पूर्णिया/कटिहार/अररिया/किशनगंज: सीमांचल के चार जिलों में संदिग्ध और फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर परिवहन विभाग और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज में ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया की निगरानी बढ़ाई जा रही है। विभाग को ऐसी जानकारी मिली है कि कुछ संदिग्ध लोगों द्वारा स्थानीय स्तर पर पहचान स्थापित करने के लिए फर्जी या संदिग्ध दस्तावेजों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
इस मामले में परिवहन विभाग अब ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने से पहले दस्तावेजों की कई स्तरों पर जांच कर रहा है। वाहन जांच के दौरान भी लाइसेंस का तत्काल ऑनलाइन सत्यापन करने पर जोर दिया जा रहा है।
सीमांचल में क्यों बढ़ी सतर्कता?
पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज का क्षेत्र भौगोलिक रूप से संवेदनशील माना जाता है। यह इलाका नेपाल और पश्चिम बंगाल की सीमाओं के करीब है। ऐसे में पहचान से जुड़े दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा सुरक्षा और प्रशासन दोनों के लिए गंभीर विषय बन सकता है।
हालिया जांच और सुरक्षा संबंधी गतिविधियों के दौरान संदिग्ध पहचान दस्तावेजों के इस्तेमाल की आशंका सामने आने के बाद परिवहन विभाग ने ड्राइविंग लाइसेंस की जांच को लेकर सख्ती बढ़ाई है।
हालांकि किसी व्यक्ति का ड्राइविंग लाइसेंस संदिग्ध पाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि वह व्यक्ति अवैध रूप से रह रहा है या किसी अपराध में शामिल है। अंतिम निष्कर्ष दस्तावेजों की जांच और संबंधित प्रशासनिक या कानूनी प्रक्रिया के बाद ही निकाला जा सकता है।
पुराने लाइसेंस को स्कैन कर बनाने की कोशिश
परिवहन विभाग को ऐसी सूचना मिली है कि एक गिरोह पुराने या किसी दूसरे व्यक्ति के वैध ड्राइविंग लाइसेंस को स्कैन करके उसके विवरण में डिजिटल बदलाव कर नया फर्जी रूप तैयार कर सकता है।
इस तरह के फर्जीवाड़े में किसी वास्तविक दस्तावेज की तस्वीर या जानकारी का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ दस्तावेजों की छेड़छाड़ की ऐसी कोशिशें प्रशासन के लिए नई चुनौती बन रही हैं।
इसी वजह से केवल कागजी दस्तावेज देखकर लाइसेंस की पुष्टि करने के बजाय ऑनलाइन सिस्टम से उसका सत्यापन करने पर जोर दिया जा रहा है।
M-Parivahan और Sarathi से होगा लाइव वेरिफिकेशन
वाहन जांच के दौरान लाइसेंस की वास्तविक स्थिति पता लगाने के लिए M-Parivahan ऐप और Sarathi पोर्टल के माध्यम से लाइव वेरिफिकेशन किया जा रहा है।
इस व्यवस्था के तहत अधिकारी यह जांच सकते हैं कि वाहन चालक का लाइसेंस सिस्टम में दर्ज है या नहीं और उपलब्ध जानकारी दस्तावेज से मेल खाती है या नहीं।
लाइव वेरिफिकेशन का फायदा यह है कि केवल कागज पर मौजूद दस्तावेज के आधार पर निर्णय लेने के बजाय सरकारी डिजिटल रिकॉर्ड से जानकारी मिलाई जा सकती है।
परिवहन विभाग का कहना है कि लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में भी अब अधिक सावधानी बरती जा रही है।
सीमांचल के चारों जिलों में निगरानी
इस जांच का असर पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज चारों जिलों पर पड़ रहा है।
इन जिलों में बड़ी संख्या में लोग रोजाना निजी और व्यावसायिक वाहनों से यात्रा करते हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में वाहन आवाजाही भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में परिवहन विभाग के लिए यह जरूरी है कि वास्तविक वाहन चालकों को अनावश्यक परेशानी न हो और फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल करने वालों की पहचान की जा सके।
इसके लिए दस्तावेजों की जांच, ऑनलाइन रिकॉर्ड का मिलान और संदिग्ध मामलों में अतिरिक्त सत्यापन जैसे कदम महत्वपूर्ण होंगे।
आम वाहन चालकों के लिए क्या जरूरी?
