अमेरिका और पश्चिम के दबदबे के बीच SCO Summit ने दिखाई बदलती वैश्विक तस्वीर; China ने multipolar world की वकालत की, Russia ने बढ़ाया रणनीतिक दबाव और India ने साफ किया—आतंकवाद को किसी देश का ‘Strategic Asset’ नहीं बनने दिया जा सकता
बिश्केक/नई दिल्ली, 2 सितंबर 2026: दुनिया की राजनीति में शक्ति का संतुलन क्या धीरे-धीरे बदल रहा है?
Shanghai Cooperation Organisation यानी SCO के ताजा शिखर सम्मेलन के बाद यह सवाल एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में है।
एक ही मंच पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत कई देशों के नेता मौजूद रहे।
यह बैठक ऐसे समय हुई है जब अमेरिका-ईरान युद्ध जारी है, Russia-Ukraine conflict खत्म नहीं हुआ, global trade पर tariffs का दबाव है और दुनिया में पश्चिमी देशों के मुकाबले एक अधिक multipolar व्यवस्था की मांग तेज हो रही है।
Pakistan के सामने Modi का बड़ा संदेश
Summit में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद पर भारत की पुरानी लेकिन बेहद स्पष्ट position दोहराई।
उन्होंने कहा कि terrorism के खिलाफ लड़ाई में double standards नहीं हो सकते और किसी भी देश को आतंकवाद को अपनी नीति के साधन या “strategic asset” के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
यह बयान उस समय आया जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी सम्मेलन में मौजूद थे।
हालांकि मोदी ने अपने संबोधन में इस संदर्भ में पाकिस्तान का नाम सीधे नहीं लिया, लेकिन भारत लंबे समय से Islamabad पर cross-border terrorism को support करने का आरोप लगाता रहा है।
और दिलचस्प बात—अब SCO की Chair Pakistan के पास
इस summit के बाद geopolitical तस्वीर और दिलचस्प हो गई है।
Pakistan ने SCO की chairmanship संभाल ली है।
यानी जिस मंच पर भारत ने terrorism को strategic asset बनाने वालों के खिलाफ कड़ा संदेश दिया, उसी संगठन की अगली leadership responsibility Pakistan के पास होगी।
यह आने वाले महीनों में India-Pakistan diplomacy के लिए महत्वपूर्ण होगा।
भारत देखेगा कि Pakistan अपनी chairmanship के दौरान counter-terrorism agenda को किस तरह आगे बढ़ाता है।
Modi, Xi और Putin एक साथ क्यों महत्वपूर्ण?
SCO की तस्वीरें केवल diplomatic photo-op नहीं हैं।
भारत, चीन और रूस तीनों बड़ी powers हैं, लेकिन तीनों के interests एक जैसे नहीं हैं।
Russia और China के strategic relations काफी मजबूत हैं।
India के Russia के साथ दशकों पुराने defence और strategic संबंध हैं।
दूसरी ओर India और China के बीच border dispute और strategic competition भी मौजूद है।
इसके बावजूद तीनों leaders का एक multilateral platform पर लगातार engagement करना Washington और European capitals में ध्यान से देखा जाता है।
लेकिन इसे तुरंत India-China-Russia alliance कहना गलत होगा।
भारत की foreign policy का मूल जोर strategic autonomy पर रहा है—अर्थात अलग-अलग मुद्दों पर अलग-अलग देशों के साथ cooperation, बिना किसी एक geopolitical bloc का स्थायी हिस्सा बने।
Xi Jinping का संदेश—दुनिया सिर्फ एक Power से नहीं चले
Chinese President Xi Jinping ने SCO Plus meeting में एक “equal and orderly multipolar world” की वकालत की।
उन्होंने unilateralism, protectionism और power politics की आलोचना करते हुए global governance को ज्यादा न्यायपूर्ण और प्रतिनिधिक बनाने की बात कही।
सरल भाषा में इसका मतलब है—
China ऐसी international व्यवस्था चाहता है जिसमें global decision-making पर अमेरिका और उसके Western allies का प्रभाव कम हो और China, India, Russia तथा Global South के दूसरे देशों की भूमिका बढ़े।
Beijing लंबे समय से इसी narrative को आगे बढ़ा रहा है।
SCO आखिर कितना बड़ा है?
SCO अब केवल China और Central Asia का छोटा regional forum नहीं रहा।
इसके सदस्य देशों में China, Russia, India, Pakistan, Iran, Belarus, Kazakhstan, Kyrgyzstan, Tajikistan और Uzbekistan शामिल हैं।
इन देशों को एक साथ देखें तो organization के पास विशाल geography, बड़ी population, energy resources और military power मौजूद है।
China और India दुनिया की सबसे बड़ी populations और economies में शामिल हैं।
Russia दुनिया की प्रमुख nuclear powers में है।
Iran Middle East की महत्वपूर्ण regional power है।
Central Asian countries के पास strategic geography और energy resources हैं।
इसीलिए SCO का geopolitical weight लगातार बढ़ा है।
लेकिन क्या यह NATO जैसा Alliance है?
