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मॉडल रेलवे स्टेशन पर बुनियादी सुविधाओं की पोल: जमुई स्टेशन पर महिलाओं को शौचालय के लिए करना पड़ता है ट्रेन का इंतजार

जमुई: डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत अभियान और विश्वस्तरीय रेलवे स्टेशनों के दावों के बीच बिहार का जमुई रेलवे स्टेशन जमीनी हकीकत की एक अलग ही तस्वीर पेश कर रहा है। अमृत भारत योजना के तहत जिस स्टेशन को मॉडल स्टेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है, वहां यात्रियों—खासतौर पर महिलाओं—को शौचालय जैसी बुनियादी

मॉडल रेलवे स्टेशन पर बुनियादी सुविधाओं की पोल: जमुई स्टेशन पर महिलाओं को शौचालय के लिए करना पड़ता है ट्रेन का इंतजार

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जमुई: डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत अभियान और विश्वस्तरीय रेलवे स्टेशनों के दावों के बीच बिहार का जमुई रेलवे स्टेशन जमीनी हकीकत की एक अलग ही तस्वीर पेश कर रहा है। अमृत भारत योजना के तहत जिस स्टेशन को मॉडल स्टेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है, वहां यात्रियों—खासतौर पर महिलाओं—को शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई महिला यात्रियों को मजबूरी में आने वाली ट्रेनों का इंतजार करना पड़ता है ताकि वे ट्रेन के शौचालय का उपयोग कर सकें। जमुई रेलवे स्टेशन पर रोजाना 25 से 30 ट्रेनों का ठहराव होता है। सैकड़ों यात्री यहां से प्रतिदिन यात्रा करते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे शामिल हैं। इसके बावजूद स्टेशन परिसर में शौचालय और स्वच्छ पेयजल की स्थिति बेहद खराब है। स्टेशन पर सुविधाओं की जानकारी देने वाला बोर्ड जरूर लगा है, लेकिन उस पर दर्ज सुविधाएं जमीनी हकीकत से मेल नहीं खातीं। एक शौचालय, वह भी जर्जर स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक और वेटिंग एरिया में कोई शौचालय उपलब्ध नहीं है। प्लेटफॉर्म नंबर दो पर एक शौचालय मौजूद है, लेकिन उसकी हालत इतनी खराब है कि वहां जाना जोखिम उठाने जैसा है। अंदर गंदगी का अंबार लगा है, फर्श और दीवारें टूटी हुई हैं, पानी की व्यवस्था नहीं है और दुर्गंध के कारण वहां खड़ा होना भी मुश्किल है। महिलाओं के लिए बना शौचालय अधिकतर समय बंद रहता है, जिस पर ताला लटका रहता है। यात्रियों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें स्टेशन के बाहर होटलों या दुकानों का सहारा लेना पड़ता है। कई बार लंबा इंतजार करने वाली महिला यात्रियों को ट्रेन आने तक अपनी जरूरतों को दबाकर रखना पड़ता है, जो न केवल असुविधाजनक बल्कि अपमानजनक भी है। महिला यात्रियों की पीड़ा झाझा के चरघरा की रहने वाली सितारा कुमारी ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि वह रोजाना इस स्टेशन से यात्रा करती हैं। उनका कहना है कि महिलाओं के लिए यहां कोई सुरक्षित और साफ शौचालय नहीं है। “हम रोज इस परेशानी से गुजरते हैं। महिलाओं के लिए खुले में जाना संभव नहीं होता, इसलिए ट्रेन या घर पहुंचने तक इंतजार करना पड़ता है। यह स्थिति बहुत दुखद है,” उन्होंने कहा। सितारा कुमारी ने यह भी कहा कि स्टेशन पर सुविधाओं को लेकर मानक तय हैं, लेकिन उनका पालन नहीं हो रहा। बोर्ड पर दर्ज आंकड़ों के अनुसार स्टेशन पर कई शौचालय और मूत्रालय होने चाहिए, लेकिन वास्तविकता में अधिकांश सुविधाएं या तो बंद हैं या उपयोग के लायक नहीं हैं। स्वच्छता अभियान पर सवाल स्वच्छ भारत अभियान के तहत रेलवे स्टेशनों पर साफ-सफाई और शौचालय व्यवस्था को प्राथमिकता देने की बात कही जाती है, लेकिन जमुई स्टेशन पर न तो नियमित सफाई दिखती है और न ही स्वच्छ पानी की भरोसेमंद व्यवस्था। यात्रियों का आरोप है कि पीने के पानी की टंकियों की सफाई नियमित रूप से नहीं होती और कई बार पानी में गंदगी तक दिखाई देती है। फुट ओवर ब्रिज का मलबा बना खतरा स्टेशन पर केवल शौचालय ही नहीं, बल्कि सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं भी सामने आ रही हैं। पुराने फुट ओवर ब्रिज को तोड़ दिया गया था और नया पुल बन चुका है, लेकिन प्लेटफॉर्म नंबर दो पर पुराने पुल का मलबा पिछले आठ महीनों से पड़ा हुआ है। उसी रास्ते से रोजाना यात्री, रेलकर्मी और बच्चे गुजरते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी समय हादसा हो सकता है। रेलवे अधिकारियों का आश्वासन मामले पर जब दानापुर रेल मंडल के डीसीएम अभिनव कुमार से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं की स्थिति की जांच कराई जाएगी। उनका कहना है कि अगर कहीं कमी है तो उसे दूर किया जाएगा। सांसद ने उठाने का दिया भरोसा जमुई सांसद अरुण भारती ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि महिला शौचालय और पुराने फुट ओवर ब्रिज के मलबे का मामला उनके संज्ञान में है और संसद सत्र शुरू होते ही वे इसे रेल मंत्री के सामने उठाएंगे। यात्री पूछ रहे सवाल यात्री यह सवाल कर रहे हैं कि अगर वीआईपी आगमन से पहले स्टेशन पर अस्थायी रूप से फाइव-स्टार जैसी सुविधाएं तैयार हो सकती हैं, तो आम यात्रियों के लिए स्थायी और सुरक्षित शौचालय की व्यवस्था क्यों नहीं हो पा रही है। मॉडल स्टेशन का अर्थ केवल भवन की चमक-दमक नहीं, बल्कि यात्रियों की गरिमा, सुरक्षा और सुविधा भी है। अमृत भारत योजना के तहत 23 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से जमुई स्टेशन का विकास कार्य जारी है। ऐसे में अब देखना यह होगा कि यह विकास यात्रियों की बुनियादी जरूरतों को कब तक पूरा कर पाता है, या फिर महिलाएं यूं ही शौचालय के लिए ट्रेन का इंतजार करती रहेंगी।

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