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Politics

कौन हैं चंद्र कुमार बोस? नेताजी सुभाष चंद्र बोस से क्या है रिश्ता, Gen-Z के लिए बनाएंगे ‘आजाद हिंद पार्टी’

नई दिल्ली: देश की राजनीति में जल्द ही एक नए राजनीतिक दल की एंट्री हो सकती है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परिवार से आने वाले चंद्र कुमार बोस ने युवाओं, खासकर…

कौन हैं चंद्र कुमार बोस? नेताजी सुभाष चंद्र बोस से क्या है रिश्ता, Gen-Z के लिए बनाएंगे ‘आजाद हिंद पार्टी’

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नई दिल्ली: देश की राजनीति में जल्द ही एक नए राजनीतिक दल की एंट्री हो सकती है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परिवार से आने वाले चंद्र कुमार बोस ने युवाओं, खासकर Gen-Z को केंद्र में रखकर ‘आजाद हिंद पार्टी’ नाम से नया राजनीतिक मंच तैयार करने की बात कही है। भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के साथ अपनी राजनीतिक पारी समाप्त करने के बाद अब वह स्वतंत्र रूप से नई शुरुआत की तैयारी कर रहे हैं। हाल के युवा प्रदर्शनों के बाद चंद्र कुमार बोस का यह कदम चर्चा में है। उनका कहना है कि देश के युवाओं में मौजूदा राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर असंतोष है और उन्हें एक ऐसे मंच की जरूरत है, जहां उनकी समस्याओं और विचारों को प्राथमिकता मिले। कौन हैं चंद्र कुमार बोस और नेताजी से क्या है रिश्ता? चंद्र कुमार बोस का संबंध स्वतंत्रता आंदोलन के महान नेता नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परिवार से है। वह नेताजी के परिवार की अगली पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करने वाले चर्चित चेहरों में शामिल हैं और लंबे समय से सुभाष चंद्र बोस की विचारधारा तथा विरासत से जुड़े मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखते रहे हैं। राजनीति में आने के बाद भी उन्होंने नेताजी की राष्ट्रवादी सोच, सामाजिक समानता और धर्मनिरपेक्ष विचारों को अपने राजनीतिक दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है। अब उनका कहना है कि इन्हीं मूल्यों को आधुनिक भारत और नई पीढ़ी की जरूरतों के अनुरूप एक नए राजनीतिक मंच के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। भाजपा से शुरू हुआ था राजनीतिक सफर चंद्र कुमार बोस ने वर्ष 2016 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामा था। पश्चिम बंगाल की राजनीति में भाजपा ने उन्हें प्रमुख चेहरों में से एक के रूप में आगे किया। चंद्र कुमार बोस के मुताबिक, भाजपा में शामिल होने के दौरान नेताजी की विचारधारा को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से ‘आजाद हिंद मोर्चा’ जैसा मंच तैयार करने की बात हुई थी। हालांकि, उनका कहना है कि लंबे इंतजार के बावजूद इस दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई। बाद में उन्होंने भाजपा छोड़ने का फैसला किया और पार्टी में शामिल होने के अपने निर्णय पर भी असंतोष जाहिर किया। TMC में भी ज्यादा लंबी नहीं रही राजनीतिक पारी भाजपा से अलग होने के बाद चंद्र कुमार बोस ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक और राजनीतिक विकल्प चुना और तृणमूल कांग्रेस (TMC) का रुख किया। लेकिन टीएमसी के साथ भी उनका सफर लंबा नहीं चला। पार्टी के अंदर की परिस्थितियों और निजी कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने तृणमूल कांग्रेस से भी अलग होने का फैसला किया। अब भाजपा और टीएमसी दोनों का अनुभव लेने के बाद चंद्र कुमार बोस अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाने की तैयारी में दिखाई दे रहे हैं। क्या होगी ‘आजाद हिंद पार्टी’ की सोच? चंद्र कुमार बोस के मुताबिक, प्रस्तावित आजाद हिंद पार्टी का सबसे बड़ा फोकस देश की युवा आबादी होगी। खासतौर पर Gen-Z को राजनीति और नीति निर्माण की प्रक्रिया में अधिक सक्रिय भागीदारी देने की बात कही जा रही है। उनका मानना है कि आजादी के करीब आठ दशक बाद भारत की नई पीढ़ी शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों को लेकर अधिक मुखर हो रही है। बोस का कहना है कि युवाओं की इस ऊर्जा को केवल विरोध-प्रदर्शन तक सीमित रखने के बजाय उसे एक सकारात्मक और लोकतांत्रिक राजनीतिक दिशा देने की जरूरत है। नेताजी की विचारधारा से प्रेरणा लेने की बात नई पार्टी के नाम में ‘आजाद हिंद’ का इस्तेमाल सीधे तौर पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस और उनकी ऐतिहासिक आजाद हिंद फौज की याद दिलाता है। चंद्र कुमार बोस का कहना है कि प्रस्तावित पार्टी नेताजी के विचारों से प्रेरणा लेते हुए एक समावेशी, धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील राजनीतिक मंच तैयार करने की कोशिश करेगी। उनकी योजना इसे केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित रखने के बजाय राष्ट्रीय स्तर पर युवाओं को जोड़ने वाले राजनीतिक विकल्प के रूप में विकसित करने की है। शिक्षा, स्वास्थ्य और भ्रष्टाचार को बनाया मुद्दा चंद्र कुमार बोस ने मौजूदा व्यवस्था में शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग जैसे क्षेत्रों की स्थिति पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि इन क्षेत्रों में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक समस्याओं के कारण युवाओं में निराशा बढ़ रही है। उनका मानना है कि नई पीढ़ी केवल राजनीतिक नारों से संतुष्ट नहीं है, बल्कि वह रोजगार, बेहतर शिक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही जैसे मुद्दों पर ठोस बदलाव चाहती है। ऐसे में आजाद हिंद पार्टी के जरिए इन्हीं विषयों को राजनीतिक एजेंडे के केंद्र में लाने की कोशिश की जा सकती है। Gen-Z की राजनीति में बढ़ेगी नई प्रतिस्पर्धा? हाल के युवा आंदोलनों के दौरान अभिजीत दीपके और उनकी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का नाम भी चर्चा में आया है। हालांकि, दीपके की पहल को औपचारिक राजनीतिक दल का स्वरूप दिए जाने को लेकर स्थिति अलग बताई गई है। ऐसे समय में चंद्र कुमार बोस की ओर से ‘आजाद हिंद पार्टी’ बनाने की घोषणा युवा मतदाताओं की राजनीति को नया मोड़ दे सकती है। हालांकि, किसी नई पार्टी की वास्तविक राजनीतिक ताकत उसके औपचारिक गठन, संगठन, नेतृत्व टीम, चुनाव आयोग से जुड़ी प्रक्रिया और जमीनी समर्थन के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल चंद्र कुमार बोस की इस पहल ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—क्या नेताजी की राजनीतिक विरासत और Gen-Z की आकांक्षाओं को जोड़कर ‘आजाद हिंद पार्टी’ देश की राजनीति में नया विकल्प बन पाएगी?

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