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बाबा नारायण हरि के समर्थन में उतरे मांझी, जानें हाथरस घटना पर क्या कहा?

बाबा नारायण हरि के समर्थन में उतरे मांझी, जानें हाथरस घटना पर क्या कहा? केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि यह प्रशासन की जिम्मेदारी है. जब लोगों की संख्या 80 हजार थी और ढाई लाख की भीड़ जुटी तो इसे कैसे मैनेज किया जाए?   केंद्रीय मंत्री और सांसद जीतन राम मांझी ने शुक्रवार (05 जुलाई) को पटन

बाबा नारायण हरि के समर्थन में उतरे मांझी, जानें हाथरस घटना पर क्या कहा?

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बाबा नारायण हरि के समर्थन में उतरे मांझी, जानें हाथरस घटना पर क्या कहा? केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि यह प्रशासन की जिम्मेदारी है. जब लोगों की संख्या 80 हजार थी और ढाई लाख की भीड़ जुटी तो इसे कैसे मैनेज किया जाए?   केंद्रीय मंत्री और सांसद जीतन राम मांझी ने शुक्रवार (05 जुलाई) को पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान हाथरस की घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने हिंदुस्तान को आस्थाओं का देश बताते हुए कहा कि यहां विभिन्न प्रकार के बाबा होते हैं, जो आमंत्रित न किए जाने पर भी लोगों के बीच आ जाते हैं. मांझी ने प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब भीड़ की संख्या 80 हजार से बढ़कर ढाई लाख हो गई, तो इसे कैसे मैनेज करना चाहिए था, यह प्रशासन का काम था. प्रशासन की जिम्मेदारी जीतन राम मांझी ने कहा कि सेवादार और कार्यकर्ताओं को भीड़ की संख्या का एहसास था और ऐसे में उन्हें प्रशासन की मदद लेनी चाहिए थी. उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश की सरकार सख्त है और इस मामले में कार्रवाई कर रही है. गिरफ्तारियां हो रही हैं और बाबा को खोजने के लिए इनाम भी घोषित किया गया है. मांझी ने इस बात पर जोर दिया कि प्रशासन को पहले से ही भीड़ प्रबंधन के लिए तैयार रहना चाहिए था. बिहार में पुल गिरने की घटनाएं वहीं दूसरी ओर, बिहार में पुलों के गिरने की घटनाओं पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि बरसात का समय है और काफी बारिश हो रही है, इसलिए पुल गिरने का सिलसिला जारी है. उन्होंने बताया कि बिहार के मुख्यमंत्री इस मामले में बहुत संवेदनशील हैं और उन्होंने इस पर सख्त निर्देश दिए हैं कि अगर किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. पुलों की जांच और सियासी बवाल पिछले 15 दिनों में बिहार के कई जिलों में पुलों और पुलियों के गिरने की घटनाएं सामने आई हैं. इनमें ज्यादातर पुल काफी पुराने थे और नदियों में तेज बहाव और बारिश के चलते मिट्टी के कटाव के कारण ये हादसे हुए हैं. इसको लेकर प्रदेश में सियासी बवाल मच गया है. जेडीयू का कहना है कि जब तेजस्वी यादव के पास विभाग था तो ऐसी घटनाएं हुईं, जबकि तेजस्वी यादव का कहना है कि 17-18 साल तक ग्रामीण कार्य विभाग जेडीयू के पास था. मांझी की आलोचना और संभावित समाधान जीतन राम मांझी ने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण पुलों का गिरना असामान्य नहीं है, लेकिन इस मामले में गड़बड़ी की जांच जरूरी है. उन्होंने मुख्यमंत्री के सख्त रुख की सराहना की और कहा कि इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने उम्मीद जताई कि जांच के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा.

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