पटना, 7 नवंबर 2026।
बिहार के शिक्षा विभाग में वेतन, मकान किराया भत्ता (HRA) और बकाया राशि के भुगतान से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है। विभाग के आंतरिक ऑडिट में राज्य के सभी 38 जिलों में 7,202 मामलों में निर्धारित राशि से अधिक भुगतान और निकासी का खुलासा हुआ है। इन मामलों में कुल करीब 35.27 करोड़ रुपये की राशि शामिल बताई गई है।
द इंडियन एक्सप्रेस की 7 नवंबर 2026 को रात 8 बजे प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा विभाग ने इस मामले में अधिकांश राशि की वसूली कर ली है, जबकि शेष रकम की वसूली अभी बाकी है। विभाग ने सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
HRMS पोर्टल के माध्यम से हुई कथित अनियमितता
शिक्षा विभाग के अनुसार, वेतन और भत्तों के भुगतान के लिए इस्तेमाल होने वाले ऑनलाइन मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (HRMS) में कथित तौर पर छेड़छाड़ कर निर्धारित सीमा से अधिक राशि निकाली गई।
ऑडिट में वेतन, मकान किराया भत्ता और बकाया भुगतान के मद में कई मामलों में अधिक राशि निकाले जाने की बात सामने आई है। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, भुगतान प्रक्रिया में शामिल कर्मचारियों के स्तर पर कथित मिलीभगत और वित्तीय नियंत्रण में कमी के कारण यह अनियमितता हुई।
HRMS प्रणाली में भुगतान की प्रक्रिया के दौरान तीन स्तरों पर जांच और अनुमोदन की व्यवस्था होती है। इसमें भुगतान तैयार करने वाला अधिकारी, जांच करने वाला अधिकारी और अंतिम स्वीकृति देने वाला अधिकारी शामिल होते हैं।
ऑडिट में 33 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली
विभागीय ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, कुल 35,27,49,333 रुपये की कथित अतिरिक्त निकासी की पहचान की गई। इसमें से 33,02,36,12 रुपये की वसूली की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है। शेष लगभग 2.24 करोड़ रुपये की राशि अभी बकाया बताई गई है।
यह जांच अक्टूबर महीने में कुछ प्रारंभिक मामलों के सामने आने के बाद शुरू हुई थी। भागलपुर, नवादा और पटना में नमूना जांच के दौरान अधिक भुगतान के मामले सामने आए। इसके बाद विभाग ने राज्यव्यापी ऑडिट कराने का निर्णय लिया।
गोपालगंज और गया में सबसे अधिक मामले
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, अधिक मामलों वाले जिलों में गोपालगंज में 783, गया में 628, पश्चिम चंपारण में 551, पटना में 312, बक्सर में 260 और रोहतास में 247 मामले दर्ज किए गए।
मुजफ्फरपुर में 238 तथा पूर्वी चंपारण में 214 मामलों की पहचान की गई है। इससे स्पष्ट होता है कि यह मामला किसी एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्यव्यापी स्तर पर सामने आया है।
सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को नोटिस
शिक्षा विभाग के निदेशक प्रशासन विजय कुमार पांडेय ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अधिकारियों से सात दिनों के भीतर बिंदुवार जवाब और संबंधित साक्ष्य उपलब्ध कराने को कहा गया है।
विभाग ने इस मामले में प्रशासनिक निगरानी की कमी को गंभीर माना है। नोटिस में जवाब नहीं देने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना भी जताई गई है। <Cite refs={["turn200742view0"]}/>
सरकारी भुगतान व्यवस्था पर उठे सवाल
शिक्षा विभाग में सामने आया यह मामला सरकारी भुगतान प्रणाली की निगरानी और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है। HRMS जैसी डिजिटल प्रणाली के माध्यम से भुगतान किए जाने के बावजूद इतनी बड़ी राशि के कथित अतिरिक्त भुगतान का सामने आना जांच का विषय है।
विभागीय जांच और वसूली की प्रक्रिया के बाद यह स्पष्ट होगा कि अनियमितताओं में किन कर्मचारियों और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होती है। फिलहाल मामला विभागीय जांच के अधीन है।