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बिहार के 2 करोड़ प्रवासी वोटर पर BJP की नजर, जानिए अमित शाह का प्लान - AMIT SHAH

बिहार के 2 करोड़ प्रवासी वोटर पर BJP की नजर, जानिए अमित शाह का प्लान - AMIT SHAH बिहार में चुनावी साल पर हर सियासी दल अपने चाल चल रहे हैं. इसी में एक मास्टर प्लान अमित शाह ने भी तैयार किया है. पटना : बिहार दिवस को लेकर राज्यभर में 22 मार्च से 24 मार्च तक कई कार्यक्रम हो रहे हैं. यही नहीं बिहार से बा

बिहार के 2 करोड़ प्रवासी वोटर पर BJP की नजर, जानिए अमित शाह का प्लान - AMIT SHAH

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बिहार के 2 करोड़ प्रवासी वोटर पर BJP की नजर, जानिए अमित शाह का प्लान - AMIT SHAH बिहार में चुनावी साल पर हर सियासी दल अपने चाल चल रहे हैं. इसी में एक मास्टर प्लान अमित शाह ने भी तैयार किया है. पटना : बिहार दिवस को लेकर राज्यभर में 22 मार्च से 24 मार्च तक कई कार्यक्रम हो रहे हैं. यही नहीं बिहार से बाहर भी पूरे देश में चुनावी साल में बीजेपी बिहार दिवस मना रही है. बीजेपी ने 70 स्थान पर बिहार दिवस मनाने का बड़ा अभियान बनाया है. यह 22 मार्च से 30 मार्च तक चलेगा जिसमें पार्टी के कई दिग्गज नेता शामिल होंगे. शाह का मिशन प्रवासी बिहारी..! : चुनावी साल में अमित शाह की बिहार फतह की रणनीति मानी जा रही है. बिहार से बाहर 3 करोड़ के करीब बिहारी प्रवासी रहते हैं और उसमें अधिकांश बिहार के वोटर हैं. छठ के समय इसमें से एक करोड़ के करीब बिहार आते हैं. कई बार चुनाव में अपनी बड़ी भूमिका भी निभाते हैं. इस बार का चुनाव भी दिलचस्प होनेवाला है, ऐसे में प्रवासी बिहारी पर सब की नजर है. बिहार दिवस के माध्यम से बीजेपी प्रवासी के बीच एक मैसेज देने की कोशिश करने वाली है. 3 करोड़ प्रवासी बिहारी को साधने की कोशिश : दरअसल, पिछले छठ पूजा के दौरान रेलवे की ओर से जारी आंकड़े के अनुसार 78 लाख लोग दूसरे राज्यों से बिहार पहुंचे थे. वहीं केंद्र सरकार के एक आंकड़े के अनुसार ढाई करोड़ के करीब बिहार के लोग दूसरे राज्यों में रह रहे हैं. इन्हीं बिहारी प्रवासी पर बिहार के राजनीतिक दलों की नजर है. बिहार का स्थापना दिवस : बिहार अपने स्थापना का 113 वां वर्ष मना रहा है. 22 मार्च, 1912 में बंगाल से बिहार अलग हुआ था. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2010 में बिहार दिवस मनाने का बड़ा फैसला लिया था. तब से लगातार इसका आयोजन हो रहा है. इस बार भी 22 मार्च से 24 मार्च तक पटना के गांधी मैदान में अब तक का सबसे बड़ा कार्यक्रम होने जा रहा है. बिहार सरकार की ओर से यह कार्यक्रम होगा. BJP ने इसे अपना एजेंडा बनाया..! : देश और विदेश में भी बिहार दिवस पर कार्यक्रम होते रहे हैं, इस बार भी होंगे लेकिन इस बार बीजेपी ने पूरे देश में 70 स्थान को चयनित किया है. जहां बिहार दिवस का कार्यक्रम आयोजित होगा. एक भारत श्रेष्ठ भारत स्नेह मिलन कार्यक्रम के माध्यम से प्रवासी बिहारी को साधने की कोशिश होगी. बीजेपी के कई दिग्गज नेता इस कार्यक्रम में शामिल