Home खास खबर स्कूल में बेटे की मौत, महीनों तक न्याय की गुहार, फिर मां ने सल्फास खाकर दी जान

स्कूल में बेटे की मौत, महीनों तक न्याय की गुहार, फिर मां ने सल्फास खाकर दी जान

0 second read
Comments Off on स्कूल में बेटे की मौत, महीनों तक न्याय की गुहार, फिर मां ने सल्फास खाकर दी जान
0
18
Police crime scene tape at night in border area, emergency response, safety alert.

स्कूल में बेटे की मौत महीनों तक न्याय की गुहार फिर मां ने सल्फास खाकर दी जान, यह दर्दनाक मामला दरभंगा जिले से सामने आया है जहां बेटे की स्कूल में संदिग्ध मौत के बाद न्याय न मिलने से एक मां टूट गई और उसने आत्महत्या कर ली।

अपने इकलौते बेटे की स्कूल में संदिग्ध मौत के बाद महीनों तक न्याय की गुहार लगाती रही एक मां आखिरकार टूट गई और सल्फास खाकर आत्महत्या कर ली। यह घटना न सिर्फ एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि यह भी दिखाती है कि जब न्याय में देरी होती है, तो उसका असर कितना भयावह हो सकता है।

यह हृदय विदारक घटना दरभंगा के लहेरियासराय थाना क्षेत्र की है। मृतका की पहचान मनीष देवी के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार मनीषा देवी ने लगभग तीन महीने पहले अपने नौ वर्षीय बेटे कश्यप का नामांकन लहेरियासराय के एक निजी स्कूल में दूसरी कक्षा में कराया था। कश्यप स्कूल के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहा था और पढ़ाई को लेकर परिवार को उससे काफी उम्मीदें थीं।

लेकिन स्कूल ज्वाइन करने के महज उन्नीस दिन बाद ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। एक दिन स्कूल के बाथरूम में कश्यप का शव खिड़की में लगे फंदे से लटका हुआ मिला। स्कूल प्रशासन ने इसे आत्महत्या बताया, लेकिन परिजनों ने शुरू से ही इस पर सवाल उठाए। परिवार का आरोप था कि बच्चे की हत्या की गई है और मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।

बेटे की मौत के बाद मनीषा देवी पूरी तरह टूट गई थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। वह लगातार पुलिस थाना, डीएसपी कार्यालय, एसपी कार्यालय और अन्य अधिकारियों के पास जाकर न्याय की गुहार लगाती रहीं। पुलिस ने एफआईआर तो दर्ज की, लेकिन परिजनों का आरोप है कि इसके बाद जांच में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। महीनों बीत गए, लेकिन न तो किसी की गिरफ्तारी हुई और न ही स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कोई सख्त कदम उठाया गया।

मृतका के भाई शिवशंकर कुमार ने बताया कि उनकी बहन को बार बार थाने बुलाया जाता था, लेकिन कार्रवाई के बजाय उसे डांट सुननी पड़ती थी। इकलौते बेटे की मौत का गहरा सदमा और ऊपर से पुलिस का असंवेदनशील रवैया मनीषा देवी के लिए असहनीय हो गया। वह मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुकी थीं।

मंगलवार की सुबह अचानक मनीषा देवी की तबीयत बिगड़ गई। परिजनों को पहले लगा कि यह बेटे के गम की वजह से हुआ है, लेकिन जब हालत ज्यादा खराब हुई तो उन्हें अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने बताया कि उन्होंने सल्फास खा लिया है। हालत गंभीर होने पर उन्हें डीएमसीएच रेफर किया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

शिवशंकर कुमार का कहना है कि उनकी बहन ने हर स्तर पर न्याय की गुहार लगाई, लेकिन कहीं से कोई सुनवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि स्कूल संचालक ने प्रभाव और पैसे के दम पर सबको मैनेज कर रखा है। न्याय न मिलने की पीड़ा ने आखिरकार उनकी बहन की जान ले ली।

महिला की आत्महत्या के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। अब प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है, एक बच्चे की मौत और दूसरी मां की आत्महत्या, दोनों की सच्चाई सामने लाना।

परिजनों का कहना है कि स्कूल में बेटे की मौत महीनों तक न्याय की गुहार फिर मां ने सल्फास खाकर दी जान जैसी स्थिति प्रशासनिक लापरवाही और जांच में देरी के कारण बनी।

इस घटना के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। वीआईपी पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उमेश साहनी परिजनों से मिलने पहुंचे और सरकार तथा प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते स्कूल प्रशासन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई होती, तो आज मनीषा देवी जिंदा होती। उन्होंने इस मामले को न्याय व्यवस्था की विफलता बताया।

यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या आम लोगों को समय पर न्याय मिल पा रहा है। एक मां ने अपने बेटे को खोया, फिर महीनों तक दर दर भटकती रही और आखिरकार उसने अपनी जान दे दी। यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि सिस्टम के लिए एक चेतावनी है कि न्याय में देरी, कभी कभी मौत से भी ज्यादा खतरनाक साबित होती है।

Load More Related Articles
Load More By Seemanchal Live
Load More In खास खबर
Comments are closed.

Check Also

एक ही ट्रेन में असली और नकली TTE बागमती एक्सप्रेस में यात्रियों से अवैध वसूली करता शिक्षक रंगे हाथों पकड़ा गया

बिहार फर्जी TTE मामला एक बार फिर रेल यात्रियों की सुरक्षा और सतर्कता का उदाहरण बन गया है। …