Home पूर्णिया पूर्णिया में नरसंहार: डायन बताकर एक ही परिवार के 5 लोगों को जिंदा जलाया, गांव में दहशत

पूर्णिया में नरसंहार: डायन बताकर एक ही परिवार के 5 लोगों को जिंदा जलाया, गांव में दहशत

6 second read
Comments Off on पूर्णिया में नरसंहार: डायन बताकर एक ही परिवार के 5 लोगों को जिंदा जलाया, गांव में दहशत
0
9
1200 675 24539203 thumbnail 16x9 bihar thumb

पूर्णिया में नरसंहार: डायन के शक में एक ही परिवार के 5 लोगों को जिंदा जलाया गया, गांव में पसरा सन्नाटा

पूर्णिया (बिहार), 8 जुलाई 2025 – बिहार के पूर्णिया जिले के टेटगामा गांव में अंधविश्वास का भयावह चेहरा सामने आया है। यहां रविवार रात एक ही परिवार के 5 लोगों को डायन का आरोप लगाकर पहले पीटा गया और फिर जिंदा जला दिया गया। मृतकों में तीन महिलाएं और दो पुरुष शामिल हैं। यह हृदय विदारक घटना न सिर्फ राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि समाज में आज भी जीवित अंधविश्वास की खतरनाक तस्वीर पेश करती है।


🔴 घटना की पूरी कहानी

यह घटना पूर्णिया के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के टेटगामा गांव की है। रविवार देर रात गांव के ही करीब 50 लोगों की भीड़ ने एक आदिवासी परिवार पर हमला किया। आरोप था कि इस परिवार की महिला सदस्य ‘डायन’ हैं और उन्होंने गांव के एक बच्चे की मौत का कारण बना ‘काला जादू’ किया है।

भीड़ ने पहले परिवार के सदस्यों को घर से बाहर निकाला, बेरहमी से पीटा और फिर घर में बंद कर आग लगा दी। जलकर 5 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में बाबूलाल उरांव (50), कांतो देवी (70), उनकी पत्नी, और दो अन्य महिलाएं शामिल हैं।


👦 किशोर की सूझबूझ से खुला मामला

इस जघन्य घटना में परिवार का एक 16 वर्षीय किशोर किसी तरह जान बचाकर वहां से भाग निकला और अपने ननिहाल पहुंचा। वहां से उसने अपने रिश्तेदारों को जानकारी दी, जिन्होंने तुरंत प्रशासन को सूचना दी। सोमवार सुबह पुलिस मौके पर पहुंची और झाड़ियों में फेंके गए जले हुए शवों को बरामद किया।


🚨 पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया

घटना की जानकारी मिलते ही एसपी स्वीटी सहरावत, एसडीपीओ पंकज कुमार और थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने एफएसएल (फॉरेंसिक) टीम और डॉग स्क्वाड की मदद से घटनास्थल की गहन जांच की।

अब तक 4 नामजद अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है और FIR में 23 नामजद व 150 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। गांव में पुलिस तैनात है और छापेमारी जारी है।


🧙‍♀️ क्या है घटना के पीछे की वजह?

स्थानीय लोगों के अनुसार, गांव के ही रामदेव उरांव के बेटे की मौत झाड़फूंक के दौरान हो गई थी। इसके बाद उनका दूसरा बेटा भी बीमार हो गया। ग्रामीणों ने इसका दोष बाबूलाल उरांव के परिवार पर डाल दिया। अंधविश्वास और भीड़ की मानसिकता ने मिलकर इस नरसंहार को अंजाम दे डाला।


🗣️ नेताओं की प्रतिक्रिया और राजनीति गर्म

घटना के बाद बिहार और झारखंड में राजनीति गर्म हो गई है। झारखंड कांग्रेस की टीम ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और सरकार से मुआवजे और न्याय की मांग की। CM हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर घटना की कड़ी निंदा की और बिहार सरकार से कार्रवाई की मांग की।


🏴 गांव में पसरा है सन्नाटा और डर

टेटगामा गांव में घटना के बाद दहशत का माहौल है। लोग डरे हुए हैं और प्रशासन के रवैये पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। यह घटना बिहार में बढ़ते अंधविश्वास और भीड़ तंत्र की क्रूरता का एक और उदाहरण बन गई है।


📌 निष्कर्ष:

पूर्णिया की यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि शिक्षा, जागरूकता और संवेदनशीलता की कितनी आवश्यकता है। समाज में अंधविश्वास और भीड़तंत्र की मानसिकता को रोकने के लिए केवल कानून नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की भी जरूरत है।


📍 रिपोर्ट: Seemanchal Live
📅 प्रकाशन तिथि: 10 जुलाई 2025
📧 info@seemanchallive.com
🌐 www.seemanchallive.com

Load More Related Articles
Load More By Seemanchal Live
Load More In पूर्णिया
Comments are closed.

Check Also

मैं अलग पहचान बनाना चाहता था, खुद को नए सिरे से गढ़ना चाहता था: विशाल भारद्वाज

‘ओ’ रोमियो’ को बताया दिल छू लेने वाली अनोखी प्रेम कहानी, एक्शन और इमोशन का नया मिश्रण नई द…