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Bihar

छात्र प्रदर्शन में AK-47 से फायरिंग का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, बिहार सरकार ने बताया क्यों चली थीं चार गोलियां

सरकार ने कोर्ट में कहा- भीड़ में घिर गया था जवान, हवा में किए चार फायर; पुलिसकर्मी निलंबित, जांच जारी नई दिल्ली/पटना: बिहार में छात्र आंदोलन के दौरान…

छात्र प्रदर्शन में AK-47 से फायरिंग का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, बिहार सरकार ने बताया क्यों चली थीं चार गोलियां

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सरकार ने कोर्ट में कहा- भीड़ में घिर गया था जवान, हवा में किए चार फायर; पुलिसकर्मी निलंबित, जांच जारी नई दिल्ली/पटना: बिहार में छात्र आंदोलन के दौरान पुलिसकर्मी द्वारा AK-47 से फायरिंग किए जाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट में चर्चा के केंद्र में है। बिहार सरकार ने शीर्ष अदालत में दाखिल अपने जवाब में स्वीकार किया है कि सिवान में प्रदर्शन के दौरान एक पुलिस कांस्टेबल ने AK-47 से चार राउंड फायर किए थे। हालांकि राज्य सरकार का कहना है कि गोलियां प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाकर नहीं, बल्कि हवा में चलाई गई थीं और AK-47 की गोली से कोई प्रदर्शनकारी घायल नहीं हुआ। सरकार के मुताबिक संबंधित कांस्टेबल भीड़ के बीच घिर गया था, जिसके बाद उसने फायरिंग की। 25 जुलाई को सिवान में क्या हुआ था? मामला 25 जुलाई 2026 को सिवान में हुए छात्र प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रतियोगी परीक्षाओं और कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन के दौरान हालात तनावपूर्ण हो गए थे। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी के हाथ में AK-47 और फायरिंग से जुड़ा घटनाक्रम सामने आया। मामला सुर्खियों में आने के बाद पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों पर इस्तेमाल किए गए बल को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और पुलिस कार्रवाई के खिलाफ याचिकाएं दायर की गईं। याचिकाकर्ताओं ने अदालत की निगरानी में जांच समेत विभिन्न मांगें उठाई हैं। बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा? बिहार सरकार ने अपने हलफनामे में अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों से इनकार किया है। सरकार के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान संबंधित कांस्टेबल भीड़ में घिर गया था और उसने खुद को उस स्थिति से निकालने के दौरान AK-47 से चार गोलियां हवा में चलाईं। राज्य सरकार का दावा है कि इन चार गोलियों से कोई प्रदर्शनकारी घायल नहीं हुआ। सरकार ने माना- Law and Order के लिए नहीं है AK-47 इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि बिहार सरकार ने अदालत के सामने माना है कि इस तरह के हथियार का इस्तेमाल सामान्य कानून-व्यवस्था की स्थिति में नहीं होना चाहिए। सरकार ने AK-47 को विशेष ऑपरेशन में इस्तेमाल होने वाला हथियार बताते हुए कहा कि यह सामान्य crowd control या law-and-order situation के लिए नहीं है। यही स्वीकारोक्ति मामले को और महत्वपूर्ण बना रही है। AK-47 चलाने वाला कांस्टेबल निलंबित घटना के बाद संबंधित पुलिस कांस्टेबल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की गई है। उसे निलंबित कर दिया गया है और मामले की जांच जारी है। रिपोर्ट के मुताबिक फायरिंग से जुड़े पहलुओं की जांच के लिए बैलिस्टिक परीक्षण भी कराया जा रहा है। इस जांच से यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि घटनास्थल पर किस हथियार से कितने राउंड चले और उनकी दिशा क्या थी। फिर तीन प्रदर्शनकारी कैसे हुए घायल? यह इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू है। बिहार सरकार का कहना है कि AK-47 से चली चार गोलियों से कोई घायल नहीं हुआ। हालांकि सरकार के जवाब में प्रदर्शन के दौरान एक अलग फायरिंग की घटना में तीन प्रदर्शनकारियों को मामूली firearm injuries होने की बात भी सामने आई है। इसलिए यह लिखना सही नहीं होगा कि प्रदर्शन के दौरान किसी को गोली नहीं लगी। सरकार का विशिष्ट दावा यह है कि AK-47 से चलाई गई चार गोलियों से कोई घायल नहीं हुआ। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई थी झड़प सरकार ने अपने जवाब में प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा का भी उल्लेख किया है। राज्य का कहना है कि विभिन्न जगहों पर विरोध प्रदर्शन हिंसक हुए और पुलिस तथा सरकारी कर्मचारियों को भी चोटें आईं। राज्यभर में इन घटनाओं से संबंधित कई FIR दर्ज की गईं और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां हुईं। दूसरी तरफ याचिकाओं में पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल इस्तेमाल करने के आरोप लगाए गए हैं। अब इन दोनों पक्षों के दावों पर सुप्रीम कोर्ट में कानूनी परीक्षण हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट में क्यों पहुंचा मामला? छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के खिलाफ कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में पहुंची हैं। इनमें पुलिस द्वारा इस्तेमाल किए गए बल और हथियारों पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से court-monitored investigation की मांग भी की गई है। ऐसे में अदालत के सामने सवाल केवल एक पुलिसकर्मी की कार्रवाई का नहीं, बल्कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा बल प्रयोग की सीमा और जवाबदेही का भी है। बिहार की राजनीति में भी गरमाया छात्रों का मुद्दा प्रतियोगी परीक्षाओं, पेपर लीक और छात्र आंदोलनों को लेकर बिहार में पहले से राजनीतिक माहौल गरम है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी छात्रों और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर 19 अगस्त को राजभवन मार्च का ऐलान किया है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में AK-47 फायरिंग से जुड़ा मामला सामने आने के बाद छात्रों का मुद्दा बिहार की राजनीति में और प्रमुख हो सकता है। अब सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही पर नजर इस मामले में बिहार सरकार ने अपना पक्ष अदालत के सामने रख दिया है। सरकार का कहना है कि अत्यधिक बल का इस्तेमाल नहीं किया गया, जबकि याचिकाकर्ताओं ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि सरकार ने AK-47 से चार राउंड फायर किए जाने को स्वीकार किया है, लेकिन उसका कहना है कि फायरिंग हवा में हुई और इससे कोई घायल नहीं हुआ। संबंधित कांस्टेबल को निलंबित किया जा चुका है और जांच जारी है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट आगे क्या निर्देश देता है, इस पर बिहार के छात्रों से लेकर राजनीतिक दलों तक की नजर रहेगी। डिस्क्लेमर: खबर में पुलिस कार्रवाई और घटनाक्रम से जुड़े दावे बिहार सरकार के सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाब तथा अदालत में उठाए गए आरोपों पर आधारित हैं। मामले की न्यायिक कार्यवाही और जांच जारी है।

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