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दीपिंदर गोयल के ₹85,000 के AI हेल्थ डिवाइस ‘Temple’ पर विवाद, डॉक्टरों ने वैज्ञानिक प्रमाणों पर उठाए सवाल

दीपिंदर गोयल के ₹85,000 के AI हेल्थ डिवाइस ‘Temple’ पर विवाद, डॉक्टरों ने वैज्ञानिक प्रमाणों पर उठाए सवाल

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नई दिल्ली, 7 नवंबर 2026। Zomato के संस्थापक दीपिंदर गोयल का नया हेल्थ टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट ‘Temple’ इन दिनों चर्चा में है। लगभग 85 हजार रुपये की कीमत वाले इस वियरेबल डिवाइस को लेकर मेडिकल विशेषज्ञों और टेक्नोलॉजी जगत के बीच बहस तेज हो गई है। गोयल ने डिवाइस की वैज्ञानिक क्षमता का बचाव किया है, जबकि कई डॉक्टरों ने इसके दावों को लेकर स्वतंत्र वैज्ञानिक प्रमाणों की मांग की है।

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Temple को गोयल की हेल्थ और लॉन्गेविटी कंपनी Continue Research ने विकसित किया है। यह डिवाइस माथे के पास लगाया जाता है और ऑप्टिकल सेंसर के जरिए शरीर के कुछ शारीरिक संकेतों को ट्रैक करने का दावा करता है।

क्या है Temple वियरेबल डिवाइस?

Temple एक छोटा, माथे के पास लगाया जाने वाला वियरेबल डिवाइस है। कंपनी के अनुसार, इसका उद्देश्य शरीर के कुछ महत्वपूर्ण संकेतों की निगरानी करना है।

यह डिवाइस पारंपरिक स्मार्टवॉच से अलग है। कंपनी इसके माध्यम से हार्ट रेट, HRV, नींद और VO2 Max जैसे संकेतों के साथ BrainFlow और Entropy जैसे विशेष मेट्रिक्स पर भी काम कर रही है।

कंपनी का दावा है कि इससे उपयोगकर्ताओं को अपनी शारीरिक स्थिति, तनाव, रिकवरी और अन्य स्वास्थ्य संकेतों को समझने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि किसी डिवाइस द्वारा सेंसर डेटा प्राप्त करना और उस डेटा से स्वास्थ्य संबंधी निष्कर्ष निकालना दो अलग-अलग बातें हैं।

₹85,000 कीमत और प्री-ऑर्डर

Temple के लिए भारत में 1 नवंबर 2026 से प्री-ऑर्डर शुरू किए गए हैं। इसकी कीमत लगभग 85,000 रुपये बताई गई है। कंपनी के अनुसार, डिवाइस की डिलीवरी में लगभग तीन महीने का समय लग सकता है।

डिवाइस को मेडिकल डायग्नोस्टिक उपकरण के बजाय वेलनेस और रिसर्च डिवाइस के रूप में पेश किया गया है।

कंपनी ने 14 दिन की नो-क्वेश्चन-आस्क्ड रिटर्न पॉलिसी का भी उल्लेख किया है।

डॉक्टरों ने वैज्ञानिक प्रमाणों पर उठाए सवाल

कई मेडिकल विशेषज्ञों ने Temple के BrainFlow और Entropy जैसे मेट्रिक्स की वैज्ञानिक वैधता को लेकर सवाल उठाए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि माथे के पास मौजूद सतही रक्त वाहिकाओं से प्राप्त संकेतों के आधार पर पूरे मस्तिष्क में रक्त प्रवाह का सटीक आकलन करना आसान नहीं है।

डॉक्टरों ने यह भी कहा है कि किसी नए स्वास्थ्य मेट्रिक को विश्वसनीय मानने के लिए उसकी स्वतंत्र जांच, वैज्ञानिक अध्ययन और Peer-Reviewed Research आवश्यक है।

विशेषज्ञों के अनुसार, केवल किसी सेंसर का व्यायाम या तनाव के दौरान संकेतों में बदलाव दर्ज करना यह साबित नहीं करता कि वह मस्तिष्क की रक्त आपूर्ति या उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को सटीक रूप से माप रहा है।

दीपिंदर गोयल ने क्या कहा?

5 नवंबर को दीपिंदर गोयल ने डॉक्टरों की आलोचना के जवाब में सोशल मीडिया पर एक विस्तृत संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि Temple के विकास में लगभग 30 मिलियन डॉलर खर्च किए गए हैं, जिसमें से 20 मिलियन डॉलर उनकी व्यक्तिगत निवेश राशि है।

गोयल ने डिवाइस के वैज्ञानिक आधार का बचाव करते हुए कहा कि कंपनी अपने शोध और तकनीक पर भरोसा करती है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में प्री-प्रिंट और स्वतंत्र अध्ययन उपलब्ध होंगे।

6 नवंबर को गोयल ने भारतीय डॉक्टरों के बारे में सामान्यीकृत टिप्पणी करने पर माफी मांगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी आलोचना सभी डॉक्टरों के लिए नहीं थी, बल्कि कुछ सोशल मीडिया पर सक्रिय डॉक्टरों के संदर्भ में थी।

AI और हेल्थ टेक्नोलॉजी का भविष्य

Temple का मामला दिखाता है कि AI, वियरेबल टेक्नोलॉजी और हेल्थ मॉनिटरिंग के क्षेत्र में तेजी से नए प्रयोग हो रहे हैं।

भविष्य में ऐसे उपकरण लोगों को अपनी शारीरिक गतिविधियों और स्वास्थ्य संकेतों को बेहतर समझने में सहायता कर सकते हैं। लेकिन स्वास्थ्य संबंधी दावों के लिए वैज्ञानिक प्रमाण और स्वतंत्र सत्यापन बेहद महत्वपूर्ण हैं।

उपयोगकर्ताओं को ऐसे डिवाइस खरीदते समय यह समझना चाहिए कि वेलनेस ट्रैकर और मेडिकल डायग्नोस्टिक उपकरण समान नहीं होते। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के निदान या उपचार के लिए केवल वियरेबल डिवाइस पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

निष्कर्ष: दीपिंदर गोयल का Temple वियरेबल हेल्थ टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक नया प्रयोग है। इसकी तकनीक और वैज्ञानिक दावों को लेकर बहस जारी है। स्वतंत्र शोध और वैज्ञानिक सत्यापन सामने आने के बाद ही इसकी वास्तविक उपयोगिता का बेहतर आकलन किया जा सकेगा।

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