पूर्णिया। सीमांचल के किसानों के लिए मखाना अब स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं रह गया है। पूर्णिया से मखाने की एक टन खेप यूरोपीय देश ग्रीस भेजी गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 अक्टूबर 2026 को प्रसारित अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में पूर्णिया के मखाने के विदेश निर्यात का उल्लेख किया। इसके बाद बिहार के इस पारंपरिक कृषि उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान मिलने की चर्चा तेज हो गई है।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) की 2 अक्टूबर की विज्ञप्ति के अनुसार, पूर्णिया के बेलौरी स्थित इंडो ग्लोबल एक्सपोर्ट से मखाने की एक मीट्रिक टन खेप ग्रीस भेजने की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाया गया। यह खेप गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह से ग्रीस के पिरियस बंदरगाह तक भेजी गई। निर्यात में नई दिल्ली की एसएस फूड्स एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड भी शामिल रही।
किसानों और कारोबारियों के लिए नए अवसर
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने और स्वदेशी वस्तुओं को प्रोत्साहित करने की बात कही। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी पूर्णिया के मखाने का उल्लेख किए जाने पर आभार जताया। राज्य सरकार के अनुसार, इससे सीमांचल के मखाना उत्पादकों, प्रसंस्करणकर्ताओं और ग्रामीण उद्यमियों को प्रोत्साहन मिल सकता है।
हालांकि, निर्यात बढ़ने का लाभ किसानों तक पहुंचाने के लिए बेहतर भंडारण, गुणवत्ता की जांच, पैकेजिंग और बाजार तक सीधी पहुंच महत्वपूर्ण होगी। यदि उत्पादकों को उचित मूल्य और नियमित खरीदार मिलते हैं, तो इससे स्थानीय रोजगार और कृषि आधारित कारोबार को भी मदद मिल सकती है।
सीमांचल के मखाने के लिए आगे क्या?
पूर्णिया और आसपास के जिलों में मखाना उत्पादन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विदेशों में मांग बढ़ने से स्थानीय उत्पादकों के लिए नए अवसर बन सकते हैं, लेकिन इसका वास्तविक लाभ निर्यात की निरंतरता और किसानों को मिलने वाले दाम पर निर्भर करेगा।
आपकी राय: क्या सीमांचल के मखाने को बढ़ावा देने के लिए सरकार को किसानों के लिए विशेष निर्यात योजना और बेहतर खरीद व्यवस्था शुरू करनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में बताएं।