नहीं।
SCO को NATO जैसा military alliance समझना गलत होगा।
NATO में collective defence का स्पष्ट framework है।
SCO का structure अलग है।
यह security cooperation, counter-terrorism, economic coordination और regional diplomacy का platform है।
इसके सदस्य देशों के बीच खुद गंभीर disagreements भी हैं।
India और Pakistan के relations तनावपूर्ण हैं।
India और China के बीच border dispute है।
China और Central Asian countries के economic equations भी अलग-अलग हैं।
इसलिए SCO की ताकत बड़ी है, लेकिन internal contradictions भी कम नहीं हैं।
Iran War पर SCO ने लिया बड़ा Stand
इस summit का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा Iran था।
SCO members ने Bishkek Declaration में Iran पर हुए military strikes की आलोचना की और कहा कि ऐसी कार्रवाई international law तथा UN Charter के principles के लिए गंभीर चुनौती पैदा करती है।
Declaration में Iran पर हमलों से civilian casualties और economic damage का भी उल्लेख किया गया।
यह statement इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि Iran खुद SCO member है।
और इस समय अमेरिका तथा Iran के बीच फिर military confrontation तेज हुआ है।
इससे SCO केवल economic या diplomatic organization नहीं, बल्कि major geopolitical conflicts पर collective position लेने वाला मंच भी बनता दिखाई दे रहा है।
Russia-Ukraine War भी Background में
SCO summit ऐसे समय हुआ जब Russia-Ukraine युद्ध जारी है।
Russian President Vladimir Putin ने summit के दौरान और उसके आसपास अपनी military position को मजबूत बताते हुए संकेत दिया कि Moscow पीछे हटने के mood में नहीं है।
दूसरी तरफ Ukraine Russian territory के अंदर drone strikes बढ़ा रहा है।
इसलिए Putin के लिए SCO महत्वपूर्ण diplomatic मंच है।
Western sanctions और diplomatic pressure के बावजूद Russia यह दिखाना चाहता है कि वह international isolation में नहीं है।
जब Putin को China, India, Iran और Central Asian leaders के साथ मंच मिलता है, तो Moscow इसे अपने global diplomatic relevance के प्रमाण के रूप में पेश कर सकता है।
America इस तस्वीर को क्यों देख रहा है?
Washington के लिए SCO की बढ़ती visibility कई कारणों से महत्वपूर्ण है।
China अमेरिका का सबसे बड़ा long-term strategic competitor है।
Russia के साथ अमेरिका के relations Ukraine war के कारण बेहद खराब हैं।
Iran के साथ direct military conflict चल रहा है।
और India अमेरिका का महत्वपूर्ण strategic partner होने के बावजूद Russia के साथ भी मजबूत संबंध बनाए हुए है।
यानी अमेरिका के तीन प्रमुख geopolitical rivals—China, Russia और Iran—SCO के सदस्य हैं।
लेकिन उसी organization में India भी है।
यही India की स्थिति को बेहद खास बनाता है।
India अमेरिका का Partner भी, Russia का दोस्त भी
भारत की diplomacy पिछले कुछ वर्षों में इसी balancing के कारण international attention का केंद्र रही है।
India QUAD में अमेरिका, Japan और Australia के साथ है।
दूसरी तरफ BRICS और SCO में China और Russia के साथ बैठता है।
Russia से defence और energy relations बनाए रखता है।
Europe के साथ व्यापार बढ़ाता है।
Middle East में Israel और Arab countries दोनों के साथ relations रखता है।
यानी New Delhi किसी एक geopolitical camp में खुद को सीमित नहीं करना चाहता।
इसी को strategic autonomy कहा जाता है।
SCO summit की तस्वीर को इसलिए “India पश्चिम छोड़कर China-Russia camp में चला गया” के रूप में देखना oversimplification होगा।
फिर Modi-Xi Meeting क्यों अहम?
India-China relations में 2020 के border clashes के बाद गंभीर तनाव आया था।
इसके बाद दोनों देशों के संबंध कई वर्षों तक प्रभावित रहे।
अब high-level engagement बढ़ना यह संकेत देता है कि दोनों देश competition खत्म किए बिना relations को manage करने की कोशिश कर रहे हैं।
India के लिए China एक साथ economic partner, neighbour और strategic competitor है।
इसलिए communication channels खुले रखना New Delhi के लिए महत्वपूर्ण है।
SCO जैसे multilateral forums इसी काम में मदद करते हैं।
Pakistan के लिए मौका और परीक्षा दोनों
SCO chairmanship Pakistan के लिए diplomatic opportunity है।
Islamabad इसे international profile बढ़ाने के लिए इस्तेमाल कर सकता है।
लेकिन India का terrorism वाला message उसके लिए चुनौती भी बन सकता है।
अगर SCO के agenda में counter-terrorism प्रमुख विषय रहता है तो India cross-border terrorism का मुद्दा लगातार उठाने की कोशिश करेगा।
Pakistan इस narrative को किस तरह handle करता है, यह आने वाले summit cycle में देखने वाली बड़ी बात होगी।
क्या दुनिया दो हिस्सों में बंट रही है?
