बिहार पुलिस के खिलाफ बीजेपी मंत्री ने खोला मोर्चा, जब बेतिया में मंत्री नारायण प्रसाद ने पुलिस पर भू माफियाओं से मिलीभगत और लापरवाही का आरोप लगाया।
बिहार में सत्तारूढ़ एनडीए सरकार के भीतर से ही अब पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। पश्चिम चंपारण के बेतिया से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां बिहार सरकार के मंत्री और नौतन विधानसभा क्षेत्र के विधायक नारायण प्रसाद ने खुले तौर पर पुलिस पर लापरवाही और भू माफियाओं से मिलीभगत का आरोप लगाया है। मंत्री का कहना है कि वे बार बार पुलिस अधिकारियों को फोन कर रहे हैं, लेकिन थानाध्यक्ष उनकी बात तक सुनने को तैयार नहीं हैं।
मंत्री नारायण प्रसाद ने बेतिया पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि मुफस्सिल थाना क्षेत्र के हरदिया गांव में एक भू माफिया द्वारा सरकारी रास्ते और निजी जमीन पर अवैध कब्जा किया गया है। इस अतिक्रमण से करीब सौ किसानों का रास्ता बंद होने की स्थिति बन गई है, लेकिन पुलिस शिकायत के बावजूद समय पर मौके पर नहीं पहुंची।
मंत्री ने बताया कि उन्होंने खुद इस मामले की जानकारी मुफस्सिल थानाध्यक्ष को दी थी, लेकिन घंटों तक कोई पुलिसकर्मी घटनास्थल पर नहीं पहुंचा। इसके बाद उन्होंने डीएसपी और एसपी को फोन कर स्थिति से अवगत कराया। मंत्री ने यहां तक कह दिया कि उन्होंने एसपी से सीधे सवाल किया कि क्या बिहार में लॉ एंड ऑर्डर नाम की कोई व्यवस्था बची है या नहीं।
नारायण प्रसाद का आरोप है कि 28 दिसंबर 2025 को भू माफिया ने प्रह्लाद मुखिया की जमीन पर कब्जा कर लिया और सरकारी रास्ते को अतिक्रमित कर बाउंड्री कर दी। पुलिस चार घंटे बाद मौके पर पहुंची, तब तक माफिया अपना काम पूरा कर चुका था। मंत्री का कहना है कि अगर पुलिस समय पर पहुंच जाती, तो अतिक्रमण रोका जा सकता था।
मामला यहीं नहीं रुका। दो जनवरी 2026 को जब भू माफिया फिर से जमीन पर काम कर रहा था, तब मंत्री के चालक आशीष कुमार वहां पहुंचे। आरोप है कि माफियाओं ने उनके साथ मारपीट की और उन्हें घायल कर दिया। इस घटना के बाद भी मंत्री ने एसपी और डीएसपी को सूचना दी, लेकिन पुलिस की कार्रवाई को लेकर वह संतुष्ट नजर नहीं आए।
मंत्री नारायण प्रसाद ने कहा कि एक मंत्री होने के बावजूद उन्हें पुलिस से सहयोग नहीं मिल रहा है, तो आम आदमी की स्थिति क्या होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने साफ कहा कि भू माफियाओं का मनोबल इतना बढ़ गया है कि वे पुलिस और प्रशासन से बेखौफ होकर काम कर रहे हैं। मंत्री ने ऐलान किया कि वे इस पूरे मामले को लेकर उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा और बिहार के डीजीपी को पत्र लिखेंगे।
मंत्री का यह भी आरोप है कि मुफस्सिल थाना पुलिस भूमाफियाओं के प्रभाव में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जब वे सीधे एसपी को फोन करते हैं, तभी थानाध्यक्ष हरकत में आते हैं। उनका कहना है कि जब तक ऐसे थानाध्यक्षों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक भू माफियाओं के हौसले बुलंद रहेंगे।
पीड़ित प्रह्लाद मुखिया ने भी पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनकी जमीन पर जबरन जेसीबी चलाकर कब्जा किया गया और उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा रही है। उन्होंने थाने में आवेदन दिया है, लेकिन अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। पीड़ित का आरोप है कि पुलिस मौके पर मौजूद रहकर भी माफियाओं के पक्ष में खड़ी रही।
इस पूरे मामले ने राज्य की कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। एक ओर सरकार भूमाफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई और बुलडोजर चलाने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर उसी सरकार के मंत्री पुलिस पर माफियाओं से मिलीभगत का आरोप लगा रहे हैं।
अब देखना यह होगा कि मंत्री नारायण प्रसाद की शिकायत पर बेतिया पुलिस प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और क्या मुफस्सिल थाना के जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कदम उठाया जाता है या नहीं। फिलहाल पुलिस का कहना है कि मामला जमीनी विवाद से जुड़ा हुआ है और इसकी जांच की जा रही है।