यदि किसी व्यक्ति के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस है तो उसे अपने लाइसेंस और संबंधित दस्तावेजों की जानकारी सही रखने पर ध्यान देना चाहिए।
लाइसेंस बनवाते समय किसी अनधिकृत एजेंट या बिचौलिए के माध्यम से गलत दस्तावेज का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति के दस्तावेज में नाम, पता या दूसरी जानकारी में गलती है तो उसे आधिकारिक प्रक्रिया के माध्यम से सुधार कराना अधिक सुरक्षित है।
ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी किसी भी जानकारी का सत्यापन सरकारी डिजिटल माध्यम से किया जा सकता है।
फर्जी लाइसेंस का असर सिर्फ परिवहन व्यवस्था तक सीमित नहीं
ड्राइविंग लाइसेंस केवल वाहन चलाने की अनुमति का दस्तावेज नहीं है। यह एक महत्वपूर्ण पहचान संबंधी दस्तावेज के रूप में भी इस्तेमाल होता है।
अगर फर्जी लाइसेंस बनाकर किसी व्यक्ति की पहचान स्थापित करने की कोशिश की जाती है तो इसका असर परिवहन व्यवस्था के अलावा दूसरे प्रशासनिक क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है।
इसी कारण सीमांचल जैसे संवेदनशील क्षेत्र में दस्तावेजों की विश्वसनीयता बनाए रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण है।
हालांकि जांच के दौरान यह भी जरूरी है कि वास्तविक नागरिकों के वैध दस्तावेजों को केवल संदेह के आधार पर गलत न माना जाए। किसी भी कार्रवाई से पहले रिकॉर्ड का सही सत्यापन और निर्धारित प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।
परिवहन विभाग के सामने दोहरी चुनौती
एक तरफ विभाग को फर्जी दस्तावेजों पर रोक लगानी है, वहीं दूसरी तरफ वास्तविक आवेदकों के लिए लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से जटिल नहीं बनाना है।
डिजिटल सिस्टम इस चुनौती को कम करने में मदद कर सकता है। यदि आवेदन के समय ही दस्तावेजों और पहचान का बेहतर डिजिटल सत्यापन हो जाए तो बाद में फर्जी लाइसेंस की संभावना कम की जा सकती है।
वाहन जांच के दौरान भी डिजिटल सत्यापन से अधिकारियों को तुरंत जानकारी मिल सकती है।
आगे और बढ़ सकती है जांच
फिलहाल सीमांचल के चार जिलों में संदिग्ध ड्राइविंग लाइसेंस और डिजिटल फर्जीवाड़े को लेकर निगरानी बढ़ाई गई है। मुख्यालय स्तर से भी इस मामले की समीक्षा की जा रही है।
आने वाले दिनों में जांच के दौरान यदि किसी बड़े नेटवर्क या फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह की जानकारी सामने आती है तो कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है।
सीमांचल में पहचान और दस्तावेजों से जुड़े किसी भी फर्जीवाड़े को रोकना प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि जांच पूरी तरह दस्तावेजी प्रमाण और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर हो।
अब नजर इस बात पर है कि पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज में चल रही जांच से कितने संदिग्ध लाइसेंस सामने आते हैं और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले किसी नेटवर्क की पहचान होती है या नहीं।
क्या आपके जिले में भी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने या वाहन जांच के दौरान दस्तावेजों की जांच पहले से ज्यादा सख्त हुई है? अपने क्षेत्र की स्थिति कमेंट में बताइए।












