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Bihar

बिहार के छात्रों के लिए ‘विद्यार्थी सहयोग पोर्टल’ लॉन्च, 10 दिन में शिकायत पर कार्रवाई का दावा

कॉलेज-यूनिवर्सिटी के चक्कर से मिलेगी राहत? छात्रों की समस्याओं को ऑनलाइन सरकार तक पहुंचाने की नई व्यवस्था पटना: बिहार में पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के लिए…

बिहार के छात्रों के लिए ‘विद्यार्थी सहयोग पोर्टल’ लॉन्च, 10 दिन में शिकायत पर कार्रवाई का दावा

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कॉलेज-यूनिवर्सिटी के चक्कर से मिलेगी राहत? छात्रों की समस्याओं को ऑनलाइन सरकार तक पहुंचाने की नई व्यवस्था पटना: बिहार में पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के लिए राज्य सरकार ने नई डिजिटल व्यवस्था शुरू की है। छात्रों की शैक्षणिक और प्रशासनिक समस्याओं के समाधान के उद्देश्य से ‘विद्यार्थी सहयोग पोर्टल’ लॉन्च किया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पोर्टल की शुरुआत करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य विद्यार्थियों की समस्याओं का समय पर समाधान सुनिश्चित करना और शिक्षा व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाना है। नई व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण बात यह बताई गई है कि छात्र की शिकायत पर निर्धारित समय के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर मामला उच्च स्तर तक पहुंच सकेगा। 10 दिनों में कार्रवाई नहीं हुई तो क्या होगा? रिपोर्ट के मुताबिक विद्यार्थी सहयोग पोर्टल पर दर्ज किसी मामले में 10 दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से नोटिस जारी किए जाने की व्यवस्था बताई गई है। इससे उन विद्यार्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है जिन्हें छोटे-छोटे काम के लिए बार-बार शिक्षण संस्थानों या संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। हालांकि अलग-अलग प्रकार की शिकायतों के निस्तारण की विस्तृत प्रक्रिया और समयसीमा संबंधित सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार ही अंतिम मानी जाएगी। किन छात्रों को मिल सकता है फायदा? इस पहल का उद्देश्य बिहार के विद्यार्थियों को अपनी समस्याएं सीधे संबंधित व्यवस्था तक पहुंचाने का माध्यम देना है। कॉलेज और उच्च शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों के लिए कई बार प्रमाणपत्र, छात्रवृत्ति, प्रशासनिक प्रक्रिया या अन्य शैक्षणिक मामलों को लेकर परेशानी सामने आती है। नई डिजिटल व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है तो विद्यार्थियों को शिकायत दर्ज कराने और उसकी प्रगति जानने में सुविधा मिल सकती है। सरकार तक पहुंचेगी छात्रों की आवाज पोर्टल का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य छात्रों और प्रशासन के बीच सीधा संवाद बेहतर करना है। सरकार का कहना है कि विद्यार्थी अपनी समस्याओं को खुलकर सामने रखें ताकि संबंधित स्तर पर उनका समाधान किया जा सके। इसके साथ सरकार ने विद्यार्थियों की मदद के लिए सहयोग शिविरों का भी उल्लेख किया है। शिकायत दर्ज करने के बाद जवाबदेही पर जोर किसी भी grievance portal की सफलता केवल शिकायत दर्ज करने की सुविधा पर निर्भर नहीं करती। असली परीक्षा यह होती है कि दर्ज शिकायत का समाधान कितनी जल्दी और प्रभावी तरीके से होता है। इसी वजह से 10 दिनों वाली व्यवस्था महत्वपूर्ण है। अगर निर्धारित अवधि में मामले पर कार्रवाई नहीं होती और वह उच्च स्तर तक पहुंचता है तो संबंधित संस्थान और अधिकारियों पर समय से जवाब देने का दबाव बढ़ सकता है। बिहार में लाखों छात्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण? बिहार में बड़ी संख्या में विद्यार्थी सरकारी स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और तकनीकी शिक्षण संस्थानों में पढ़ते हैं। शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी प्रशासनिक समस्याओं के कारण कई बार छात्रों को जिला मुख्यालय से लेकर विश्वविद्यालय तक जाना पड़ता है। दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए यह और मुश्किल हो जाता है। सीमांचल के पूर्णिया, अररिया, कटिहार और किशनगंज जैसे जिलों के छात्रों के लिए भी ऑनलाइन शिकायत व्यवस्था उपयोगी हो सकती है, बशर्ते शिकायतों का समय पर वास्तविक समाधान हो। छात्रों को क्या करना चाहिए? पोर्टल का इस्तेमाल करते समय विद्यार्थी अपनी समस्या स्पष्ट तरीके से दर्ज करें और उससे संबंधित दस्तावेज उपलब्ध हों तो उन्हें सुरक्षित रखें। शिकायत संख्या या acknowledgement मिलने पर उसे भी संभालकर रखना जरूरी होगा, ताकि बाद में मामले की स्थिति जानने में आसानी हो। छात्रों को किसी अनधिकृत वेबसाइट या सोशल मीडिया पर मिले संदिग्ध लिंक के बजाय सरकार द्वारा जारी आधिकारिक पोर्टल का ही इस्तेमाल करना चाहिए। अब असली परीक्षा implementation की विद्यार्थी सहयोग पोर्टल शुरू होना छात्रों की शिकायतों को डिजिटल माध्यम से सुनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन इसकी वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि छात्रों की शिकायतों का समाधान जमीन पर कितनी तेजी से होता है। अगर 10 दिनों में कार्रवाई और उच्च स्तर पर जवाबदेही वाली व्यवस्था प्रभावी रहती है तो बिहार के हजारों विद्यार्थियों को कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर लगाने से राहत मिल सकती है।

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