2025: भारत की विदेश नीति के लिए चुनौतीपूर्ण वर्ष
भारत की कूटनीति की 2025 में हुई कठिन परीक्षा—यह वाक्य इस वर्ष की वैश्विक और क्षेत्रीय परिस्थितियों को सटीक रूप से परिभाषित करता है। वर्ष 2025 भारत की विदेश नीति के लिए असाधारण रूप से चुनौतीपूर्ण रहा, जब उसे एक साथ कई मोर्चों पर कूटनीतिक संतुलन साधना पड़ा।
पाकिस्तान के साथ दशकों के सबसे गंभीर सैन्य तनाव, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापारिक शुल्क और पड़ोसी देश बांग्लादेश के साथ लगातार बिगड़ते संबंध—इन सभी ने भारत की कूटनीतिक क्षमता की कड़ी परीक्षा ली।
पाकिस्तान के साथ सैन्य टकराव और उसके भू-राजनीतिक असर
2025 में पाकिस्तान के साथ भारत का सैन्य टकराव पिछले कई दशकों में सबसे गंभीर माना गया। सीमा पर बढ़े तनाव और सैन्य गतिविधियों ने दक्षिण एशिया की स्थिरता को प्रभावित किया।
भारत को एक ओर अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करनी थी, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह स्पष्ट करना था कि वह किसी भी प्रकार की आक्रामक नीति नहीं, बल्कि आत्मरक्षा के सिद्धांत पर काम कर रहा है।
संयुक्त राष्ट्र, जी-20 और अन्य वैश्विक मंचों पर भारत ने कूटनीतिक तरीके से अपनी स्थिति स्पष्ट की।
अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति
भारत की कूटनीति की 2025 में हुई कठिन परीक्षा का दूसरा बड़ा कारण रहा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए शुल्क (टैरिफ)।
ट्रंप प्रशासन ने भारत से आयात होने वाले कई उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगा दिया, जिससे भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में तनाव बढ़ा।
भारत के लिए यह चुनौती इसलिए भी कठिन थी क्योंकि अमेरिका उसके सबसे बड़े व्यापारिक और रणनीतिक साझेदारों में से एक है।
नई दिल्ली ने इस मुद्दे पर संयम बरतते हुए संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान निकालने का प्रयास किया।
बांग्लादेश के साथ बिगड़ते रिश्ते
2025 में भारत-बांग्लादेश संबंधों में भी खटास देखने को मिली। सीमा प्रबंधन, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और राजनीतिक अस्थिरता जैसे मुद्दों ने दोनों देशों के रिश्तों को प्रभावित किया।
भारत के लिए बांग्लादेश सिर्फ एक पड़ोसी देश नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर भारत की स्थिरता से जुड़ा अहम साझेदार है। ऐसे में संबंधों में आई गिरावट ने भारत की कूटनीति को और जटिल बना दिया।
बहुपक्षीय मंचों पर भारत की सक्रियता
इन तमाम चुनौतियों के बीच भारत ने बहुपक्षीय मंचों पर अपनी भूमिका को और मजबूत किया।
जी-20, ब्रिक्स, क्वाड और संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर भारत ने:
-
वैश्विक शांति
-
आर्थिक स्थिरता
-
विकासशील देशों की आवाज
को मजबूती से उठाया।
इससे भारत की छवि एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में और मजबूत हुई।
रणनीतिक संतुलन और ‘सॉफ्ट पावर’ का इस्तेमाल
भारत ने 2025 में केवल सैन्य या आर्थिक ताकत पर निर्भर रहने के बजाय सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक कूटनीति का भी भरपूर उपयोग किया।
योग, आयुर्वेद, शिक्षा और तकनीक के माध्यम से भारत ने दुनिया के कई देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत बनाए रखा।
क्या भारत इस परीक्षा में सफल रहा?
विशेषज्ञों की राय में, भारत ने 2025 में आई इन कठिन परिस्थितियों का सामना परिपक्वता और संतुलन के साथ किया।
हालांकि चुनौतियां अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं, लेकिन भारत ने यह दिखा दिया कि वह:
-
दबाव में भी संयम बनाए रख सकता है
-
संवाद के रास्ते खुले रखता है
-
राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करता
आगे की राह
2025 की कूटनीतिक चुनौतियों ने भारत को भविष्य के लिए और अधिक सतर्क तथा रणनीतिक बनने का सबक दिया है।
आने वाले वर्षों में भारत को अपने पड़ोसियों, वैश्विक शक्तियों और उभरते आर्थिक परिवेश के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने होंगे।
❓ 2025 में भारत की कूटनीति की सबसे बड़ी चुनौती क्या रही?
पाकिस्तान के साथ सैन्य तनाव, अमेरिका के टैरिफ और बांग्लादेश से बिगड़ते रिश्ते।
❓ भारत ने इन चुनौतियों का सामना कैसे किया?
संयम, संवाद और बहुपक्षीय कूटनीति के माध्यम से।
❓ क्या भारत की वैश्विक छवि प्रभावित हुई?
नहीं, बल्कि भारत की छवि एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में और मजबूत हुई।



