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कुर्सी की गणित में शहर का विकास बाधित डायाल कोरा नम्बर एखोन बंदो आछे

  कुर्सी की गणित में शहर का विकास बाधित डायाल कोरा नम्बर एखोन बंदो आछे •फारबिसगंज (अररिया): डायाल कोरा नम्बर एखोन बंदो आछे..जी हां इस तरह का आवाज आजकल फारबिसगंज के अधिकांश पार्षद के मोबाइल पर संपर्क करने पर सुना जा सकता है। सूत्र की एवं मोबाइल पर डायल किए गए जाने पर बंद बताए गए नंबर की भाषा से

कुर्सी की गणित में शहर का विकास बाधित डायाल कोरा नम्बर एखोन बंदो आछे
  कुर्सी की गणित में शहर का विकास बाधित डायाल कोरा नम्बर एखोन बंदो आछे •फारबिसगंज (अररिया): डायाल कोरा नम्बर एखोन बंदो आछे..जी हां इस तरह का आवाज आजकल फारबिसगंज के अधिकांश पार्षद के मोबाइल पर संपर्क करने पर सुना जा सकता है। सूत्र की एवं मोबाइल पर डायल किए गए जाने पर बंद बताए गए नंबर की भाषा से सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि पार्षद बंगाल में ही कहीं डेरा जमाए हुए है।तस्वीर का दूसरा पहलू यह है कि शहर कचड़े एवं गंदगी की ढेर पर सांस ले रहा है। एक ओर संक्रमण काल और संभावित तीसरी लहर की आने की संभावना को लेकर जहां नप की और से तैयारी चलनी चाहिए थी। दूसरी और नप के कुर्सी के खेल में शहर कचड़े के ढेर में तब्दील नजर आ रहा। इसे शहर का दुर्भाग्य ही कहा जाता है कि फारबिसगंज नगरपरिषद विकास से ज्यादा अविश्वास की राजनीति का अखाड़ा बनकर रह गया है। हालांकि नगर परिषद फारबिसगंज की चौथी बोर्ड 2017-22 में वर्ष के अंतिम पड़ाव में आखिरकार मुख्य पार्षद के विरुद्ध अविश्वास आ ही गया। जबकि मुख्य पार्षद की कुर्सी की इस खेल में बिना अविश्वास लगे ही परिस्थितियों को भांपते सुनीता जैन ने निजी कारणों का सहारा लेकर त्यागपत्र दे दिया था। पूर्वाधिकारी के बचे हुए कार्यकाल की पूर्ति के लिए चंदा जायसवाल निर्विरोध निर्वाचित हुई थी। नप के राजनीतिक का मानना है कि पार्षदों ने अपने अधिकार के लिए ही अपने अधिकार का प्रयोग कर डाला है।आमतौर पर वर्ष के अंतिम में अविश्वास का खेल कम ही हो पाता है। ऐसा अधिनियम में भी प्रावधानित है। कार्यकाल के समाप्ति के छह माह में अविश्वास नहीं लाया जा सकता है। पर महारथियों ने बड़ी चतुराई से ये खेल कर मुख्य पार्षद को चौंका दिया है। अविश्वास का मुख्य आरोप मुख्य पार्षद द्वारा बोर्ड के साधारण बैठक आयोजित नही कर पार्षदों के अधिकार से वंचित करना बताया गया है।जबकि सूत्र बताते हैं कि मुख्य पार्षद चंदा जायसवाल इस अवधि तक भावनात्मक रूप से गुजारने की पूरी खाका तैयार कर ली थी। सूत्र यह भी बताते हैं कि कुर्सी के इस खेल का खामियाजा पूर्व उप मुख्य पार्षद मोतिउर्रहमान को दो बार दोनों गुटों के द्वारा अविश्वास का सामना कर उठाना पड़ा था। कमोवेश मामला यही है कि कुर्सी के गणित में विकास प्रभावित है। वही स्थानीय लोगो का कहना है कि आने वाले समय में अगर शहर को विकास की ओर ले जाना है तो। हमलोग को अच्छे जनप्रतिनिधि चुनकर भेजना पड़ेगा जो स्तरीय राजनीति करे और शहर के विकास के प्रति जवाबदेह हो।

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