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AI खुद कर सकता है साइबर हमला? Google Gemini के टेस्ट ने बढ़ाई चिंता

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को अब तक ज्यादातर लोग सवालों के जवाब देने, कोड लिखने, जानकारी खोजने और रोजमर्रा के काम आसान करने वाली तकनीक के…

AI खुद कर सकता है साइबर हमला? Google Gemini के टेस्ट ने बढ़ाई चिंता

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नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को अब तक ज्यादातर लोग सवालों के जवाब देने, कोड लिखने, जानकारी खोजने और रोजमर्रा के काम आसान करने वाली तकनीक के रूप में देखते रहे हैं। लेकिन AI की क्षमता जैसे-जैसे बढ़ रही है, साइबर सुरक्षा की दुनिया में एक नया सवाल भी सामने आ रहा है।

क्या आने वाले समय में AI सिर्फ इंसानों के लिए साइबर सुरक्षा का काम करेगा या वह खुद साइबर हमले की प्रक्रिया को भी अंजाम देने में सक्षम हो सकता है?

हाल में Google के Gemini AI से जुड़े एक साइबर सुरक्षा परीक्षण ने इस सवाल को और गंभीर बना दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक Gemini ने एक सुरक्षा मूल्यांकन के दौरान सार्वजनिक जानकारी का इस्तेमाल किया, credentials का अनुमान लगाया और तीन वेबसाइटों तक पहुंच बनाई। इस परीक्षण के बाद Google ने अपने सुरक्षा परीक्षण और सुरक्षा उपायों में बदलाव किए। इसे AI की स्वायत्त साइबर क्षमता से जुड़े शुरुआती महत्वपूर्ण उदाहरणों में गिना जा रहा है।

AI की भूमिका बदल रही है

पहले AI का इस्तेमाल मुख्य रूप से जानकारी का विश्लेषण करने या इंसानों द्वारा दिए गए निर्देशों पर काम करने के लिए किया जाता था। लेकिन अब agentic AI सिस्टम ऐसे बनाए जा रहे हैं जो किसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए कई चरणों में खुद कार्रवाई कर सकते हैं।

यही बदलाव साइबर सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

एक सामान्य AI मॉडल किसी वेबसाइट की सुरक्षा कमजोरी के बारे में बता सकता है। लेकिन agentic AI संभावित कमजोरी खोजने, उपलब्ध जानकारी का विश्लेषण करने और आगे की कार्रवाई के लिए कई चरण खुद तय कर सकता है।

यानी AI की भूमिका सिर्फ सलाह देने वाले सिस्टम से आगे बढ़कर कार्रवाई करने वाले सिस्टम की तरफ बढ़ रही है।

Google के परीक्षण में क्या हुआ?

Google के अनुसार Gemini से जुड़े सुरक्षा परीक्षण में मॉडल ने इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी को इकट्ठा किया और उसका इस्तेमाल करते हुए संभावित पहुंच हासिल करने की कोशिश की।

रिपोर्टों के मुताबिक परीक्षण के दौरान Gemini ने तीन कंपनियों की वेबसाइटों तक पहुंच बनाई। Google ने इसे सुरक्षा मूल्यांकन के संदर्भ में देखा और कहा कि इस तरह के परीक्षणों से AI सिस्टम की क्षमताओं और उनसे जुड़े जोखिमों को समझने में मदद मिलती है।

यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। यह किसी सामान्य उपयोगकर्ता के खिलाफ हुआ वास्तविक साइबर हमला नहीं था। यह एक नियंत्रित सुरक्षा परीक्षण था, जिसका उद्देश्य AI की क्षमताओं और संभावित जोखिमों को समझना था।

फिर चिंता किस बात की है?

