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Bihar

कम बारिश के बावजूद बिहार में क्यों आई भीषण बाढ़? गंगा ने बदला पूरा खेल

पटना: बिहार एक बार फिर बाढ़ की चपेट में है। राज्य के 14 जिलों में बाढ़ से 43 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित बताए गए हैं। गंगा समेत कई प्रमुख नदियां खतरे के…

कम बारिश के बावजूद बिहार में क्यों आई भीषण बाढ़? गंगा ने बदला पूरा खेल

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पटना: बिहार एक बार फिर बाढ़ की चपेट में है। राज्य के 14 जिलों में बाढ़ से 43 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित बताए गए हैं। गंगा समेत कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं और कई इलाकों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। लेकिन इस बार बिहार की बाढ़ ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—जब मानसून के दौरान बिहार में सामान्य से कम बारिश हुई, तो आखिर इतनी बड़ी बाढ़ आई कैसे?

यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 1 जून से 8 सितंबर के बीच बिहार में कुल बारिश सामान्य से करीब 27 प्रतिशत कम रही। सितंबर की शुरुआत तक राज्य में सूखे जैसे हालात की चर्चा हो रही थी। इसके बाद अचानक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा और देखते ही देखते बाढ़ ने कई जिलों को अपनी चपेट में ले लिया।

14 जिलों में 43 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित

बिहार आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, बाढ़ से करीब 43.64 लाख लोग, 85 प्रखंडों और 527 पंचायतों में प्रभावित हुए हैं। पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया और अरवल जैसे जिले प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं।

इनमें सीमांचल और पूर्वी बिहार के कई इलाके भी शामिल हैं, जहां बाढ़ का असर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। सड़क संपर्क, आवागमन, खेती और स्थानीय कारोबार प्रभावित हुए हैं। कई ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और राहत सामग्री उपलब्ध कराने का काम जारी है।

सबसे बड़ा सवाल: कम बारिश फिर भी इतनी बड़ी बाढ़ क्यों?

आमतौर पर बिहार में बाढ़ की चर्चा होते ही नेपाल में भारी बारिश और वहां से आने वाली नदियों का नाम सामने आता है। लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग रही।

विशेषज्ञों के अनुसार इस बाढ़ को केवल बिहार में हुई बारिश से समझना सही नहीं होगा। बिहार की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां आने वाली कई नदियों का पानी दूसरे राज्यों और बड़े जलग्रहण क्षेत्रों से होकर आता है।

इस बार गंगा का जलस्तर खुद बेहद ऊंचा हो गया, जिससे उसकी सहायक नदियों के पानी की निकासी भी प्रभावित हुई। यही स्थिति कई इलाकों में बाढ़ को और गंभीर बनाने वाली साबित हुई।

गंगा ने बदला बाढ़ का पूरा समीकरण

पटना और भागलपुर में गंगा का जलस्तर इस बार विशेष चिंता का कारण बना। पटना के गांधी घाट पर गंगा ने अपने पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर को पार कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार जलस्तर 50.58 मीटर तक पहुंचा, जो 2016 में दर्ज 50.52 मीटर के पिछले उच्चतम स्तर से ऊपर था।

भागलपुर के सुल्तानगंज में भी गंगा का जलस्तर बेहद ऊंचा रहा। इसका असर सिर्फ गंगा किनारे बसे इलाकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन नदियों पर भी पड़ा जिन्हें अपना पानी आगे जाकर गंगा में गिराना होता है।

इसे आसान भाषा में समझें तो जब मुख्य नदी यानी गंगा पहले से ही बहुत ज्यादा पानी से भरी हो, तो उसमें मिलने वाली दूसरी नदियों का पानी तेजी से आगे निकल नहीं पाता। इससे पीछे के इलाकों में पानी जमा होने लगता है। इसे backwater effect कहा जाता है।

कई नदियों का पानी एक साथ बढ़ा

बिहार की बाढ़ सिर्फ एक नदी की कहानी नहीं है। गंगा के साथ-साथ सोन, गंडक, पुनपुन, कोसी, बागमती और घाघरा जैसी नदियों के जलस्तर ने भी स्थिति को जटिल बनाया।

सितंबर में कुछ इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश भी हुई। रिपोर्ट के अनुसार सितंबर में बिहार में बारिश सामान्य से करीब 24 प्रतिशत अधिक रही है। यानी पूरे मानसून का औसत भले ही कम रहा हो, लेकिन बाढ़ से ठीक पहले कुछ क्षेत्रों में कम समय में भारी बारिश हुई।

यही वजह है कि केवल पूरे मानसून की औसत बारिश देखकर बाढ़ के खतरे का अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है।

भागलपुर की घटना ने बढ़ाई चिंता

बाढ़ की गंभीरता का अंदाजा भागलपुर की एक दर्दनाक घटना से भी लगाया जा सकता है। कोयली खुटाहा गांव में बाढ़ के पानी में एक व्यक्ति को बचाने की कोशिश के दौरान पांच लोगों की डूबने से मौत हो गई। मृतकों में एक ही परिवार के चार लोग शामिल बताए गए हैं।

यह घटना एक बार फिर बताती है कि बाढ़ के दौरान तेज बहाव वाले पानी में बिना सुरक्षा के उतरना कितना खतरनाक हो सकता है।

राहत और बचाव अभियान जारी

बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासन और आपदा राहत टीमों की ओर से राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है। कई स्थानों पर राहत शिविर और सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। प्रभावित लोगों को भोजन, चिकित्सा सहायता और जरूरी सामान उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।

हालांकि कुछ नदियों का जलस्तर घटने या स्थिर होने के संकेत मिले हैं, लेकिन कई इलाकों में स्थिति अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है।

क्या बिहार को हर साल बाढ़ के लिए सिर्फ बारिश को जिम्मेदार मानना चाहिए?

इस बार की स्थिति एक बड़ी बहस को जन्म देती है। अगर पूरे मानसून में बारिश सामान्य से कम थी, फिर भी लाखों लोग बाढ़ से प्रभावित हुए, तो सवाल सिर्फ बारिश का नहीं है।

बिहार की भौगोलिक स्थिति, नदियों का नेटवर्क, गाद, जलनिकासी, तटबंध, दूसरे राज्यों से आने वाला पानी और बदलता मौसम—इन सभी को साथ देखकर बाढ़ की समस्या का समाधान तलाशना होगा।

हर साल बाढ़ आने के बाद राहत और बचाव जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है कि बाढ़ से पहले की तैयारी और दीर्घकालिक जल प्रबंधन पर ध्यान दिया जाए।

अब आपकी बारी

आपके इलाके में बाढ़ की स्थिति कैसी है?

क्या आपके गांव या शहर में सड़क, बिजली, पीने के पानी या आवागमन की समस्या हो रही है?

कमेंट करके बताएं और इस खबर को अपने क्षेत्र के लोगों तक जरूर पहुंचाएं।

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