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US-Iran तनाव से दुनिया की बढ़ी चिंता: Hormuz में जहाजों की आवाजाही धीमी, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

नई दिल्ली/दुबई: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का असर अब अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर साफ दिखाई देने लगा है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण…

US-Iran तनाव से दुनिया की बढ़ी चिंता: Hormuz में जहाजों की आवाजाही धीमी, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

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नई दिल्ली/दुबई: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का असर अब अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर साफ दिखाई देने लगा है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से जहाजों की आवाजाही धीमी पड़ने और अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत में गतिरोध के कारण सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। हालात पर दुनिया भर की नजर इसलिए भी है क्योंकि फारस की खाड़ी से निकलने वाले तेल और गैस की बड़ी मात्रा इसी समुद्री रास्ते से होकर वैश्विक बाजार तक पहुंचती है। अगर यहां लंबे समय तक जहाजों की आवाजाही प्रभावित रहती है तो इसका असर भारत समेत दुनिया के कई देशों में ऊर्जा की कीमतों पर पड़ सकता है। Hormuz में क्यों बढ़ी चिंता? हाल में तेल टैंकरों पर हमलों की रिपोर्ट के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में तेज गिरावट देखी गई है। शिप-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक शनिवार को इस रास्ते से केवल पांच कमोडिटी जहाज गुजरे, जबकि रविवार के लिए कोई जहाज दर्ज नहीं हुआ। इससे पहले वाले सप्ताहांत में यह संख्या 31 थी। यह गिरावट बताती है कि क्षेत्र में बढ़े सुरक्षा जोखिम को देखते हुए शिपिंग कंपनियां ज्यादा सतर्क हो रही हैं। अमेरिका-ईरान बातचीत में नहीं बनी बात तनाव कम करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की उम्मीदों को भी झटका लगा है। दोनों देशों के बीच जारी मतभेदों के कारण फिलहाल कोई बड़ी सफलता सामने नहीं आई है। इसी अनिश्चितता ने अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की चिंता बढ़ा दी है। निवेशकों को आशंका है कि यदि तनाव और बढ़ता है तथा होर्मुज से तेल की आपूर्ति प्रभावित होती है तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल अमेरिका-ईरान तनाव और Hormuz में धीमी शिपिंग का असर सोमवार को तेल बाजार में दिखाई दिया। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई क्योंकि बाजार में सप्लाई को लेकर जोखिम बढ़ गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए यह केवल मध्य पूर्व का राजनीतिक संकट नहीं है। तेल आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति में इसका असर ट्रांसपोर्टेशन, एयरलाइन, मैन्युफैक्चरिंग और आम उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है। Strait of Hormuz इतना महत्वपूर्ण क्यों है? ईरान और ओमान के बीच स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे रणनीतिक समुद्री रास्तों में से एक है। फारस की खाड़ी के प्रमुख तेल उत्पादक देशों से निकलने वाले तेल और LNG का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचता है। इसलिए यहां किसी तरह का सैन्य तनाव, टैंकरों पर हमला या जहाजों की आवाजाही में बाधा आने पर दुनिया के ऊर्जा बाजार में तुरंत प्रतिक्रिया देखने को मिलती है। भारत पर भी पड़ सकता है असर भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। अगर कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक ऊंची रहती है तो भारत का आयात बिल बढ़ सकता है। इसका अप्रत्यक्ष असर महंगाई और परिवहन लागत पर भी पड़ने की आशंका रहती है। हालांकि घरेलू पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर कितना और कब असर पड़ेगा, यह कई दूसरे आर्थिक और नीतिगत कारकों पर भी निर्भर करेगा। Trump ने अमेरिकी लोगों को महंगे ईंधन के लिए किया आगाह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान के साथ जारी तनाव के बीच अमेरिका में ऊंची गैसोलीन कीमतों को लेकर बयान दिया है। ट्रंप प्रशासन ईरान पर आर्थिक दबाव और बढ़ाने की तैयारी में भी है। इससे आने वाले दिनों में दोनों देशों के रिश्तों में तनाव और बढ़ने की आशंका बनी हुई है। ईरान ने Hormuz को लेकर रखीं शर्तें दूसरी तरफ ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सामान्य शिपिंग बहाल होने को लेकर अमेरिका के सामने अपनी शर्तों की बात कही है। इस कारण स्थिति केवल सैन्य तनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार भी इस टकराव का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। अब पूरी दुनिया की नजर Hormuz पर आने वाले दिनों में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होगा कि अमेरिका और ईरान बातचीत की मेज पर किसी समाधान तक पहुंचते हैं या तनाव और बढ़ता है। अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सामान्य आवाजाही जल्द बहाल नहीं होती है तो तेल बाजार में अनिश्चितता बनी रह सकती है। भारत के लिए भी यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। मध्य पूर्व में तनाव जितना लंबा चलेगा, कच्चे तेल की कीमत और सप्लाई को लेकर जोखिम उतना ही बढ़ सकता है। फिलहाल Strait of Hormuz दुनिया के लिए केवल एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार की सबसे संवेदनशील जगहों में से एक बन गया है। डिस्क्लेमर: तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें और समुद्री यातायात की स्थिति तेजी से बदल सकती है। यह खबर 17 अगस्त 2026 तक उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों पर आधारित है।

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