होंगे. बिहार के लोग विशेष कर दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र, यूपी, पश्चिम बंगाल, पंजाब, हरियाणा, असम जैसे राज्यों में बड़ी संख्या में रहते हैं. इस साल अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा का चुनाव होना है तो बीजेपी की नजर विधानसभा चुनाव पर है. बिहार के प्रवासी पर जो चुनाव के समय बिहार लौट सकते हैं. ''बिहार का सम्मान नीतीश कुमार और एनडीए की सरकार ने बढ़ाया है. बिहारी अस्मिता के लिए काम नीतीश कुमार और एनडीए की सरकार ने किया है. प्रधानमंत्री की योजना है समन्वय स्थापित किया जाए क्योंकि प्रवासी बिहारी जिन राज्यों में निवास किया है. वहां के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उन्हें भी लगता है कि बिहार का विकास एनडीए सरकार ही कर सकती है तो 70 स्थान पर पूरे देश में कार्यक्रम तय किया गया है. अलग-अलग तरह के कार्यक्रम होंगे. पार्टी के नेताओं को जिम्मेवारी दी गई है.''- संजीव चौरसिया, वरिष्ठ नेता बीजेपी 'बिहार के बाहर भी बिहारी भावना जागृत है': एएन सिन्हा शोध संस्थान के विशेषज्ञ प्रोफेसर बीएन प्रसाद ने कहा कि मानव जीवन में भावना का बहुत बड़ा स्थान होता है. मैं खुद 33 साल बिहार से बाहर रहा हूं लेकिन मेरे अंदर बिहारी हमेशा जीवित रहा है. केंद्र सरकार के श्रम मंत्रालय की ओर से पिछले साल बिहार के राज्यसभा सांसद संजय यादव की ओर से एक सवाल पूछा गया था और उसमें केंद्रीय श्रम मंत्री की ओर से ढाई करोड़ के करीब बिहार से बाहर जाने वाले लोगों का जिक्र किया गया था. प्रोफेसर बीएन प्रसाद का कहना है कि संख्या 3 करोड़ से भी अधिक हो सकती है और उनके अंदर बिहार अभी भी जागृत है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण छठ महापर्व में आने वाले लोगों की संख्या को देखा जा सकता है. पिछले साल 78 लाख लोग रेलवे से दूसरे प्रदेशों से बिहार आए थे. अगर अन्य माध्यम से आने वाले लोगों की संख्याओं को मिला दें तो एक करोड़ से अधिक होगा. बिहार दिवस के बहाने उनमें बिहारी पन जगाने की कोशिश हो रही है. मजबूरी बस ही दूसरे राज्यों में काम कर रहे हैं क्योंकि उन्हें यहां अवसर नहीं मिला. छठ के समय जब आते हैं और लौटते हैं तो उनका दर्द भी दिखता है. अब राजनीतिक दलों की ओर से उन्हें टारगेट किया जा रहा है. ''पिछले विधानसभा चुनाव 2020 के आंकड़ों को देखें तो महागठबंधन और एनडीए में वोटों का अंतर केवल 13000 के करीब ही था. ऐसे में यदि एक करोड़ प्रवासी बिहार लौटते हैं तो चुनाव में बड़ा उलट फेर कर सकते हैं. हालांकि वोटिंग में सामाजिक समीकरण, जातीय समीकरण और आर्थिक स्थिति सभी का प्रभाव पड़ता है. अब यह अलग बात है कि जो प्रवासी बिहारी हैं यदि बिहार लौटते हैं तो उनको कौन लुभा सकता है कौन अपने पक्ष में कर सकता है. कुल मिलाकर देखें तो उनका प्रभाव पूरे राजनीति पर पड़ना तय है.''