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AI अब खुद खोजेगा साइबर खतरे, कंपनियों की सुरक्षा में शुरू हुआ बड़ा बदलाव

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल अब सिर्फ सवालों के जवाब देने, तस्वीरें बनाने या कंटेंट तैयार करने तक सीमित नहीं रह गया है। साइबर…

AI अब खुद खोजेगा साइबर खतरे, कंपनियों की सुरक्षा में शुरू हुआ बड़ा बदलाव

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नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल अब सिर्फ सवालों के जवाब देने, तस्वीरें बनाने या कंटेंट तैयार करने तक सीमित नहीं रह गया है। साइबर सिक्योरिटी की दुनिया में AI का इस्तेमाल एक नए स्तर पर पहुंच रहा है। अब AI आधारित सिस्टम कंपनियों के डिजिटल सिस्टम में मौजूद कमजोरियों को लगातार खोजने, उनकी जांच करने और उन्हें ठीक करने में मदद करेंगे।

अमेरिकी साइबर सुरक्षा कंपनी Palo Alto Networks ने 22 सितंबर 2026 को Unit 42 Continuous Frontier AI Defense नाम की नई सेवा शुरू करने की घोषणा की है। कंपनी के मुताबिक यह सेवा AI मॉडल की मदद से कंपनियों के वेब एप्लिकेशन, API, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और दूसरे डिजिटल सिस्टम में मौजूद सुरक्षा कमजोरियों की लगातार जांच कर सकेगी।

AI के सामने AI की चुनौती

साइबर सुरक्षा का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब हमलावर भी AI का इस्तेमाल कर रहे हैं। AI की मदद से कमजोरियों को खोजने और उनका फायदा उठाने की प्रक्रिया पहले की तुलना में काफी तेज हो सकती है। इसी वजह से सुरक्षा कंपनियां भी ऐसे सिस्टम तैयार कर रही हैं जो इंसानों की गति के बजाय मशीन की गति से संभावित खतरों की पहचान कर सकें।

Palo Alto Networks का कहना है कि नई सेवा लगातार डिजिटल वातावरण को टेस्ट करेगी। इसका मतलब यह है कि कंपनी के सिस्टम में कोई नया एप्लिकेशन, API या इंफ्रास्ट्रक्चर बदलाव आने पर सुरक्षा जांच को दोबारा किया जा सकता है।

Claude और GPT जैसे AI मॉडल का इस्तेमाल

इस नई साइबर सुरक्षा सेवा में Anthropic के Claude Mythos 5 और OpenAI के GPT-5.6-Cyber जैसे साइबर-केंद्रित AI मॉडल के साथ ओपन-वेट मॉडल का भी इस्तेमाल किया जाएगा। सिस्टम अलग-अलग काम के लिए अलग AI मॉडल का उपयोग कर सकता है।

कंपनी के अनुसार इसका उद्देश्य सिर्फ यह बताना नहीं है कि सिस्टम में कोई कमजोरी मौजूद है। यह यह भी जांचने की कोशिश करेगा कि उस कमजोरी का वास्तविक दुनिया में किस तरह फायदा उठाया जा सकता है और उससे कौन-कौन से दूसरे सिस्टम प्रभावित हो सकते हैं।

एक AI मॉडल सब कुछ नहीं खोज सकता

इस खबर का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि साइबर सुरक्षा में केवल एक AI मॉडल पर निर्भर रहने को पर्याप्त नहीं माना जा रहा है।

Palo Alto Networks के अपने परीक्षण के अनुसार जटिल वातावरण में किसी एक AI मॉडल ने 40 प्रतिशत से ज्यादा कमजोरियों की पहचान नहीं की। कंपनी ने इसी कारण कई AI मॉडलों को एक साथ इस्तेमाल करने वाला multi-model approach तैयार किया है।

यानी आने वाले समय में साइबर सिक्योरिटी का मॉडल सिर्फ एक AI चैटबॉट पर आधारित नहीं होगा। अलग-अलग AI मॉडल अलग-अलग प्रकार की कमजोरियों को खोज सकते हैं और इनके परिणामों को सुरक्षा विशेषज्ञों के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है।

सिर्फ खतरा ढूंढना नहीं, समाधान भी सुझाएगा

नई सेवा की खासियत यह बताई गई है कि सिस्टम सुरक्षा कमजोरियों की पहचान करने के बाद उनके समाधान के लिए actionable guidance भी देगा। इसमें code-level fixes और virtual patching जैसे विकल्प शामिल हैं।

इसका फायदा उन कंपनियों को हो सकता है जिनके पास बड़े क्लाउड सिस्टम, कई वेब एप्लिकेशन और लगातार बदलता हुआ डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर है। ऐसे वातावरण में हर बदलाव के बाद मैन्युअल सुरक्षा जांच करना मुश्किल और समय लेने वाला हो सकता है।

कंपनियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव

आज बैंकिंग, ई-कॉमर्स, सरकारी सेवाओं, हेल्थकेयर और मीडिया सहित लगभग हर क्षेत्र डिजिटल सिस्टम पर निर्भर है। किसी वेबसाइट, API या क्लाउड सर्वर में मौजूद छोटी कमजोरी भी बड़े साइबर हमले का रास्ता बन सकती है।

AI आधारित लगातार सुरक्षा जांच का मॉडल इस प्रक्रिया को बदल सकता है। सिस्टम संभावित कमजोरियों को उस समय पहचानने की कोशिश कर सकता है जब वे किसी हमलावर के लिए इस्तेमाल होने लायक बन रही हों।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि इंसानी साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की जरूरत खत्म हो जाएगी। बल्कि AI द्वारा खोजी गई कमजोरियों की वास्तविकता, प्राथमिकता और संभावित प्रभाव को समझने के लिए मानव विशेषज्ञों की भूमिका अभी भी महत्वपूर्ण रहेगी।

आने वाले समय में क्या बदलेगा

AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर सुरक्षा की पूरी रणनीति बदल रही है। पहले कंपनियां सुरक्षा जांच के लिए समय-समय पर penetration testing और vulnerability scanning करती थीं। अब लगातार और स्वचालित सुरक्षा परीक्षण की दिशा में बदलाव दिखाई दे रहा है।

Palo Alto Networks ने बताया है कि उसकी नई सेवा दुनिया भर में annual subscription मॉडल के तहत उपलब्ध होगी और इस्तेमाल किए जाने वाले AI मॉडलों के आधार पर इसकी कीमत अलग हो सकती है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जैसे-जैसे AI हमले करने वालों को तेज बनाएगा, क्या कंपनियों की सुरक्षा व्यवस्था भी उसी गति से मजबूत हो पाएगी?

यही आने वाले वर्षों में साइबर सुरक्षा की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक हो सकती है।

पाठकों के लिए जरूरी बात

AI के इस नए दौर में सिर्फ बड़ी कंपनियां ही नहीं, बल्कि छोटी वेबसाइट, ऑनलाइन बिजनेस और सामान्य इंटरनेट यूजर भी साइबर सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं कर सकते। मजबूत पासवर्ड, multi-factor authentication, समय पर software updates और संदिग्ध लिंक से बचना आज पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है।

आपके अनुसार AI के आने से साइबर सुरक्षा ज्यादा मजबूत होगी या साइबर अपराध और ज्यादा खतरनाक हो जाएंगे? अपनी राय Seemanchal Live के साथ साझा करें।

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