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Cyber Fraud पर बड़ा वार: ₹25,698 करोड़ के संदिग्ध ट्रांजैक्शन रोकने में मदद, जानिए क्या है सरकार का Suspect Registry सिस्टम

Digital Arrest, फर्जी Investment और Online Scam के बढ़ते मामलों के बीच I4C का नया हथियार; लाखों संदिग्ध पहचान सिस्टम में दर्ज नई दिल्ली: भारत में तेजी से…

Cyber Fraud पर बड़ा वार: ₹25,698 करोड़ के संदिग्ध ट्रांजैक्शन रोकने में मदद, जानिए क्या है सरकार का Suspect Registry सिस्टम
Digital Arrest, फर्जी Investment और Online Scam के बढ़ते मामलों के बीच I4C का नया हथियार; लाखों संदिग्ध पहचान सिस्टम में दर्ज नई दिल्ली: भारत में तेजी से बढ़ रहे ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर अपराध के बीच सरकार का Suspect Registry सिस्टम एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच बनकर सामने आया है। गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) ने इस व्यवस्था के जरिए बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ साइबर अपराध से जुड़े संदिग्ध identifiers साझा करने की व्यवस्था विकसित की है। आज सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक इस सिस्टम की मदद से ₹25,698 करोड़ से अधिक मूल्य के संभावित fraudulent transactions को रोकने में सहायता मिली है। आखिर क्या है Suspect Registry? सरल भाषा में समझें तो Suspect Registry साइबर अपराध से जुड़े संदिग्ध डिजिटल identifiers का एक डेटाबेस है। जब किसी मोबाइल नंबर, बैंक खाते, UPI ID, device identifier या दूसरे digital footprint का संबंध cybercrime से सामने आता है, तो ऐसी जानकारी को सिस्टम में flag किया जा सकता है। इसके बाद बैंकों और दूसरी संबंधित संस्थाओं को संदिग्ध गतिविधि पहचानने में मदद मिलती है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि फ्रॉड होने के बाद केवल अपराधी को खोजने के बजाय पैसा ट्रांसफर होने के दौरान ही संदिग्ध transaction को पहचानने की कोशिश की जा सकती है। 30 लाख से ज्यादा संदिग्ध Identifiers India Today की रिपोर्ट के मुताबिक Suspect Registry में 30.48 लाख से अधिक suspect identifiers शामिल किए जा चुके हैं। इनमें cybercrime से जुड़े संदिग्ध accounts, numbers और devices जैसी जानकारियां शामिल हो सकती हैं। यह database लगातार मिलने वाली cybercrime complaints और विभिन्न एजेंसियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर विकसित किया जा रहा है। ₹25,698 करोड़ बचाने में कैसे मिली मदद? Cyber fraud में सबसे महत्वपूर्ण समय वह होता है जब पीड़ित के खाते से पैसा निकलने के बाद उसे अलग-अलग खातों में तेजी से ट्रांसफर किया जाता है। अपराधी अक्सर पैसे को कई बैंक खातों के बीच घुमाते हैं, जिससे उसे बाद में trace और recover करना मुश्किल हो जाता है। Suspect Registry के जरिए बैंक पहले से चिन्हित संदिग्ध accounts और identifiers को पहचान सकते हैं। इससे suspicious transaction को रोकने या उसकी अतिरिक्त जांच करने का अवसर मिल सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक इसी व्यवस्था से ₹25,698 करोड़ से अधिक के संभावित fraudulent transactions को रोकने में मदद मिली है। Digital Arrest Scam बना बड़ी चुनौती पिछले कुछ वर्षों में भारत में Digital Arrest नाम से होने वाला scam तेजी से चर्चा में आया है। इसमें ठग खुद को पुलिस, CBI, ED, Customs, Telecom Department या दूसरी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर पीड़ित को डराते हैं। कई मामलों में वीडियो कॉल के जरिए फर्जी पुलिस स्टेशन जैसा माहौल तैयार किया जाता है और व्यक्ति से कहा जाता है कि उसके नाम पर कोई parcel, bank account या mobile number आपराधिक गतिविधि में इस्तेमाल हुआ है। इसके बाद गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे ट्रांसफर करवाने की कोशिश की जाती है। सबसे जरूरी बात यह है कि कोई वैध सरकारी जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर