नई दिल्ली। इंटरनेट सुरक्षा से जुड़ी एक अहम खबर में भारतीय डिजिटल सर्टिफिकेट सेवा प्रदाता eMudhra के कुछ सर्टिफिकेट से संबंधित सुरक्षा चिंताएं सामने आई हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, Google और Mozilla ने प्रभावित सर्टिफिकेट कुंजियों के खिलाफ कार्रवाई की है। Google की ओर से 27 अक्टूबर 2026 से Chrome के ट्रस्ट सिस्टम में संबंधित रूट सर्टिफिकेट को हटाने का कदम उठाया जाना है।
डिजिटल सर्टिफिकेट वेबसाइट की पहचान सत्यापित करने और HTTPS कनेक्शन को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि किसी वेबसाइट का सर्टिफिकेट ब्राउजर के भरोसे की सूची से हट जाता है, तो उपयोगकर्ताओं को सुरक्षा चेतावनी दिखाई दे सकती है या वेबसाइट का कनेक्शन प्रभावित हो सकता है।
वेबसाइट संचालकों को क्या करना चाहिए?
वेबसाइट चलाने वाली कंपनियों और संस्थानों को अपने SSL/TLS सर्टिफिकेट की स्थिति जांचनी चाहिए। यदि उनकी वेबसाइट प्रभावित सर्टिफिकेट पर निर्भर है, तो उन्हें प्रमाणपत्र जारी करने वाली संस्था के आधिकारिक निर्देशों के अनुसार जरूरी बदलाव करने चाहिए।
वेबसाइट संचालकों को ब्राउजर में दिखाई देने वाली चेतावनी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सर्टिफिकेट की वैधता, प्रमाणपत्र श्रृंखला और सर्वर कॉन्फिगरेशन की जांच करना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर योग्य तकनीकी विशेषज्ञ की मदद ली जा सकती है।
आम इंटरनेट यूजर्स के लिए जरूरी सलाह
यदि किसी वेबसाइट पर अचानक सुरक्षा चेतावनी दिखाई देती है, तो उसे नजरअंदाज करके आगे बढ़ने से बचें। खासकर बैंकिंग, भुगतान और निजी जानकारी मांगने वाली वेबसाइटों पर अतिरिक्त सावधानी बरतें। वेबसाइट संचालकों को भी उपयोगकर्ताओं को होने वाली संभावित परेशानी के बारे में जानकारी देनी चाहिए।
रिपोर्ट के अनुसार, eMudhra ने कहा है कि प्रभावित सर्टिफिकेट कुंजियों का इस्तेमाल अंतिम उपयोगकर्ताओं के सर्टिफिकेट जारी करने में नहीं हुआ था। इसलिए हर eMudhra सर्टिफिकेट वाली वेबसाइट के प्रभावित होने का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। वास्तविक असर वेबसाइट के इस्तेमाल किए गए सर्टिफिकेट और ब्राउजर की ट्रस्ट व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
आपकी राय: क्या वेबसाइट संचालकों को SSL सर्टिफिकेट में बदलाव के लिए पहले से अनिवार्य सुरक्षा जांच करनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में बताएं।












