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Kisanganj:- ना माइकिंग का शोर न पोस्टर-बैनर, डोर टू डोर संपर्क

ना माइकिंग का शोर न पोस्टर-बैनर, डोर टू डोर संपर्क ना माइकिंग का शोर, न बैनर व पोस्टर। सिर्फ डोर टू डोर जनसंपर्क। इन दिनों नगर निकाय चुनाव में खड़े प्रत्याशियों की यही रुटीन हो गयी है। अहले सुबह उठते ही प्रत्याशियों के जनसंपर्क का सिलसिला शुरु हो जाता है। जो देर रात तक चलता है। नगर निकाय चुनाव में पह

Kisanganj:- ना माइकिंग का शोर न पोस्टर-बैनर, डोर टू डोर संपर्क

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ना माइकिंग का शोर न पोस्टर-बैनर, डोर टू डोर संपर्क ना माइकिंग का शोर, न बैनर व पोस्टर। सिर्फ डोर टू डोर जनसंपर्क। इन दिनों नगर निकाय चुनाव में खड़े प्रत्याशियों की यही रुटीन हो गयी है। अहले सुबह उठते ही प्रत्याशियों के जनसंपर्क का सिलसिला शुरु हो जाता है। जो देर रात तक चलता है। नगर निकाय चुनाव में पहली बार सोशल मीडिया पर चुनाव आयोग द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बाद अब प्रत्याशियों को दोगुनी मेहनत करनी पड़ रही है। पहले प्रत्याशी सोशल मीडिया के जरिए भी ज्यादा लोकप्रिय हो जाते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं रहा। प्रत्याशियों की रात की नींद उड़ गयी है। बैचेनी बढ़ गयी है। रात दिन एक कर प्रत्याशी जनसंपर्क में लग गए हैं। वार्ड पार्षद प्रत्याशी के लिए तो राहत की बात है कि उन्हें सिर्फ अपने वार्ड में घुमना पर रहा है। लेकिन मुख्य पार्षद व उप मुख्य पार्षद प्रत्याशी की तो पूछिए मत। उन्हें शहर के 34 वार्डों में घुमना विधानसभा चुनाव से कम नहीं लग रहा। सोशल मीडिया ऐसे प्रत्याशियों के लिए बहुत बड़ा सहारा था। उन्हें अब डोर टू डोर जाकर आरजू मिन्नत करना पड़ रहा है। प्रत्याशियों के साथ अब न बैनर व पोस्टर न हुजूम दिख रहा है। सिर्फ हाथ में पंप लेट लेकर दो चार लोगों के साथ डोर टू डोर जा रहे हैं। क्रम सं., चुनाव चिन्ह लिखा पंप लेट मतदाताओं के हाथों में दे रहे हैं। साथ ही यह भी बता रहे हैं कि किस नंबर की बटन, किस चुनाव चिन्ह के सामने दबाना है। ताकि किसी तरह की मिसिंग न हो जाए। पहले की तरह शहर में माइकिंग का शोर भी नहीं दिख रहा। ज्यादातर प्रत्याशी डोर टू डोर प्रचार पर ही भरोसा जता रहे हैं। मतदाताओं के दरवाजे पर पहुंच आशीर्वाद ले रहे हैं। जो प्रत्याशी पुराने हैं वो तो अपने काम की दुहाई दे रहे हैं लेकिन जो पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं वो एक बार मौका देने की बात कह मतदाताओं के आगे शीश झुका रहे हैं। वोट मांगने निकल रही महिलाएं वोट मांगने में महिला प्रत्याशी भी पीछे नहीं है। वे भी वोट मांगने निकल रही है। कोई अपने लिए तो कोई अपने पति, देवर, ससुर व सास के लिए वोट मांग रही है। पर्श में सिंदुर व बिंदी लेकर एक दूसरे को लगाकर संबंध को मजबूत करने में जुटी है। सोशल मीडिया पर प्रचार बंद होने से युवाओं को झटका चाहे लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा या नगर निकाय का चुनाव इन चुनावों के सोशल मीडिया का बोलबाला काफी रहा है। इसके जरिए प्रत्याशियों की लोकप्रियता सर चढ़कर बोलती थी। सोशल मीडिया के जरिए प्रचार-प्रसार करने के लिए प्रत्याशी बजाप्ता युवाओं को पैसा देकर रखते थे। जो दिन भर उनके गतिविधि को सोशल मीडिया पर डालते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं रहा।

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