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आसियान शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी वर्चुअली होंगे शामिल, मलेशियाई पीएम ने फैसले का सम्मान किया

Published: 23/10/2025, 11:15:39 am18 viewsSeemanchal Live

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बार मलेशिया के कुआलालंपुर में होने वाले 47वें आसियान शिखर सम्मेलन (ASEAN Summit) में वर्चुअल मोड से भाग लेंगे । समय-संबंधी बाधाओं के कारण वे प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं हो पाएंगे। मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने इस फैसले का सम्मान करते हुए इसे उचित बताय

आसियान शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी वर्चुअली होंगे शामिल, मलेशियाई पीएम ने फैसले का सम्मान किया
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बार मलेशिया के कुआलालंपुर में होने वाले 47वें आसियान शिखर सम्मेलन (ASEAN Summit) में वर्चुअल मोड से भाग लेंगे । समय-संबंधी बाधाओं के कारण वे प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं हो पाएंगे। मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने इस फैसले का सम्मान करते हुए इसे उचित बताया और कहा कि भारत और मलेशिया के बीच रणनीतिक साझेदारी अब पहले से कहीं अधिक मजबूत है। 47वां आसियान शिखर सम्मेलन: कब और कहाँ स्थान: कुआलालंपुर, मलेशिया तारीख: 26 से 28 अक्टूबर 2025 मेज़बान: प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम थीम: “Strengthening Regional Cooperation for a Resilient Future” यह सम्मेलन बदलते वैश्विक परिदृश्य — खासकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते सामरिक तनावों — के बीच आयोजित हो रहा है। पीएम मोदी की भागीदारी: वर्चुअल माध्यम से उपस्थिति विदेश मंत्रालय (MEA) ने पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए आसियान और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन (EAS) में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह पहली बार नहीं है जब प्रधानमंत्री ने किसी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में वर्चुअल रूप से भाग लिया हो। 2020 और 2021 में हुए ईएएस सम्मेलन भी उन्होंने ऑनलाइन मोड में अटेंड किए थे । मलेशियाई पीएम अनवर इब्राहिम ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा: “मुझे अपने मित्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोन आया। हमने मलेशिया-भारत संबंधों को और अधिक रणनीतिक व व्यापक स्तर पर ले जाने के प्रयासों पर चर्चा की। उनके वर्चुअल रूप से जुड़ने के निर्णय का हम सम्मान करते हैं।” भारत-आसियान संबंधों का इतिहास और महत्व भारत और आसियान (Association of Southeast Asian Nations) के बीच संबंध 1992 में औपचारिक रूप से शुरू हुए थे, जब भारत को Sectoral Dialogue Partner का दर्जा मिला था। इसके बाद यह संबंध 1995 में Full Dialogue Partnership , 2002 में Summit-Level Partnership और 2012 में Strategic Partnership के स्तर तक पहुँच गया। आसियान के 10 सदस्य देश: इंडोनेशिया मलेशिया सिंगापुर थाईलैंड फिलीपींस वियतनाम म्यांमार लाओस ब्रुनेई कंबोडिया भारत इन सभी देशों के साथ व्यापार, रक्षा, समुद्री सुरक्षा और तकनीकी नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग करता है। पिछले वर्षों में पीएम मोदी की भागीदारी प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में पद संभालने के बाद से लगभग हर आसियान और ईएएस सम्मेलन में भाग लिया है। उनकी उपस्थिति ने भारत के “Act East Policy” को नई दिशा दी है। वर्ष स्थान भागीदारी का तरीका 2014 म्यांमार प्रत्यक्ष 2015 मलेशिया प्रत्यक्ष 2016 लाओस प्रत्यक्ष 2017 फिलीपींस प्रत्यक्ष 2018 सिंगापुर प्रत्यक्ष 2019 थाईलैंड प्रत्यक्ष 2020 वियतनाम वर्चुअल 2021 ब्रुनेई वर्चुअल 2023 इंडोनेशिया