छात्र नेता उमर ख़ालिद को मिली ज़मानत
नई दिल्ली: दिल्ली दंगे के दौरान दिल्ली के खजूरी खास क्षेत्र में हुई हिंसा के मामले में गुरुवार को दिल्ली के कड़कड़डूमा स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव की कोर्ट ने आरोपित जवाहर लाल नेहरू विश्विद्यालय के पूर्व छात्र उमर खालिद को जमानत दे दी. बता दें कि बीते वर्ष दिसंबर में पूरक आरोपपत्र दायर कर दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद को इस मामले में आरोपित बनाया था. दंगे से जुड़े मामले में उमर खालिद को पहली बार जमानत मिली है.
खजूरी खास क्षेत्र में दंगाइयों ने गत वर्ष 24 फरवरी को उपद्रव किया था. वहां पार्किंग में आग लगा दी गई थी. बीट कांस्टेबल संग्राम सिंह ने इस मामले में खजूरी खास थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी. जिसमें उन्होंने बताया था कि वह प्रदीप की पार्किंग में अपनी मोटरसाइकिल खड़ी करके चांद बाग पुलिया पर ड्यूटी कर रहे थे. तभी शेरपुर चौक की ओर जाने वाले रास्ते और आसपास की गलियों से भीड़ इकट्ठा होना शुरू हो गई थी. उन लोगों ने पथराव किया और सार्वजनिक संपत्ति को आग लगाना शुरू कर दिया. समझाने और रोकने का प्रयास करने के बावजूद उपद्रवी नहीं माने. वह किसी तरह जान बचाकर प्रदीप की पार्किंग में घुस गए और शटर बंद कर दिया. उपद्रवियों ने पार्किंग का शटर तोड़ कर उसमें आग लगा दी.
इस घटना में शिकायतकर्ता कांस्टेबल की मोटरसाइकिल जल गई थी. शुरुआती एफआइआर में इस मामले में मुख्य आरोपित एवं आप के पार्षद रहे ताहिर हुसैन समेत 15 लोगों को आरोपित बनाया गया था. पिछले वर्ष दिसंबर में दिल्ली पुलिस ने इस मामले में 100 पन्नों का पूरक आरोपपत्र दायर था. जिसमें जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद को भी आरोपित बनाया गया था. पूरक आरोपपत्र में पुलिस ने दावा किया था कि उमर ने दंगे भड़ाने के लिए ‘आग में घी’ का काम किया. गत वर्ष आठ जनवरी को उसने शाहीनबाग में ताहिर हुसैन और खालिद सैफी के साथ मिलकर साजिश रचने के लिए बैठक की थी.



