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Bihar

बिहार में बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए 12 हजार करोड़ की योजना, 2.25 करोड़ उपभोक्ताओं को मिल सकती है राहत

पटना, 12 अक्टूबर 2026। बिहार में लो वोल्टेज, जर्जर बिजली तारों और बार-बार ट्रांसफार्मर खराब होने की समस्या से परेशान लोगों के लिए राहत की उम्मीद जगी है।…

बिहार में बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए 12 हजार करोड़ की योजना, 2.25 करोड़ उपभोक्ताओं को मिल सकती है राहत

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पटना, 12 अक्टूबर 2026। बिहार में लो वोल्टेज, जर्जर बिजली तारों और बार-बार ट्रांसफार्मर खराब होने की समस्या से परेशान लोगों के लिए राहत की उम्मीद जगी है। राज्य के ऊर्जा विभाग ने बिजली वितरण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगभग 12 हजार करोड़ रुपये की योजना तैयार की है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य राज्य के करीब 2.25 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को बेहतर और अधिक भरोसेमंद बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराना है।

हिन्दुस्तान की 12 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना के तहत पुराने बिजली तारों, खंभों और कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों को बदलने की तैयारी है। प्रस्ताव को मंजूरी के लिए राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष भेजा जाना है। इसका मतलब है कि योजना अभी प्रस्ताव के चरण में है और इसे लागू करने की अंतिम समयसीमा की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। <Cite refs={["turn650531search0","turn650531search1"]}/>

किन समस्याओं को दूर करने की तैयारी?

बिहार के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की मांग लगातार बढ़ी है। घरों में एसी, कूलर और अन्य बिजली उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ने से कई इलाकों में पुराने तारों और ट्रांसफार्मरों पर अधिक दबाव पड़ रहा है। इसके कारण कम वोल्टेज, ट्रांसफार्मर जलने और बिजली आपूर्ति बाधित होने जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं।

प्रस्तावित योजना के तहत कम क्षमता वाले तारों की जगह अधिक क्षमता वाली केबल लगाने और बिजली वितरण नेटवर्क को मजबूत करने की योजना है। इससे बिजली के बढ़ते लोड को संभालने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, उपभोक्ताओं को यह ध्यान रखना चाहिए कि योजना तैयार होने और वास्तव में काम शुरू होने के बीच समय लग सकता है। राहत तभी दिखाई देगी, जब संबंधित क्षेत्रों में काम पूरा होगा और बिजली व्यवस्था का नियमित रखरखाव भी सुनिश्चित किया जाएगा।

कहां कितना खर्च करने का प्रस्ताव?

ऊर्जा विभाग की प्रस्तावित योजना में बिजली वितरण नेटवर्क के अलग-अलग हिस्सों के लिए राशि निर्धारित की गई है।

  • 8,465 करोड़ रुपये: लगभग 1.18 लाख किलोमीटर क्षेत्र में खंभों और केबल तारों से संबंधित काम।

  • 2,262 करोड़ रुपये: लगभग 33,698 किलोमीटर क्षेत्र में बांस-बल्ले के सहारे लगे तारों को बदलने का प्रस्ताव।

  • 370 करोड़ रुपये: करीब 12 हजार ट्रांसफार्मरों को बदलने के लिए।

रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर बिहार के 21 जिलों में लगभग 6,066 करोड़ रुपये और दक्षिण बिहार के 17 जिलों में करीब 5,031 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है। इन दोनों मदों का कुल योग 11,097 करोड़ रुपये है। शेष प्रस्तावित राशि का विस्तृत वितरण उपलब्ध रिपोर्ट में स्पष्ट नहीं किया गया है।

सीमांचल के उपभोक्ताओं को क्या फायदा हो सकता है?

पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज सहित उत्तर बिहार के जिलों में भी बिजली वितरण नेटवर्क की क्षमता और रखरखाव आम लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। यदि योजना को मंजूरी मिलती है और संबंधित इलाकों में काम किया जाता है, तो उपभोक्ताओं को कम वोल्टेज की समस्या में राहत मिल सकती है।

ग्रामीण इलाकों में जर्जर तारों और कमजोर खंभों को बदलने से बिजली संबंधी दुर्घटनाओं का जोखिम कम करने में भी मदद मिल सकती है। वहीं, उचित क्षमता के ट्रांसफार्मर लगाए जाने से अधिक बिजली मांग वाले क्षेत्रों में आपूर्ति की विश्वसनीयता बेहतर होने की संभावना है।

लेकिन अभी यह कहना सही नहीं होगा कि सीमांचल के प्रत्येक जिले या गांव में काम कब शुरू होगा। इसके लिए जिलेवार कार्ययोजना, स्वीकृति और कार्यान्वयन कार्यक्रम का इंतजार करना होगा।

योजना को लागू करने में क्या होंगी चुनौतियां?

करीब 12 हजार करोड़ रुपये की परियोजना के लिए वित्तीय व्यवस्था, समय पर सामग्री की उपलब्धता, ठेकेदारों का चयन और काम की गुणवत्ता महत्वपूर्ण होगी। रिपोर्ट के अनुसार, विभाग बैंक ऋण के माध्यम से राशि जुटाने की तैयारी कर रहा है।

इसके साथ ही, केवल पुराने तार और ट्रांसफार्मर बदलना पर्याप्त नहीं होगा। बिजली की मांग के अनुसार नेटवर्क की क्षमता तय करना, समय पर मरम्मत करना और शिकायतों का त्वरित समाधान भी जरूरी होगा।

अब कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार

बिहार सरकार की इस प्रस्तावित योजना का मुख्य उद्देश्य बिजली वितरण व्यवस्था को मजबूत करना और उपभोक्ताओं की पुरानी शिकायतों को कम करना है। अब आगे की प्रक्रिया कैबिनेट की मंजूरी और विभाग की विस्तृत कार्ययोजना पर निर्भर करेगी।

राज्य के करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए यह योजना महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब प्रस्ताव जमीन पर उतरेगा और निर्धारित काम समय पर पूरे होंगे।

आपकी राय: क्या आपके गांव या शहर में लो वोल्टेज, बार-बार बिजली कटने या ट्रांसफार्मर खराब होने की समस्या है? अपने जिले और इलाके का नाम कमेंट में बताएं।

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