अयोध्या, 7 नवंबर 2026।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में आयोजित दीपोत्सव 2026 को संबोधित करते हुए वर्ष 2017 से शुरू हुए दीपोत्सव के सफर को याद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शुरुआत में लोगों के मन में सवाल था कि क्या अयोध्या में दीपोत्सव का आयोजन होगा, क्योंकि कुछ लोग इसे यहां की परंपरा का हिस्सा नहीं मानते थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या ने ही दुनिया को दीपावली और दीपोत्सव की परंपरा दी है। उन्होंने इस सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
2017 में शुरू हुआ था दीपोत्सव
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में दीपोत्सव के शुरुआती दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2017 में जब इस आयोजन की शुरुआत हुई थी, तब लोगों को विश्वास नहीं था कि अयोध्या में इतने बड़े स्तर पर दीपोत्सव आयोजित किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने के उद्देश्य से दीपोत्सव को शुरू किया गया था।
वर्ष 2017 में दीपोत्सव के दौरान लगभग 1.71 लाख दीप जलाए गए थे। इसके बाद हर वर्ष आयोजन का विस्तार हुआ। वर्ष 2025 में 26 लाख से अधिक दीप जलाए गए, जबकि 2026 के दसवें संस्करण में 30 लाख से अधिक दीपों का लक्ष्य रखा गया।
लोकतंत्र में वोट की ताकत का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में लोकतंत्र और मतदाता की भूमिका पर भी चर्चा की।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों के वोट की कीमत महत्वपूर्ण होती है। किसी शहर, प्रदेश और देश की तस्वीर किस प्रकार बदल सकती है, यह लोकतंत्र की ताकत से संभव होता है।
मुख्यमंत्री के इस बयान को अयोध्या में पिछले वर्षों के दौरान हुए सांस्कृतिक आयोजन और विकास कार्यों के संदर्भ में देखा जा रहा है। उन्होंने दीपोत्सव की शुरुआत से लेकर वर्तमान स्वरूप तक के सफर का उल्लेख करते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
दसवें दीपोत्सव में लाखों दीपों से जगमगाई रामनगरी
अयोध्या में 7 नवंबर को दसवें दीपोत्सव का आयोजन किया गया। राम की पैड़ी और सरयू नदी के घाटों पर दीपों की रोशनी ने उत्सव को भव्य स्वरूप दिया।
इस आयोजन में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए। सांस्कृतिक कार्यक्रमों, रामायण आधारित प्रस्तुतियों और दीप प्रज्ज्वलन ने आयोजन को विशेष बनाया।
अयोध्या की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास
दीपोत्सव अब केवल धार्मिक आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था से भी जुड़ गया है।
इस आयोजन से कुम्हारों, स्थानीय कलाकारों, हस्तशिल्प से जुड़े लोगों और पर्यटन क्षेत्र को अवसर मिलने की बात भी सामने आई है। उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में दीपोत्सव को जनभागीदारी और सामूहिक आस्था का उत्सव बताया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संबोधन में 2017 से शुरू हुए दीपोत्सव के सफर, अयोध्या की सांस्कृतिक परंपरा और लोकतंत्र में वोट की ताकत का उल्लेख प्रमुख रहा।