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Politics

राज्यसभा की ओर बढ़े नीतीश कुमार और नितिन नबीन, बिहार की राजनीति में हलचल

पटना से सीमांचल लाइव के लिए विशेष रिपोर्ट पटना, 5 मार्च: बिहार की राजनीति में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया। उनके साथ भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने भी राज्यसभा के लिए अपना नामांकन पत्र जमा किया। इसके

राज्यसभा की ओर बढ़े नीतीश कुमार और नितिन नबीन, बिहार की राजनीति में हलचल

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पटना से सीमांचल लाइव के लिए विशेष रिपोर्ट पटना, 5 मार्च: बिहार की राजनीति में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया। उनके साथ भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने भी राज्यसभा के लिए अपना नामांकन पत्र जमा किया। इसके अलावा उपेन्द्र कुशवाहा, रामनाथ ठाकुर और शिवेश राम ने भी राज्यसभा चुनाव के लिए अपनी उम्मीदवारी पेश की है। इस घटनाक्रम के साथ ही बिहार की राजनीति में नई चर्चा और संभावित राजनीतिक बदलावों की अटकलें तेज हो गई हैं। सुबह से ही पटना में राजनीतिक हलचल देखने को मिली। विधानसभा परिसर और आसपास के क्षेत्रों में नेताओं, विधायकों और कार्यकर्ताओं की आवाजाही बढ़ गई थी। राज्यसभा चुनाव के नामांकन को लेकर सत्तारूढ़ एनडीए और विपक्ष दोनों की निगाहें इस प्रक्रिया पर टिकी हुई थीं। अमित शाह और नीतीश कुमार की अहम मुलाकात नामांकन से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पटना पहुंचे। एयरपोर्ट से सीधे वे नितिन नबीन के आवास पहुंचे, जहां दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में महत्वपूर्ण बैठक हुई। बताया जा रहा है कि इस बैठक में राज्यसभा चुनाव और बिहार की राजनीतिक स्थिति को लेकर चर्चा हुई। इसके बाद अमित शाह मुख्यमंत्री आवास ‘एक अणे मार्ग’ पहुंचे और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। इस दौरान नित्यानंद राय, सम्राट चौधरी और संजय सरावगी सहित कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। मुलाकात के बाद सभी नेता नामांकन प्रक्रिया के लिए रवाना हुए। राजनीतिक हलकों में इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि हाल के दिनों में बिहार की राजनीति में संभावित बदलाव को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं। महागठबंधन की ओर से भी उम्मीदवार राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन ने भी अपनी दावेदारी पेश की है। महागठबंधन की ओर से अमरेंद्र धारी सिंह ने राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया। इस दौरान उनके साथ राजद नेता तेजस्वी यादव सहित कई विपक्षी दलों के विधायक प्रस्तावक के रूप में मौजूद थे। महागठबंधन के नेताओं ने कहा कि राज्यसभा चुनाव केवल एक संसदीय प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह बिहार की राजनीतिक दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। नीतीश के फैसले पर तेज हुई राजनीतिक प्रतिक्रिया मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की संभावना को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जदयू के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने कहा कि “नीतीश युग का अंत नहीं हो सकता। बिहार के विकास में उनका योगदान ऐतिहासिक रहा है और उनकी भूमिका आगे भी महत्वपूर्ण बनी रहेगी।” वहीं, राजद नेता मृत्युंजय तिवारी ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा अपने राजनीतिक हितों के अनुसार फैसले लेती रही है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी इस घटनाक्रम को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं तो बिहार की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। जदयू कार्यकर्ताओं में असंतोष इस घटनाक्रम के बीच जदयू के कुछ कार्यकर्ताओं में नाराजगी भी देखने को मिली। मुख्यमंत्री आवास के बाहर कई कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए नीतीश कुमार से मुख्यमंत्री पद पर बने रहने की मांग की। कुछ कार्यकर्ताओं ने भावुक होकर कहा कि बिहार की जनता ने नीतीश कुमार के नाम पर वोट दिया है, इसलिए उन्हें मुख्यमंत्री पद नहीं छोड़ना चाहिए। स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री आवास के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। बिहार की राजनीति पर क्या पड़ेगा असर? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं तो यह बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। इससे राज्य की सत्ता संरचना और गठबंधन की रणनीति में भी परिवर्तन संभव है। हालांकि एनडीए के नेताओं का कहना है कि यह पूरी तरह पार्टी का रणनीतिक निर्णय है और इससे बिहार के विकास कार्यों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उनका मानना है कि नीतीश कुमार का अनुभव संसद में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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