष्ट्रीय सलाहकार

संस्थान को मिलेगा वैश्विक विस्तार, गुरुकुल शिक्षा और गौसंरक्षण को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की पहल रिपोर्ट: प्रदीप कुमार नायक स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार मधुबनी भारतीय संस्कृति, शिक्षा, मीडिया और गौसेवा के क्षेत्र में कार्यरत अखिल भारतीय गुरुकुल एवं गौशाला अनुसंधान संस्थान ने एक महत्वपूर्ण और दूरदर्श

डॉ. संदीप मारवाह बने अखिल भारतीय गुरुकुल एवं गौशाला अनुसंधान संस्थान के लाइफटाइम राष्ट्रीय सलाहकार

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संस्थान को मिलेगा वैश्विक विस्तार, गुरुकुल शिक्षा और गौसंरक्षण को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की पहल रिपोर्ट: प्रदीप कुमार नायक स्वतंत्र लेखक एवं पत्रकार मधुबनी भारतीय संस्कृति, शिक्षा, मीडिया और गौसेवा के क्षेत्र में कार्यरत अखिल भारतीय गुरुकुल एवं गौशाला अनुसंधान संस्थान ने एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी निर्णय लेते हुए अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त मीडिया शिक्षाविद् एवं सांस्कृतिक दूत डॉ. संदीप मारवाह को संस्थान का लाइफटाइम राष्ट्रीय सलाहकार नियुक्त किया है। इस निर्णय को संस्थान के इतिहास में एक मील का पत्थर माना जा रहा है, जिससे न केवल गुरुकुल परंपरा और गौसंरक्षण को मजबूती मिलेगी, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को वैश्विक मंच पर नई पहचान मिलने की भी उम्मीद है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब डॉ. संदीप मारवाह को वर्ष 2026 के लिए फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (एफएफआई) का उपाध्यक्ष भी नामित किया गया है। यह उपलब्धि भारतीय सिनेमा, मीडिया और सांस्कृतिक क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण मानी जा रही है। संस्थान का मानना है कि डॉ. मारवाह का यह अनुभव और वैश्विक नेटवर्क गुरुकुल शिक्षा और गौशाला अनुसंधान को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा। गुरुकुल परंपरा और गौसेवा के संरक्षण का संकल्प अखिल भारतीय गुरुकुल एवं गौशाला अनुसंधान संस्थान भारत की प्राचीन गुरुकुल परंपरा , गौसंरक्षण , गौअनुसंधान , संस्कृतिपरक शिक्षा , राष्ट्र निर्माण और मानवीय मूल्यों के संरक्षण के लिए समर्पित एक राष्ट्रीय संस्था है। संस्थान का उद्देश्य भारतीय जीवन दर्शन को आधुनिक शिक्षा, अनुसंधान और वैश्विक संवाद के साथ जोड़ना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ा जा सके। संस्थान लंबे समय से यह प्रयास कर रहा है कि गुरुकुल शिक्षा को केवल अतीत की परंपरा के रूप में नहीं, बल्कि आधुनिक समय की जरूरतों के अनुरूप एक प्रभावी शिक्षण मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जाए। इसी क्रम में डॉ. संदीप मारवाह जैसे अंतरराष्ट्रीय अनुभव संपन्न व्यक्तित्व का मार्गदर्शन संस्थान के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। डॉ. संदीप मारवाह का वैश्विक योगदान डॉ. संदीप मारवाह रचनात्मक कला, फिल्म, मीडिया शिक्षा और सांस्कृतिक कूटनीति के क्षेत्र में विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित नाम हैं। वे मारवाह स्टूडियोज के चेयरमैन, नोएडा फिल्म सिटी के संस्थापक तथा एएएफटी विश्वविद्यालय (AAFT University) के संस्थापक-कुलाधिपति हैं। उनके नेतृत्व में एएएफटी विश्वविद्यालय ने मीडिया और फिल्म शिक्षा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है। डॉ. मारवाह अब तक 145 से अधिक देशों के विद्यार्थियों का मार्गदर्शन कर चुके हैं और भारत की सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। भारतीय कला, संस्कृति और शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए उन्हें देश-विदेश में अनेक सम्मान और पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। संस्थान पदाधिकारियों की प्रतिक्रिया इस अवसर पर संस्थान के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्योतिष रत्न गुरुजी गौतम ऋषि ने कहा कि डॉ. संदीप मारवाह जैसे वैश्विक दृष्टि संपन्न व्यक्तित्व का मार्गदर्शन संस्थान के लिए अत्यंत गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि डॉ. मारवाह का अनुभव गुरुकुल शिक्षा, भारतीय संस्कृति और गौसेवा को अंतरराष्ट्रीय विमर्श से जोड़ने में मील का पत्थर साबित होगा। वहीं, राष्ट्रीय संगठन महासचिव आनंद सिंह ने कहा कि इस नियुक्ति से संस्थान की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान और अधिक सुदृढ़ होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि डॉ. मारवाह के मार्गदर्शन में संस्थान आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक और शैक्षिक दिशा तय करने में सफल होगा। भविष्य की योजनाएं और अपेक्षाएं संस्थान ने विश्वास व्यक्त किया है कि डॉ. संदीप मारवाह के मार्गदर्शन में गुरुकुल शिक्षा को आधुनिक मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही गौशाला अनुसंधान, गौसंरक्षण और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को वैश्विक मंचों पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा। संस्थान परिवार का मानना है कि यह सहयोग न केवल संस्थान के लिए, बल्कि राष्ट्र, संस्कृति और समाज के लिए भी दीर्घकालिक रूप से लाभकारी सिद्ध होगा। यह पहल भारत की प्राचीन परंपराओं को आधुनिक वैश्विक संदर्भ में प्रस्तुत करने का एक सशक्त माध्यम बनेगी और भारतीय संस्कृति को विश्व पटल पर और अधिक मजबूती प्रदान करेगी।

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