पैसे देकर गिरफ्तारी से बचने के लिए नहीं कहती। Investment Scam में भी फंस रहे लोग Online investment fraud भी बड़ी चुनौती बन चुका है। WhatsApp, Telegram, Instagram और दूसरे platforms के जरिए लोगों को कम समय में ज्यादा return देने का लालच दिया जाता है। शुरुआत में पीड़ित को छोटी रकम पर कथित profit दिखाया जाता है। भरोसा बढ़ने के बाद उससे बड़ी रकम निवेश कराई जाती है। जब व्यक्ति पैसा निकालना चाहता है तो withdrawal fee, tax या security deposit के नाम पर और पैसे मांगे जाते हैं। आखिर में पूरा पैसा फंस जाता है। सीमांचल के लोगों को क्यों रहना चाहिए सावधान? Cyber fraud केवल बड़े शहरों की समस्या नहीं है। पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज जैसे जिलों में भी smartphone, UPI और internet banking का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। डिजिटल भुगतान जितना सुविधाजनक हुआ है, अपराधियों के लिए दूर बैठे लोगों को निशाना बनाना भी उतना ही आसान हुआ है। विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में KYC update, बिजली कनेक्शन बंद होने, बैंक खाता freeze होने, SIM बंद होने और सरकारी योजना का पैसा दिलाने जैसे बहानों से आने वाले फोन या messages से सावधान रहने की जरूरत है। ये 7 गलतियां कभी न करें किसी को भी OTP, UPI PIN, ATM PIN या CVV न बताएं। अनजान व्यक्ति के कहने पर कोई screen-sharing या remote-access app install न करें। WhatsApp पर आए APK file को install न करें। “आप Digital Arrest में हैं” कहकर पैसे मांगने वाले व्यक्ति पर भरोसा न करें। QR Code scan करके पैसे मिलते नहीं, आम तौर पर भुगतान होता है। Google Search में मिले किसी भी random customer-care नंबर पर तुरंत भरोसा न करें। ज्यादा return का वादा करने वाले Telegram/WhatsApp investment groups में पैसा लगाने से पहले पूरी जांच करें। Fraud हो जाए तो सबसे पहले क्या करें? Online fraud में समय बेहद महत्वपूर्ण है। अगर आपके खाते से धोखे से पैसा निकल गया है तो बैंक को तुरंत सूचना देकर account/transaction पर जरूरी कार्रवाई की मांग करें। साथ ही भारत के आधिकारिक cybercrime reporting system पर शिकायत दर्ज करें। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होती है, उतनी जल्दी संबंधित बैंक और एजेंसियों के पास संदिग्ध transaction पर कार्रवाई करने का अवसर रहता है। Transaction ID, scammer का मोबाइल नंबर, UPI ID, screenshots, WhatsApp chats और bank statement जैसे evidence delete नहीं करने चाहिए। AI से और मुश्किल हो सकती है Cyber Security की लड़ाई Cybercrime का अगला चरण और चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि अपराधी अब AI का इस्तेमाल भी कर रहे हैं। आज ही सामने आई एक अलग रिपोर्ट में SilverFox cybercriminal group द्वारा नकली AI applications के जरिए भारत और दूसरे एशियाई देशों की कंपनियों को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। AI से fake voice, phishing messages और नकली applications को ज्यादा convincing बनाना संभव हो रहा है। इसलिए आने वाले समय में केवल “यह message असली लग रहा है” सुरक्षा की गारंटी नहीं होगी। Technology बढ़ रही है तो Digital सावधानी भी जरूरी UPI, mobile banking और digital payments ने भारत में पैसों के लेन-देन को बेहद आसान बनाया है। लेकिन इसी सुविधा का फायदा cyber criminals भी उठाने की कोशिश कर रहे हैं। Suspect Registry जैसे systems अपराधियों के financial network को जल्दी पहचानने में मदद कर सकते हैं, लेकिन अंतिम सुरक्षा में आम नागरिक की जागरूकता भी बेहद महत्वपूर्ण है। Seemanchal Live की अपील: बैंक, पुलिस या सरकारी अधिकारी बनकर कोई व्यक्ति फोन या वीडियो कॉल पर पैसे ट्रांसफर करने को कहे तो जल्दबाजी न करें। पहले संबंधित संस्था से स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। OTP और UPI PIN किसी भी परिस्थिति में साझा न करें।

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