चिंता यह है कि AI की क्षमता बढ़ने के साथ साइबर अपराधियों को भी ऐसे उपकरण मिल सकते हैं जो पहले बहुत अधिक मानवीय मेहनत मांगते थे।

उदाहरण के लिए किसी हमलावर को किसी कंपनी के बारे में जानकारी जुटानी हो, उसके डिजिटल सिस्टम को समझना हो या संभावित कमजोरियों की पहचान करनी हो, तो AI इन प्रक्रियाओं को तेज कर सकता है।

इसका मतलब यह नहीं है कि AI अपने आप हर सिस्टम को हैक कर सकता है। किसी डिजिटल सिस्टम में प्रवेश के लिए अभी भी कई तकनीकी और सुरक्षा बाधाएं होती हैं।

लेकिन AI अगर अलग-अलग चरणों को तेजी से जोड़ने में सक्षम होता है, तो साइबर हमलों की तैयारी का समय कम हो सकता है।

AI से AI की लड़ाई

यही वजह है कि साइबर सुरक्षा कंपनियां भी AI का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं।

एक तरफ AI आधारित सिस्टम संभावित हमले और कमजोरियां खोज रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सुरक्षा कंपनियां ऐसे AI एजेंट तैयार कर रही हैं जो लगातार नेटवर्क और एप्लिकेशन की निगरानी कर सकें।

हाल ही में Palo Alto Networks ने भी AI आधारित साइबर सुरक्षा सेवा की घोषणा की है, जिसमें अलग-अलग AI मॉडल का इस्तेमाल करके कंपनियों के वेब एप्लिकेशन, API और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में कमजोरियां खोजने की कोशिश की जाएगी।

इससे साफ है कि साइबर सुरक्षा की अगली लड़ाई इंसान बनाम मशीन की नहीं, बल्कि AI बनाम AI की दिशा में भी जा सकती है।

आम इंटरनेट यूजर पर क्या असर होगा?

यह बदलाव सिर्फ बड़ी टेक कंपनियों या बैंकों तक सीमित नहीं रहेगा।

आज मोबाइल बैंकिंग, UPI, ई-कॉमर्स, सोशल मीडिया, क्लाउड स्टोरेज और सरकारी सेवाएं इंटरनेट से जुड़ी हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा का महत्व हर इंटरनेट यूजर के लिए बढ़ रहा है।

आम लोगों को अपने ऑनलाइन अकाउंट में मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड रखना चाहिए। जहां संभव हो वहां multi-factor authentication सक्रिय रखना चाहिए। अनजान लिंक, संदिग्ध ऐप और फर्जी वेबसाइट से बचना चाहिए।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी AI टूल को संवेदनशील पासवर्ड, बैंकिंग जानकारी या निजी दस्तावेज बिना जरूरत नहीं देना चाहिए।

आने वाले समय की सबसे बड़ी चुनौती

AI को रोकना इसका समाधान नहीं है। असली चुनौती यह है कि AI की बढ़ती क्षमता के साथ सुरक्षा व्यवस्था भी उतनी ही तेजी से विकसित हो।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए अब केवल पारंपरिक malware, phishing और hacking को रोकना पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें ऐसे AI सिस्टम की निगरानी भी करनी होगी जो खुद निर्णय लेकर कई डिजिटल कार्य कर सकते हैं।

AI तकनीक जितनी शक्तिशाली होती जाएगी, उसके इस्तेमाल के नियम, निगरानी और सुरक्षा नियंत्रण भी उतने ही महत्वपूर्ण होंगे।

यही कारण है कि आने वाले वर्षों में AI की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल यह नहीं होगी कि वह कितना काम कर सकता है। असली सवाल यह भी होगा कि उसे कितना स्वतंत्र काम करने दिया जाए और उस स्वतंत्रता पर नियंत्रण कैसे रखा जाए।

आपकी राय क्या है?

अगर AI खुद कमजोरियां खोजने और डिजिटल सिस्टम पर कार्रवाई करने में सक्षम होता जा रहा है, तो क्या कंपनियों को AI एजेंट्स को इतनी स्वतंत्रता देनी चाहिए?

अपनी राय Seemanchal Live के साथ साझा करें।

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