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दरभंगा राजघराने का अंतिम अध्याय समाप्त, महारानी कामसुंदरी देवी के निधन से मिथिला ने खोई अपनी राजसी धरोह

Published: 12/01/2026, 04:09:26 pm55 viewsSeemanchal Live

महारानी कामसुंदरी देवी निधन की खबर से पूरे मिथिला क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। दरभंगा। बिहार के ऐतिहासिक दरभंगा राजघराना की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी का सोमवार को 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहीं महारानी ने दरभंगा राज परिसर स्थित कल्याणी निवास में अंतिम सांस ली। उ

दरभंगा राजघराने का अंतिम अध्याय समाप्त, महारानी कामसुंदरी देवी के निधन से मिथिला ने खोई अपनी राजसी धरोह
महारानी कामसुंदरी देवी निधन की खबर से पूरे मिथिला क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। दरभंगा। बिहार के ऐतिहासिक दरभंगा राजघराना की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी का सोमवार को 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहीं महारानी ने दरभंगा राज परिसर स्थित कल्याणी निवास में अंतिम सांस ली। उनके निधन के साथ ही मिथिला की राजसी विरासत का एक गौरवशाली युग समाप्त हो गया। शोक में डूबी मिथिला, हर वर्ग में गम का माहौल महारानी के निधन की खबर फैलते ही दरभंगा से लेकर पूरे मिथिला अंचल में शोक की लहर दौड़ गई। सामाजिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक जगत से जुड़े लोगों ने इसे मिथिला के लिए अपूरणीय क्षति बताया। राजसी गरिमा, सादगी और सेवा भाव की प्रतीक रहीं महारानी को लोग मिथिला की जीवित परंपरा के रूप में याद कर रहे हैं। महाराजा कामेश्वर सिंह की अंतिम जीवन संगिनी महारानी कामसुंदरी देवी, दरभंगा के अंतिम महाराजाधिराज डॉ. सर कामेश्वर सिंह की तीसरी और अंतिम पत्नी थीं। दोनों का विवाह 1940 के दशक में हुआ था। इससे पहले महाराजा की पहली पत्नी महारानी राजलक्ष्मी और दूसरी पत्नी महारानी कामेश्वरी प्रिया का निधन हो चुका था। संतान न होने के कारण महारानी राज परिवार की सबसे वरिष्ठ सदस्य थीं। 1962 में महाराजा कामेश्वर सिंह के निधन के बाद उन्होंने दशकों तक राजपरिवार की परंपराओं और उत्तरदायित्वों को गरिमा के साथ निभाया। सामाजिक सेवा को बनाया जीवन का उद्देश्य महारानी कामसुंदरी देवी केवल राजसी पहचान तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि वे सामाजिक सेवा और परोपकार की मजबूत मिसाल थीं। उन्होंने अपने पति की स्मृति में महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन की स्थापना की। इस संस्था के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, साहित्य और सामाजिक कल्याण के अनेक कार्य किए गए। मिथिला की सांस्कृतिक धरोहर, लोक परंपराओं और सामाजिक मूल्यों के संरक्षण में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा। गिरने के बाद बिगड़ी थी तबीयत पिछले कुछ समय से महारानी अस्वस्थ चल रही थीं। सितंबर 2025 में बाथरूम में फिसलने से उन्हें गंभीर चोट आई थी, जिसके बाद ब्रेन हेमरेज और खून के थक्के की समस्या उत्पन्न हो गई। उन्हें दरभंगा के एक निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। बाद में उन्हें राज परिसर लाया गया, जहां सोमवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। अंतिम संस्कार की तैयारी, दिल्ली से लौटेंगे वंशज महारानी के निधन के बाद राज परिवार में शोक का माहौल है। दरभंगा महाराज के वंशज और ट्रस्टी कपिलेश्वर सिंह फिलहाल दिल्ली में हैं। उनके दरभंगा पहुंचने के बाद महारानी का अंतिम संस्कार पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ श्यामा माई परिसर में संपन्न किया जाएगा। राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक हस्तियों द्वारा लगातार शोक संवेदनाएं प्रकट की जा रही हैं। राजसी परंपरा से सामाजिक चेतना तक का सफर महारानी कामसुंदरी देवी का जीवन दरभंगा राजघराने की राजसी परंपरा और आधुनिक सामाजिक चेतना का सुंदर संगम था। उन्होंने शांति, सेवा और संस्कारों के साथ मिथिला की पहचान को नई ऊंचाई दी। उनके निधन को केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक युग का अवसान माना जा रहा है।

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