Cold War के समय global politics काफी हद तक दो camps में बंटी थी—
America-led West और Soviet Union-led bloc।
आज स्थिति उतनी सरल नहीं है।
China और Russia Western dominance को चुनौती देते हैं।
लेकिन India किसी China-led bloc में शामिल नहीं होना चाहता।
Saudi Arabia अमेरिका का पुराना partner होते हुए China से relations बढ़ाता है।
Turkey NATO member होकर Russia से भी बातचीत करता है।
कई Global South countries एक साथ Washington, Beijing, Moscow और New Delhi से संबंध बनाए रखना चाहती हैं।
इसलिए नई दुनिया शायद दो camps वाली नहीं बल्कि multiple power centres वाली हो रही है।
यही “multipolar world” की बहस का असली अर्थ है।
भारत के लिए इसमें Opportunity क्या है?
अगर दुनिया वास्तव में ज्यादा multipolar होती है तो India की bargaining power बढ़ सकती है।
America को India की जरूरत Indo-Pacific balance में है।
Russia India को बड़ा strategic और economic partner मानता है।
Europe India को manufacturing और market opportunity के रूप में देखता है।
Middle East में India energy buyer और विशाल market है।
Global South में India खुद को developing countries की आवाज के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।
इस स्थिति में New Delhi के पास अलग-अलग powers के साथ negotiation की ज्यादा space बनती है।
लेकिन फायदा तभी होगा जब India अपनी strategic independence बनाए रख सके।
Challenge भी उतना ही बड़ा
Multi-alignment सुनने में आसान है, लेकिन इसे maintain करना कठिन है।
अगर America और China का confrontation बढ़ता है तो India पर side चुनने का pressure बढ़ सकता है।
अगर Russia-Ukraine war और लंबा चलता है तो Moscow से संबंधों पर Western pressure बना रह सकता है।
अगर America-Iran war फैलता है तो India के Middle East interests प्रभावित हो सकते हैं।
और China के साथ border issue unresolved रहने तक bilateral relationship की एक सीमा बनी रहेगी।
इसलिए India को हर geopolitical crisis में बेहद सावधानी से balance बनाना होगा।
SCO Summit की सबसे बड़ी तस्वीर क्या है?
इस summit की सबसे बड़ी कहानी किसी एक handshake में नहीं है।
कहानी यह है कि दुनिया की बड़ी non-Western powers एक ऐसे मंच को लगातार मजबूत कर रही हैं जहां अमेरिका और European Union मौजूद नहीं हैं।
China इसे multipolar world के platform के रूप में देखता है।
Russia इसे Western isolation के मुकाबले diplomatic space के रूप में इस्तेमाल करता है।
Iran के लिए यह international support का मंच है।
Pakistan इसे diplomatic relevance बढ़ाने के अवसर के रूप में देखता है।
और India इसे strategic autonomy बनाए रखते हुए Eurasia के साथ engagement का माध्यम मानता है।
इन सभी देशों के objectives अलग हैं।
लेकिन वे एक ही table पर बैठे हैं।
यही SCO की सबसे बड़ी ताकत भी है और सबसे बड़ी कमजोरी भी।
दुनिया की राजनीति में अब अगला सवाल
अब सवाल यह नहीं कि America दुनिया की सबसे शक्तिशाली military और economic powers में है या नहीं—वह है।
बड़ा सवाल यह है कि क्या Washington अकेले global rules और geopolitical outcomes को पहले की तरह प्रभावित कर सकता है।
China ज्यादा influence चाहता है।
Russia Western pressure को चुनौती दे रहा है।
Global South ज्यादा representation चाहता है।
और India किसी एक camp के बजाय अपनी स्वतंत्र जगह बनाने की कोशिश कर रहा है।
Bishkek में Modi, Xi और Putin की मौजूदगी इसी बदलती दुनिया की तस्वीर है।
यह कोई नया military alliance नहीं है, लेकिन यह संकेत जरूर है कि 21वीं सदी की global politics अब केवल Washington, Moscow या Beijing में से किसी एक राजधानी के इर्द-गिर्द तय होने वाली नहीं है।
और इसी बदलते power balance में India की भूमिका आने वाले वर्षों में पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है।
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दुनिया में बन रहा नया Power Center? SCO में साथ दिखे Modi-Xi-Putin, Pakistan के सामने PM मोदी का आतंकवाद पर कड़ा संदेश
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