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Google के AI फीचर पर मुकदमा, स्कूल Chromebook इस्तेमाल करने वाली 13 वर्षीय छात्रा के मामले ने बढ़ाई चिंता

Google के AI फीचर पर मुकदमा, स्कूल Chromebook इस्तेमाल करने वाली 13 वर्षीय छात्रा के मामले ने बढ़ाई चिंता

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नई दिल्ली, 7 नवंबर 2026। अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी Google को अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) फीचर Gemini और AI Mode को लेकर कानूनी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका में एक 13 वर्षीय छात्रा के माता-पिता ने कंपनी के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। परिवार का आरोप है कि स्कूल में दिए गए Chromebook लैपटॉप पर Google के AI टूल्स के साथ लंबे समय तक बातचीत करने के बाद उनकी बेटी की मानसिक स्वास्थ्य स्थिति गंभीर रूप से बिगड़ गई।

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यह मामला बच्चों के बीच AI चैटबॉट के उपयोग, ऑनलाइन सुरक्षा और स्कूलों में डिजिटल तकनीक की जिम्मेदारी को लेकर नई बहस पैदा कर रहा है। Reuters और अन्य मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, Google ने कहा है कि वह मुकदमे में लगाए गए आरोपों की समीक्षा कर रहा है।

क्या है पूरा मामला?

मुकदमे में छात्रा को Emma नाम से संदर्भित किया गया है। परिवार के अनुसार, छात्रा ने स्कूल द्वारा उपलब्ध कराए गए Chromebook लैपटॉप पर Google Search के AI Mode और Gemini का उपयोग शुरू किया था।

शिकायत में दावा किया गया है कि छात्रा ने AI चैटबॉट के साथ मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तिगत समस्याओं पर हजारों संदेशों का आदान-प्रदान किया। परिवार का आरोप है कि AI बातचीत के दौरान छात्रा को पर्याप्त रूप से वास्तविक सहायता और सुरक्षित संसाधनों की ओर निर्देशित नहीं किया गया।

माता-पिता का कहना है कि AI सेवाओं को स्कूलों के डिजिटल सिस्टम में शामिल करते समय बच्चों और अभिभावकों को संभावित जोखिमों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई।

ये आरोप अभी अदालत में साबित नहीं हुए हैं। मामले में Google की कानूनी जिम्मेदारी का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

Google ने क्या जवाब दिया?

Google के प्रवक्ता José Castañeda ने कहा कि कंपनी युवाओं की सहायता के लिए मेडिकल विशेषज्ञों और अकादमिक विशेषज्ञों के साथ मिलकर सुरक्षा सुविधाएं विकसित करती रही है।

कंपनी के अनुसार, Google Search में मानसिक स्वास्थ्य संकट से संबंधित संकेत मिलने पर उपयोगकर्ताओं को सहायता और विश्वसनीय संसाधनों तक पहुंच उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

Google ने यह भी कहा है कि वह मुकदमे में लगाए गए दावों की समीक्षा कर रहा है।

स्कूलों में AI फीचर को लेकर Google ने बदली नीति

मामले के बीच Google ने स्कूलों के लिए अपने AI टूल्स को लेकर नई व्यवस्था की घोषणा की है। कंपनी के अनुसार, K-12 यानी प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के छात्र खातों में Gemini, Notebook और Search के AI फीचर्स को डिफॉल्ट रूप से बंद रखा जा सकेगा।

स्कूल प्रशासन जरूरत के अनुसार इन सुविधाओं को चालू या बंद कर सकता है। Google ने Guided Learning जैसे फीचर भी पेश किए हैं, जिनका उद्देश्य छात्रों को सीधे उत्तर देने के बजाय चरणबद्ध तरीके से समस्या समझने में मदद करना है।

हालांकि, रिपोर्टों के अनुसार Google Search को चालू रखने पर उसके कुछ AI फीचर्स भी साथ में उपलब्ध हो सकते हैं। इसी व्यवस्था को लेकर शिक्षा विशेषज्ञों और अभिभावकों ने सवाल उठाए हैं।

बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर नई बहस

AI चैटबॉट अब शिक्षा, होमवर्क, भाषा सीखने और व्यक्तिगत सवालों के जवाब देने में तेजी से इस्तेमाल किए जा रहे हैं। लेकिन बच्चों के लिए इन तकनीकों का उपयोग करते समय अतिरिक्त सुरक्षा की आवश्यकता होती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, AI सिस्टम को मानसिक स्वास्थ्य संकट के संकेतों को पहचानने, अनुचित बातचीत को रोकने और जरूरत पड़ने पर वास्तविक सहायता की ओर निर्देशित करने में सक्षम होना चाहिए।

स्कूलों को भी AI टूल्स के उपयोग के लिए स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। इसमें अभिभावकों की जानकारी, छात्र डेटा की सुरक्षा, निगरानी व्यवस्था और आपातकालीन सहायता जैसे पहलुओं को शामिल किया जाना चाहिए।

भारत के स्कूलों के लिए भी महत्वपूर्ण मामला

भारत में भी स्कूलों, शिक्षकों और छात्रों के बीच AI आधारित टूल्स का इस्तेमाल बढ़ रहा है। ऐसे में यह मामला भारतीय शिक्षा संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण सबक हो सकता है।

डिजिटल शिक्षा के साथ बच्चों की सुरक्षा, डेटा गोपनीयता और AI के जिम्मेदार उपयोग को प्राथमिकता देना आवश्यक है।

निष्कर्ष: Google के खिलाफ दायर मुकदमा AI तकनीक के तेजी से विस्तार के बीच बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाता है। मामला अभी कानूनी प्रक्रिया में है, लेकिन यह स्पष्ट करता है कि स्कूलों में AI तकनीक लागू करते समय सुरक्षा, पारदर्शिता और अभिभावकों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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