स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन अभियान के दौरान गंभीर कदाचार पर चुनाव आयोग की सख्त कार्रवाई
कोलकाता: Election Commission of India (ECI) ने पश्चिम बंगाल में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान के दौरान गंभीर अनियमितताओं के आरोप में सात अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ “गंभीर कदाचार, ड्यूटी में लापरवाही और कानूनी शक्तियों के दुरुपयोग” के मामले में विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए।
यह कार्रवाई ऐसे समय में की गई है जब राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया चल रही है। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है, और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निलंबित अधिकारियों की सूची
निलंबित किए गए अधिकारियों में विभिन्न विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (AERO) और ब्लॉक स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इनमें कृषि विभाग के सहायक निदेशक डॉ. सेफौर रहमान (56-समसेरगंज), फरक्का के राजस्व अधिकारी नीतीश दास (55-फरक्का), मयनागुड़ी की महिला विकास अधिकारी दलिया रे चौधरी (16-मयनागुड़ी), सुती ब्लॉक के एसके मुर्शिद आलम (57-सुती), जॉइंट बीडीओ सत्यजीत दास, जॉयदीप कुंडू (139-कैनिंग पुरबो) और देबाशीष विश्वास (229-डेबरा) शामिल हैं।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि इन अधिकारियों पर SIR प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों की जांच, दावों के निस्तारण और मतदाता सूची संशोधन में गंभीर त्रुटियों के आरोप हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बदली टाइमलाइन
इस बीच, Supreme Court of India के आदेश के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने SIR प्रक्रिया की संशोधित समय-सारणी जारी की है। नए कार्यक्रम के अनुसार:
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नोटिस की सुनवाई 14 फरवरी तक पूरी की जाएगी।
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दस्तावेजों की समीक्षा और दावों का निपटारा 21 फरवरी तक होगा।
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पोलिंग स्टेशनों का रैशनलाइजेशन 25 फरवरी तक पूरा किया जाएगा।
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स्वास्थ्य मापदंडों की जांच 27 फरवरी तक की जाएगी।
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अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को जारी की जाएगी।
पहले अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी को जारी होनी थी, लेकिन कोर्ट के निर्देश के बाद समय-सीमा बढ़ाई गई है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs) और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (AEROs) को दस्तावेजों की गहन जांच और उचित निर्णय के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जिसमें पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान हिंसा और चुनावी रिकॉर्ड जलाने के आरोपों पर जवाब मांगा गया है।
निष्पक्ष चुनाव पर जोर
चुनाव आयोग ने अपने बयान में कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता लोकतंत्र की बुनियाद है। यदि इस प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही या शक्ति का दुरुपयोग पाया जाता है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। आयोग ने राज्य प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिया है कि भविष्य में ऐसी त्रुटियां दोहराई न जाएं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों को देखते हुए मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया अत्यंत संवेदनशील है। ऐसे में आयोग की यह कार्रवाई यह संकेत देती है कि वह निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने को तैयार है।
आगे क्या?
अब नजर इस बात पर रहेगी कि विभागीय जांच में क्या निष्कर्ष निकलता है और क्या अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई होती है। साथ ही, संशोधित कार्यक्रम के अनुसार अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।
पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया को लेकर उठे विवाद और आयोग की सख्त कार्रवाई ने चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया है।



