Home खास खबर PM मोदी की बिहार रैली: खुली जीप से मंच तक पहुंचे, 5 लाख लोगों की भीड़ | डालमियानगर कारखाने को फिर से शुरू करने की मांग तेज

PM मोदी की बिहार रैली: खुली जीप से मंच तक पहुंचे, 5 लाख लोगों की भीड़ | डालमियानगर कारखाने को फिर से शुरू करने की मांग तेज

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बिक्रमगंज (रोहतास), बिहार:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को रोहतास जिले के बिक्रमगंज में एक ऐतिहासिक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने 48500 करोड़ रुपए की विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। पहली बार पीएम मोदी खुली जीप में लोगों के बीच से होते हुए मंच तक पहुंचे, जिससे लाखों की भीड़ में मौजूद लोगों को उन्हें करीब से देखने का अवसर मिला।

PM ने किया रेकॉर्डतोड़ जनसभा को संबोधित

इस विशाल रैली में करीब 5 लाख लोगों के जुटने का दावा किया गया है। आयोजन स्थल पर 5 लाख कुर्सियां लगाई गईं, और सुबह 8 बजे से ही लोगों की भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी।

विकास परियोजनाएं जिनका हुआ लोकार्पण-शिलान्यास:

  • पटना-गया-डोभी फोरलेन

  • गोपालगंज टाउन फोरलेन

  • सासाराम और अनुग्रह नारायण रेलवे स्टेशन पर स्वचालित सीढ़ियां

  • सोन नगर-मुहम्मदगंज तीसरी रेलवे लाइन

  • जहानाबाद नवोदय विद्यालय के डोरमेट्री व स्टाफ क्वार्टर

  • नबीनगर (औरंगाबाद) में 2400 MW बिजली संयंत्र

  • बक्सर-भरौली गंगा पुल

  • रामनगर-कच्ची दरगाह सिक्स लेन सड़क

सांसद संजय जायसवाल बोले – “इतिहास रचा गया”

“बिक्रमगंज में यह कार्यक्रम बिहार के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। पीएम मोदी ने 41 हजार करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास और 7 हजार करोड़ की योजनाओं का उद्घाटन किया।”
संजय जायसवाल, सांसद (भाजपा)

डालमियानगर रेल कारखाना चालू करने की उठी मांग

पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. कांति सिंह (राजद) ने पीएम मोदी से डालमियानगर रेल कारखाना फिर से शुरू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि

“लालू यादव के रेल मंत्री रहते जमीन अधिग्रहण हुआ, पर फैक्ट्री खंडहर बन चुकी है। रोजगार के लिए इसे पुनर्जीवित किया जाए।”

उन्होंने याद दिलाया कि लोकसभा चुनाव में पीएम ने खुद डालमियानगर को पुनर्जीवित करने का वादा किया था। अब वह वादा सिर्फ एक चुनावी भाषण बनकर रह गया है।

डालमियानगर: बिहार का औद्योगिक गौरव

  • स्थापना: 1933

  • स्वर्णकाल: 60-70 हजार लोगों को मिला था रोजगार

  • 1984 में बंद

  • रेलवे की योजना: वैगन रिपेयर फैक्ट्री, फ्रेट कैरिडोर आदि

  • वर्तमान स्थिति: ज़मीन बिकी, मशीनें कबाड़ में, कैंपस खंडहर

निष्कर्ष:

बिक्रमगंज की यह रैली केवल एक चुनावी शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि विकास बनाम वादाखिलाफी के बीच जमीनी सियासत की झलक भी थी। अब सबकी नजरें इस बात पर होंगी कि क्या डालमियानगर जैसा मुद्दा केवल माइक तक ही सीमित रहेगा या धरातल पर भी कुछ बदलेगा।

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