अपने जिले की आवाज़ बनें! Seemanchal Live में रिपोर्टर बनने के लिए अभी आवेदन करें।
BREAKING
Sitamarhi News: नेपाल सीमा पर देर रात सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण, अधिकारियों ने की रात्रि गश्तीसीमा पर SSB की बड़ी कार्रवाई: 432 लीटर नेपाली शराब जब्तबिहार के युवक की अस्पताल में मौतजमुई में 3,400 करोड़ का निवेश, CM सम्राट के नेतृत्व में बिहार को उद्योग और स्किल का हब बनाने की दिशा में तेजीपहले बाढ़, अब चुनाव; बिहार में टीचर ट्रांसफर फिर अटके; रविवार से नहीं खुलेगा पोर्टलअतीक गैंग के जिस शूटर को 3 साल से खोज रही यूपी पुलिस, वो बिहार की जेल में बंद मिला; 5 लाख का इनामAra News: युवा रालोमो ने किया बिहार युवा संवाद का आयोजन432 लीटर नेपाली शराब और नाव जब्त: तस्कर अंधेरे और नदी का फायदा उठाकर नेपाल भागे, भपटियाही थाना को सौंपा सामानबिहार की 20 हजार महिलाओं का कमाल, बकरियों से खड़ा किया 15 करोड़ का कारोबार; 2021 में शुरू हुआ सफरबिहार ब्रेकिंग न्यूज़, पढ़ें 3 अक्टूबर के मुख्य और ताजा समाचारबिहार MLC चुनाव में कांग्रेस- आरजेडी फ्रेंडली फाइट पर ताली क्यों पीट रहा NDA? जानिए अंदरखाने क्या चल रही चर्चाSitamarhi News: नेपाल सीमा पर देर रात सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण, अधिकारियों ने की रात्रि गश्तीसीमा पर SSB की बड़ी कार्रवाई: 432 लीटर नेपाली शराब जब्तबिहार के युवक की अस्पताल में मौतजमुई में 3,400 करोड़ का निवेश, CM सम्राट के नेतृत्व में बिहार को उद्योग और स्किल का हब बनाने की दिशा में तेजीपहले बाढ़, अब चुनाव; बिहार में टीचर ट्रांसफर फिर अटके; रविवार से नहीं खुलेगा पोर्टलअतीक गैंग के जिस शूटर को 3 साल से खोज रही यूपी पुलिस, वो बिहार की जेल में बंद मिला; 5 लाख का इनामAra News: युवा रालोमो ने किया बिहार युवा संवाद का आयोजन432 लीटर नेपाली शराब और नाव जब्त: तस्कर अंधेरे और नदी का फायदा उठाकर नेपाल भागे, भपटियाही थाना को सौंपा सामानबिहार की 20 हजार महिलाओं का कमाल, बकरियों से खड़ा किया 15 करोड़ का कारोबार; 2021 में शुरू हुआ सफरबिहार ब्रेकिंग न्यूज़, पढ़ें 3 अक्टूबर के मुख्य और ताजा समाचारबिहार MLC चुनाव में कांग्रेस- आरजेडी फ्रेंडली फाइट पर ताली क्यों पीट रहा NDA? जानिए अंदरखाने क्या चल रही चर्चा

Article Advertisement

Business

मिलिए बिहार के मिनी कोलकाता से! इस गांव में फूलों की खेती से लखपति बन रहे किसान

मिलिए बिहार के मिनी कोलकाता से! इस गांव में फूलों की खेती से लखपति बन रहे किसान Flower Farming In Bihar: बिहार के सीतामढ़ी जिले के बैरहा गांव में फूलों की खेती से यह मिनी कोलकाता बन गया है। यहां के ज्यादातर किसान फूलों की खेती कर रहे हैं। Flower Farming In Bihar: बिहार के सीतामढ़ी जिले के बथनाहा प्र