- प्रोफेसर बीएन प्रसाद, विशेषज्ञ, एएन सिन्हा शोध संस्थान 'ये चुनाव को लेकर BJP का कार्यक्रम' : राजनीतिक विशेषज्ञ अरुण पांडे का कहना है कि, ''बीजेपी का यह चुनावी अभियान ही है. संघ, संगठन, बीजेपी का यह कार्यक्रम है. बीजेपी एक मैसेज प्रवासी बिहारी के बीच देना चाहती है. हर साल लाखों लोग बिहार से पलायन करते हैं, तो चुनाव को लेकर बीजेपी का कार्यक्रम चल रहा है.'' बिहार लगभग 7.8 करोड़ वोटर : बता दें कि बिहार की आबादी 14 करोड़ के आसपास है. इसमें से 7 करोड़ 80 लाख से अधिक वोटर हैं. बिहार के वोटर का बड़ा हिस्सा प्रवासी के तौर पर दूसरे राज्यों में रह रहे हैं या फिर काम कर रहे हैं. कई बार चुनाव के समय बिहार के प्रवासियों को प्रलोभन देकर राजनीतिक दल के नेता बुलाते भी हैं NDA को मिलता है फायदा : जानकार तो यह कहते हैं कि नीतीश कुमार के आने के बाद से बिहार में जो भी विकास के काम हुए हैं बिहारी का सम्मान बढ़ा है. उसके कारण बिहार के प्रवासी यदि चुनाव के समय बिहार लौटते हैं तो उनका वोट का बड़ा हिस्सा एनडीए को मिलता रहा है. अधिकांश प्रवासी बिहार के वोटर : कई राज्यों में प्रवासी बिहारी वहीं के वोटर हो गए हैं. 12 लाख से अधिक लोग दिल्ली में रहते हैं. बड़ी संख्या में वहीं के वोटर हो गए हैं. दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी लाखों बिहार के लोगों ने बीजेपी सरकार बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है. हालांकि अभी भी अधिकांश प्रवासी बिहार के वोटर हैं. इसी तरह महाराष्ट्र गुजरात उत्तर प्रदेश पंजाब हरियाणा जैसे राज्यों में लाखों की संख्या में बिहार रह रहे हैं जो बिहार के अभी वोटर हैं. 19 जिलों में सबसे अधिक पलायन : चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार बिहार के 19 जिलों में सबसे अधिक पलायन करने वाले वोटर हैं. बिहार में वोटिंग का प्रतिशत देश में सबसे कम होता है. इसका बड़ा कारण पलायन माना जाता है. जरा इन आंकड़ों पर गौर कीजिए. क्या कहते हैं आंकड़े: बिहार सरकार ने जातीय गणना की रिपोर्ट जारी की थी. उससे पहले कोरोना के समय भी सरकार ने एक रिपोर्ट तैयार की थी. इन रिपोर्टों के अनुसार बिहार की कुल आबादी का 3.5 फीसदी लोग दूसरे प्रदेशों में रह रहे हैं. 45 लाख 78000 से अधिक लोग पलायन करने वालों में सबसे अधिक 5.68 फीसदी सवर्ण समुदाय के लोग हैं. 3.4 फीसदी लोग पिछड़ा वर्ग एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग के हैं. पांच फीसदी से अधिक लोग अनुसूचित जाति जनजाति और अन्य जातियों में 3.2 % लोग हैं. पर्व त्योहार पर ये प्रवासी जरूर घर आते हैं. सवाल बरकरार- किसको मिलेगा फायदा? : अगर फ्लैशबेक में देखें तो जनसुराज के संयोजक प्रशांत किशोर ने छठ के समय लोगों से वादा किया था कि अगली बार जब बिहार छठ में आएंगे तो फिर उन्हें दूसरे राज्यों में काम के लिए जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. यहीं पर 15000 की नौकरी उपलब्ध कराएंगे. तो कई दलों की प्रवासी बिहारी पर नजर है. इसलिए बीजेपी भी बिहार दिवस समारोह के बहाने दूसरे राज्यों में रह रहे प्रवासियों को अभी से साधने में लगी है. अब इसका कितना लाभ मिलेगा यह तो चुनाव के समय ही पता चलेगा.              

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