प्रत्यक्ष 2024 लाओस प्रत्यक्ष 2025 मलेशिया वर्चुअल (वर्तमान) भारत-मलेशिया के बीच रणनीतिक संवाद प्रधानमंत्री मोदी और अनवर इब्राहिम के बीच हुई बातचीत में दोनों देशों ने व्यापार, रक्षा सहयोग, डिजिटल कनेक्टिविटी, और शिक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने यह भी दोहराया कि भारत और मलेशिया के बीच दक्षिण-पूर्व एशिया में स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए साझा दृष्टिकोण आवश्यक है। “हम इंडो-पैसिफिक में पारदर्शी, समावेशी और सहयोगात्मक माहौल के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।” — विदेश मंत्रालय, भारत सरकार वैश्विक नेता जो शामिल होंगे इस सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप , चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग , जापान के फुमियो किशिदा , ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ और कई अन्य विश्व नेता भी भाग लेंगे। इनमें से कई देशों के साथ भारत के रणनीतिक और आर्थिक हित जुड़े हुए हैं, जिससे यह सम्मेलन भारत की विदेश नीति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बनता है। भारत और आसियान के बीच प्रमुख सहयोग क्षेत्र क्षेत्र सहयोग का उद्देश्य व्यापार ASEAN-India FTA के तहत द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाना सुरक्षा समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग तकनीक डिजिटल इकोनॉमी और AI रिसर्च में साझेदारी संस्कृति बौद्ध विरासत और पर्यटन को बढ़ावा देना पर्यावरण जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए संयुक्त पहल विदेश मंत्रालय का बयान भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की वर्चुअल भागीदारी के बावजूद भारत की उपस्थिति “ सक्रिय और प्रभावी ” रहेगी। “भारत की ‘Act East Policy’ और ‘Neighbourhood First Policy’ आसियान देशों के साथ गहरे संबंधों की नींव है।” आसियान शिखर सम्मेलन का महत्व आसियान क्षेत्र न केवल भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है, बल्कि यह सामरिक रूप से भी भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति का केंद्र है। यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब विश्व में भू-राजनीतिक तनाव, दक्षिण चीन सागर विवाद, और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ रही है। FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल) 1. आसियान शिखर सम्मेलन 2025 कहाँ हो रहा है? मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में। 2. क्या पीएम मोदी वहां प्रत्यक्ष रूप से जाएंगे? नहीं, वे इस बार वर्चुअली शामिल होंगे। 3. मलेशियाई प्रधानमंत्री ने इस पर क्या कहा? अनवर इब्राहिम ने कहा कि वे मोदी जी के फैसले का सम्मान करते हैं और भारत-मलेशिया संबंधों को और गहरा करेंगे। 4. भारत-आसियान साझेदारी कब शुरू हुई थी? वर्ष 1992 में क्षेत्रीय साझेदारी के रूप में। 5. भारत किन क्षेत्रों में आसियान देशों के साथ सहयोग करता है? व्यापार, रक्षा, सुरक्षा, तकनीक, और संस्कृति के क्षेत्र में। 6. क्या यह भारत की विदेश नीति पर असर डालेगा? नहीं, भारत की डिजिटल और रणनीतिक उपस्थिति वर्चुअल भागीदारी के बावजूद मजबूत बनी रहेगी। निष्कर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्चुअल उपस्थिति यह दर्शाती है कि भारत डिजिटल कूटनीति और रणनीतिक संवाद दोनों में समान रूप से सक्रिय है। आसियान शिखर सम्मेलन भारत के लिए इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपने सहयोग और प्रभाव को बढ़ाने का एक अहम मंच है। मलेशियाई प्रधानमंत्री द्वारा मोदी जी के निर्णय का सम्मान करना इस बात का संकेत है कि भारत-आसियान संबंध परस्पर भरोसे और सम्मान की नई ऊँचाइयों पर पहुँच चुके हैं। 🔗 संदर्भ स्रोत: Ministry of External Affairs – Government of India

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