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भारतीय तटरक्षक बल को मिली नई ताकत! बेड़े में शामिल हुआ स्वदेशी होवरक्राफ्ट, जानें इसकी खूबियां

इंडियन कोस्ट गार्ड के बेड़े में शामिल हुआ ‘होवरक्राफ्ट’, जानें क्या हैं इसकी खासियतें समुद्र से लेकर दलदली जमीन तक... अब हर चुनौती का जवाब होगा नया स्वदेशी…

भारतीय तटरक्षक बल को मिली नई ताकत! बेड़े में शामिल हुआ स्वदेशी होवरक्राफ्ट, जानें इसकी खूबियां

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इंडियन कोस्ट गार्ड के बेड़े में शामिल हुआ ‘होवरक्राफ्ट’, जानें क्या हैं इसकी खासियतें समुद्र से लेकर दलदली जमीन तक... अब हर चुनौती का जवाब होगा नया स्वदेशी होवरक्राफ्ट! भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) की ताकत में बड़ा इजाफा हुआ है। गोवा में निर्मित पहला स्वदेशी एयर कुशन वाहन (Air Cushion Vehicle - ACV) होवरक्राफ्ट आधिकारिक तौर पर इंडियन कोस्ट गार्ड के बेड़े में शामिल कर लिया गया है। यह कदम सिर्फ समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नहीं, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई ऊंचाई देने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है। 18 जून 2026 को गोवा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इस अत्याधुनिक होवरक्राफ्ट को सेवा में शामिल किया गया। खास बात यह है कि इसे भारतीय जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन और विकसित किया गया है। आखिर क्या होता है होवरक्राफ्ट? होवरक्राफ्ट एक ऐसा वाहन होता है जो हवा के कुशन (Air Cushion) पर चलता है। यह पानी, दलदल, रेतीले तट और उथले इलाकों में भी आसानी से गति कर सकता है। यही वजह है कि जहां पारंपरिक जहाज नहीं पहुंच पाते, वहां होवरक्राफ्ट आसानी से ऑपरेशन कर सकता है। स्वदेशी तकनीक से तैयार हुआ नया ACV भारतीय रक्षा मंत्रालय ने करीब 387.44 करोड़ रुपये की लागत से छह स्वदेशी होवरक्राफ्ट बनाने का अनुबंध किया था। इनका निर्माण गोवा स्थित चौगुले एंड कंपनी शिपयार्ड में किया जा रहा है। ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत इनमें लगभग 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री और तकनीक का उपयोग किया गया है। यह भारत के रक्षा निर्माण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। किन मिशनों में होगा सबसे ज्यादा उपयोग? नया होवरक्राफ्ट इंडियन कोस्ट गार्ड के लिए कई महत्वपूर्ण अभियानों में गेम चेंजर साबित हो सकता है। इसका इस्तेमाल किया जाएगा: समुद्री गश्त (Maritime Patrol) खोज और बचाव अभियान (Search & Rescue) तटीय निगरानी घुसपैठ विरोधी ऑपरेशन आपदा राहत कार्य मानवीय सहायता मिशन विशेषज्ञों का मानना है कि यह वाहन समुद्र और तटीय इलाकों में तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता को काफी बढ़ा देगा। हर मौसम में करेगा काम इस होवरक्राफ्ट की सबसे बड़ी ताकत इसकी बहुउपयोगी क्षमता है। यह: ✔ तेज गति से चल सकता है ✔ उथले पानी में ऑपरेट कर सकता है ✔ दलदली क्षेत्रों में पहुंच सकता है ✔ कठिन मौसम में भी मिशन पूरा कर सकता है यही वजह है कि इसे भारतीय समुद्री सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 7,500 किलोमीटर लंबे तट की सुरक्षा में मदद भारत की समुद्री सीमा करीब 7,500 किलोमीटर लंबी है। इतने विशाल तटीय क्षेत्र की निगरानी हमेशा चुनौतीपूर्ण रही है। नया होवरक्राफ्ट ऐसे इलाकों में भी पहुंच सकता है जहां सामान्य गश्ती जहाज नहीं पहुंच पाते। इससे तटीय सुरक्षा नेटवर्क और मजबूत होगा। रक्षा विशेषज्ञ इसे “फोर्स मल्टीप्लायर” मान रहे हैं, यानी ऐसा संसाधन जो सुरक्षा बलों की क्षमता को कई गुना बढ़ा देता है। विदेशी डिजाइन, भारतीय जरूरतों के अनुसार निर्माण इस होवरक्राफ्ट का डिजाइन ब्रिटेन की प्रसिद्ध कंपनी Griffon Hoverwork के प्लेटफॉर्म पर आधारित है। हालांकि भारतीय समुद्री परिस्थितियों और तटीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इसमें कई बदलाव किए गए हैं। यही कारण है कि यह भारतीय कोस्ट गार्ड के ऑपरेशनल वातावरण के लिए बेहतर तरीके से अनुकूलित है। बाकी होवरक्राफ्ट पर भी तेजी से काम रक्षा मंत्रालय के अनुसार चौथा, पांचवां और छठा ACV होवरक्राफ्ट भी निर्माणाधीन हैं और उन पर तेजी से काम किया जा रहा है। इनके शामिल होने के बाद भारतीय तटरक्षक बल की परिचालन क्षमता और अधिक मजबूत हो जाएगी। निष्कर्ष इंडियन कोस्ट गार्ड के बेड़े में शामिल हुआ ‘होवरक्राफ्ट’, जानें क्या हैं इसकी खासियतें — यह सिर्फ एक नया वाहन नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती रक्षा आत्मनिर्भरता और समुद्री सुरक्षा की नई पहचान है। तेज गति, हर मौसम में काम करने की क्षमता और कठिन इलाकों तक पहुंचने की ताकत इसे भारतीय तटरक्षक बल के लिए बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। आने वाले वर्षों में यह होवरक्राफ्ट समुद्री सुरक्षा, बचाव अभियानों और तटीय निगरानी में बड़ी भूमिका निभाने वाला है।

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