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बिहार में विश्व का सबसे विशाल सहस्त्रलिंगम शिवलिंग स्थापित होने जा रहा है, जिसे लेकर पूरे राज्य और देशभर के श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।

बिहार में विश्व का सबसे विशाल सहस्त्रलिंगम शिवलिंग स्थापित होने जा रहा है, जिसे लेकर पूरे राज्य और देशभर के श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। बिहार में विश्व का सबसे विशाल सहस्त्रलिंगम शिवलिंग, 17 जनवरी को विराट रामायण मंदिर में होगी ऐतिहासिक स्थापना बिहार में विश्व का सबसे विशाल सहस्त्

बिहार में विश्व का सबसे विशाल सहस्त्रलिंगम शिवलिंग स्थापित होने जा रहा है, जिसे लेकर पूरे राज्य और देशभर के श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।

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बिहार में विश्व का सबसे विशाल सहस्त्रलिंगम शिवलिंग स्थापित होने जा रहा है, जिसे लेकर पूरे राज्य और देशभर के श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। बिहार में विश्व का सबसे विशाल सहस्त्रलिंगम शिवलिंग, 17 जनवरी को विराट रामायण मंदिर में होगी ऐतिहासिक स्थापना बिहार में विश्व का सबसे विशाल सहस्त्रलिंगम शिवलिंग स्थापित होने जा रहा है, जिसे लेकर पूरे राज्य के साथ-साथ देशभर के श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। यह विशाल शिवलिंग 33 फीट ऊंचा और लगभग 210 मीट्रिक टन वजनी है, जो आकार, भव्यता और धार्मिक महत्व—तीनों ही दृष्टि से विश्व रिकॉर्ड बनाने जा रहा है। इस ऐतिहासिक शिवलिंग की स्थापना 17 जनवरी को पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया प्रखंड स्थित विराट रामायण मंदिर परिसर में की जाएगी। गोपालगंज से शुरू हुई पावन यात्रा इस भव्य सहस्त्रलिंगम शिवलिंग की यात्रा बिहार के गोपालगंज से शुरू हुई है। रास्ते में खजुरिया, हुसैनी सहित कई प्रमुख स्थानों पर श्रद्धालुओं ने फूल-मालाओं, पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन के साथ इसका भव्य स्वागत किया। शिवलिंग को विशेष ट्रेलर के माध्यम से लाया जा रहा है और इसकी सुरक्षा व व्यवस्था के लिए प्रशासन की ओर से विशेष इंतजाम किए गए हैं। 45 दिनों की लंबी यात्रा के बाद यह शिवलिंग बिहार पहुंचा है। 17 जनवरी की तिथि का विशेष धार्मिक महत्व शिवलिंग की स्थापना के लिए 17 जनवरी की तिथि को बेहद शुभ और विशेष माना गया है। यह दिन माघ कृष्ण चतुर्दशी का है, जिसे भगवान शिव के लिंग रूप की उत्पत्ति से जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन शिवलिंग पूजा की परंपरा की शुरुआत हुई थी। यही कारण है कि इस तिथि को शिवरात्रि के समान पुण्यदायी माना जाता है। ईशान संहिता सहित कई धार्मिक ग्रंथों में इस तिथि का विशेष उल्लेख मिलता है। पांच तीर्थों के पवित्र जल से होगा अभिषेक स्थापना के दिन शिवलिंग का अभिषेक देश के पांच प्रमुख तीर्थ स्थलों से लाए गए पवित्र जल से किया जाएगा। इनमें कैलाश मानसरोवर, गंगोत्री, हरिद्वार, प्रयागराज और सोनपुर शामिल हैं। इन सभी तीर्थों के जल से सहस्त्रलिंगम शिवलिंग का अभिषेक किया जाएगा। इसके अलावा स्थापना समारोह के दौरान हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा की भी योजना है, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक और दिव्य बन जाएगा। सहस्त्रलिंगम शिवलिंग का अद्वितीय स्वरूप महावीर स्थान न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल के अनुसार यह शिवलिंग सहस्त्रलिंगम स्वरूप में निर्मित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस शिवलिंग पर जल अर्पित करने से 108 शिवलिंगों पर जल चढ़ाने के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। इस शिवलिंग को तैयार करने में लगभग 10 वर्षों का समय लगा है। इसका निर्माण विशेष ब्लैक ग्रेनाइट स्टोन से किया गया है, जिससे इसकी मजबूती और भव्यता और बढ़ जाती है। प्राण प्रतिष्ठा बाद में, मंदिर निर्माण जारी हालांकि 17 जनवरी को शिवलिंग की स्थापना की जाएगी, लेकिन इसकी प्राण प्रतिष्ठा मंदिर निर्माण पूर्ण होने के बाद ही की जाएगी। फिलहाल श्रद्धालु शिवलिंग की पूजा-अर्चना कर सकेंगे। मंदिर निर्माण के अंतर्गत अभी सिविल कंस्ट्रक्शन, शिखर निर्माण, पेंटिंग और स्टोन क्लैडिंग जैसे कार्य शेष हैं। न्यास समिति का लक्ष्य है कि 2030 तक मंदिर को पूरी तरह श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाए। नंदी महाराज की प्रतिमा और मूर्तिकार अरुण योगीराज शिवलिंग स्थापना के बाद मंदिर परिसर में नंदी महाराज की विशाल प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी, जो ब्लैक ग्रेनाइट स्टोन से बनाई जाएगी। इसके अलावा अयोध्या राम मंदिर में रामलला की मूर्ति बनाने वाले प्रसिद्ध मूर्तिकार अरुण योगीराज से भी संपर्क किया गया है। योजना है कि मंदिर की मुख्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं उन्हीं से बनवाई जाएं, जिससे मंदिर की भव्यता और कलात्मक स्तर और ऊंचा हो सके। वेद मंत्रों और यज्ञ के साथ होगी स्थापना स्थापना के दिन भव्य यज्ञ का आयोजन किया जाएगा, जिसमें चारों वेदों के विद्वान पंडित शामिल होंगे। पंडित भावनाथ झा के अनुसार सुबह 8:30 बजे पूजा शुरू होगी और दोपहर 1:00 बजे तक शिवलिंग की स्थापना पूरी कर ली जाएगी , क्योंकि ढलते सूर्य में मूर्ति स्थापना को वर्जित माना जाता है। पूजा के बाद विशाल भंडारे और प्रसाद वितरण का आयोजन भी किया जाएगा। बिहार के लिए ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लगभग 1000 वर्षों बाद सहस्त्रलिंगम शिवलिंग की स्थापना हो रही है। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से भी बिहार के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है। माना जा रहा है कि भविष्य में यह स्थल देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आस्था केंद्र बनेगा।

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