मिलिए बिहार के मिनी कोलकाता से! इस गांव में फूलों की खेती से लखपति बन रहे किसान

Article Advertisement

मिलिए बिहार के मिनी कोलकाता से! इस गांव में फूलों की खेती से लखपति बन रहे किसान Flower Farming In Bihar: बिहार के सीतामढ़ी जिले के बैरहा गांव में फूलों की खेती से यह मिनी कोलकाता बन गया है। यहां के ज्यादातर किसान फूलों की खेती कर रहे हैं। Flower Farming In Bihar: बिहार के सीतामढ़ी जिले के बथनाहा प्रखंड का बैरहा गांव फूलों की खेती से मिनी कोलकाता बन गया है। बिहार की यहां बड़ी आबादी फूलों की खेती कर रही है। इससे सीतामढ़ी के लोगों को कोलकता का रास्ता नहीं देखना पड़ रहा है, बल्कि फूल कई जिलों में अपनी खुशबू फैला रही है। पहले सीतामढ़ी और शिवहर का बाजार फूलों के लिए बंगाल पर निर्भर था। गेंदा के अलग-अलग किस्म, मोगरा, राजनीगंधा की बड़े पैमाने पर खेती होने की वजह से बैरहा गांव को मिनी कोलकाता के नाम से भी जानते हैं। यहां के फूलों की डिमांड दरभंगा, मुजफ्फरपुर,मधुबनी, सीतामढ़ी, मोतिहाी, शिवहर और पड़ोसी देश नेपाल तक है। इस गांव का रकवा करीब 40 एकड़ की है, जहां 30 एकड़ में फुल की खेती होती है। किसानों ने बताया कि करीब 10 से 12 साल पहले तक ये लोग आम किसान की तरह पारंपरिक खेती करते थे, लेकिन, फूलों की खेती का आइडिया पारंपरिक खेती से अलग कर दिया गया। 125 किसान कर रहे हैं फूलों की खेती गांव के किसान चेरी, गेंदा, चीना, रजनीगंधा और मोगरा की खेती करते है। इस खेती से कम से कम 125 किसान जुड़े हुए हैं, जो फुल की खेती कर लाभ ले रहे हैं। किसान नंदलाल महतो, नवीन कुमार और रमेश महतो समेत आधा दर्जन किसानों ने बताया कि सबसे ज्यादा कमाई लगन और त्योहार में होती है। लगन के समय तो एक मिनट फुर्सत नहीं मिलती है। रिश्तेदार या आसपास के गांव के लोग बुलाने पड़ते है। हर घर में फुल की खेती होती है तो सब अपने-अपने माला गूथते हैं। ऐसे में डिमांड ज्यादा होती है तो बाहर से आदमी बुलाकर काम करा लेते है। किसानों ने कहा कि एक बीघा में लागत छोड़कर एक लाख रुपया की बचत हो जाती है, जो सब्जी या अन्य फसल की खेती से अच्छा लाभ देती है। ऐसे शुरू की थी फूलों की खेती गांव के किसान पहले पारंपरिक खेती करते थे। इसी बीच गांव के एक किसान को उसके रिलेटिव ने फूलों की खेती के बारे में बताया। पहले किसान ने दो एकड़ में खेती शुरू की और लोगों को भी रोजगार दिया। इसके बाद अन्य किसान भी फूलों की खेती से जुड़े और धीरे-धीरे हर घर के लोग फूलों की खेती करने लगे। जब लाभ हुआ तो गेंदा के अलग-अलग प्रजाति की खेती करना शुरु की। अब यहां के किसान बंगाल का रास्ता छोड़ रजनीगंधा की भी खेती शुरु कर दी है। किसानों को प्लाटिंग मटेरियल के रूप में गेंदा फूल के साथ-साथ रजनीगंधा (ट्यूब रोज) के बीज भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे किसान फूल उत्पादन और बेहतर कर सके। किसान अपनी आमदनी को बढ़ा सकेंगे। यहां के किसान गेंदा की खेती बड़े पैमाने पर करते हैं। फूलों की खेती करने वाले किसानों का समूह बनाकर प्रोत्साहित किया जा रहा है। विभागीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है। गेंदे संग रजनीगंधा की खेती हो रही है।

What do you think?

Leave a Comment

Article Bottom Advertisement

यह भी पढ़ें

Trending News

Most Read