विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी नए नियमों को लेकर देशभर में विरोध तेज होता जा रहा है। खासतौर पर सामान्य वर्ग (सवर्ण समाज) के छात्र और शिक्षक इन नियमों को लेकर नाराज हैं। बिहार के नवादा जिले के हिसुआ विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी विधायक अनिल सिंह ने भी इन नियमों के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। खास बात यह है कि विधायक अनिल सिंह ने सत्ता में रहते हुए अपनी ही पार्टी और केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय के फैसले पर सवाल खड़े किए हैं।
अनिल सिंह ने कहा कि UGC का यह नया मसौदा सामान्य वर्ग के छात्रों और शिक्षकों के साथ भेदभाव करता है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह इस मुद्दे पर किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेंगे और जरूरत पड़ी तो सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
क्या है UGC का नया नियम?
15 जनवरी 2026 को UGC ने उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए कुछ नए नियमों की अधिसूचना जारी की थी। इसमें अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों और कर्मचारियों के लिए अलग से शिकायत निवारण समिति बनाने का प्रावधान किया गया है। लेकिन सामान्य वर्ग के छात्रों और शिक्षकों के लिए किसी विशेष सुरक्षा तंत्र का उल्लेख नहीं किया गया है।
इसी बात को लेकर विरोध हो रहा है कि अगर सामान्य वर्ग के किसी छात्र या शिक्षक के खिलाफ फर्जी शिकायत की जाती है, तो उसके बचाव के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं रखा गया है।
विधायक अनिल सिंह का आरोप
बीजेपी विधायक अनिल सिंह ने कहा कि नए नियमों में फर्जी शिकायतों पर कार्रवाई का पुराना प्रावधान हटा दिया गया है, जो बेहद चिंताजनक है। इससे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में ब्लैकमेलिंग और उत्पीड़न का खतरा बढ़ सकता है।
उन्होंने सवाल उठाया,
“यह कैसा न्याय है कि एक वर्ग को विशेष सुरक्षा दी जाए और दूसरे वर्ग को पूरी तरह असहाय छोड़ दिया जाए?”
अनिल सिंह ने इसे एकतरफा नियम बताते हुए कहा कि यह सामाजिक संतुलन को बिगाड़ने वाला कदम है।
प्रधानमंत्री मोदी से उम्मीद
विधायक अनिल सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नारे ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ का हवाला देते हुए कहा कि इस भावना के अनुरूप ही नीतियां बननी चाहिए।
उन्होंने कहा,
“मुझे पूरा विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मुद्दे को गंभीरता से लेंगे और इसमें संशोधन कराएंगे, ताकि किसी भी वर्ग के साथ अन्याय न हो।”
नवादा में तेज हुआ आंदोलन
अनिल सिंह के अनुसार नवादा जिले में सामान्य वर्ग के युवा बड़ी संख्या में प्रदर्शन कर रहे हैं। कई जगहों पर भाजपा कार्यालय का घेराव किया गया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पुतले भी जलाए गए हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समय रहते सरकार ने इस पर निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन और तेज होगा।
पार्टी के भीतर असंतोष के संकेत
बीजेपी विधायक का यह बयान पार्टी के भीतर उभर रहे असंतोष की ओर भी इशारा करता है। सामान्य वर्ग लंबे समय से बीजेपी का मजबूत वोट बैंक माना जाता है। ऐसे में इस वर्ग में नाराजगी पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।
अनिल सिंह ने कहा,
“अपने समाज के बच्चों को न्याय दिलाने के लिए जो भी करना होगा, करेंगे। चाहे सड़क पर उतरना पड़े या दिल्ली तक आवाज पहुंचानी पड़े।”
सुप्रीम कोर्ट की रोक
UGC के नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों के क्रियान्वयन पर फिलहाल रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि नियम अस्पष्ट हैं और केंद्र सरकार से इस पर जवाब मांगा गया है। अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।
आगे क्या?
अब सबकी नजर केंद्र सरकार के अगले कदम पर है। क्या UGC के नियमों में संशोधन होगा या सरकार कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखेगी—यह आने वाले दिनों में साफ होगा। लेकिन इतना तय है कि UGC के नए नियमों को लेकर विवाद अभी थमने वाला नहीं है।



