नई दिल्ली: देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया। यह बजट सरकार के “विकसित भारत 2047” विज़न को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, जिसमें आर्थिक विकास, रोजगार सृजन, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और आत्मनिर्भर भारत को मजबूती देने पर विशेष जोर दिया गया है। बजट में जहां आम जनता को टैक्स स्लैब में किसी बड़ी राहत की उम्मीद थी, वहीं सरकार ने मौजूदा स्लैब को यथावत रखा है। हालांकि, अन्य क्षेत्रों में किए गए बड़े निवेश से अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की संभावना जताई जा रही है।
टैक्स और आम करदाता
सरकार ने स्पष्ट किया कि इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसका मतलब यह है कि वेतनभोगी और मध्यम वर्ग को सीधे तौर पर राहत नहीं मिलेगी। हालांकि, टैक्स सिस्टम को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल प्रोसेस को और मजबूत किया जाएगा। छोटे करदाताओं के लिए ऑटोमेटेड टैक्स प्रोसेसिंग, तेज़ रिफंड और फेसलेस सिस्टम को और बेहतर किया जाएगा। शेयर बाजार में ट्रेड करने वालों के लिए फ्यूचर्स और ऑप्शन्स पर सेक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग पर असर पड़ सकता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड निवेश
इस बजट की सबसे बड़ी खासियत है 12.2 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय (कैपेक्स)। सरकार का मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से न केवल विकास को गति मिलेगी बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार भी पैदा होंगे। सड़क, राजमार्ग, रेलवे, शहरी परिवहन और बंदरगाह परियोजनाओं के लिए भारी राशि आवंटित की गई है। कई नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और रेलवे आधुनिकीकरण योजनाओं की घोषणा की गई है, जिससे यात्रियों को तेज़ और सुरक्षित यात्रा की सुविधा मिलेगी।
कृषि और ग्रामीण भारत को संबल
कृषि क्षेत्र के लिए 1.63 लाख करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाना और खेती को आधुनिक बनाना है। इसके तहत कृषि में AI आधारित मल्टी-लैंग्वेज टूल्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किए जाएंगे, ताकि किसान मौसम, फसल और बाजार से जुड़ी जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकें। ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई, भंडारण, कोल्ड स्टोरेज और सड़क कनेक्टिविटी पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा
भारत को वैश्विक टेक्नोलॉजी हब बनाने के लिए India Semiconductor Mission 2.0 की शुरुआत की गई है। इसके माध्यम से देश में सेमीकंडक्टर निर्माण, डिजाइन और सप्लाई चेन को मजबूत किया जाएगा। इसके अलावा, 40,000 करोड़ रुपये का इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग फंड स्थापित करने का ऐलान किया गया है, जिससे मोबाइल, चिप्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।
MSME और रोजगार सृजन
लघु, मध्यम और सूक्ष्म उद्योगों (MSME) को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। बजट में MSME सेक्टर को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए आसान ऋण, टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन और एक्सपोर्ट सपोर्ट जैसी योजनाओं पर जोर दिया गया है। सरकार का अनुमान है कि इन कदमों से लाखों नए रोजगार पैदा होंगे।
शिक्षा, कौशल और सुरक्षा
शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट के बजट में वृद्धि की गई है, ताकि युवाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षित किया जा सके। डिजिटल लर्निंग, आईटीआई और तकनीकी संस्थानों को मजबूत करने पर फोकस किया गया है। आंतरिक सुरक्षा और सीमा सुरक्षा के लिए गृह मंत्रालय को बड़ा आवंटन दिया गया है। इसके साथ ही आगामी जनगणना के लिए भी विशेष बजट प्रावधान किया गया है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026-27 को एक विकासोन्मुखी और भविष्य-केंद्रित बजट कहा जा सकता है। टैक्स स्लैब में राहत भले न मिली हो, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर, कृषि, टेक्नोलॉजी और रोजगार पर भारी निवेश से अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार मिलने की उम्मीद है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि आने वाले वर्षों में भारत को तेज़ी से विकास की बढ़ाया जाएगा।



