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Katihar:- देश के 424 और विश्व के 112 प्रजाति 536 केला प्रजाति पर शोध 99
Published: 24/9/2022, 9:20:48 am•61 views•Seemanchal Live
देश के 424 और विश्व के 112 प्रजाति 536 केला प्रजाति पर शोध 99 करीब 25 वर्ष के कठिन परिश्रम और खोज के बाद बिहार के कटिहार जिले स्थित फलका प्रखंड के एक युवा किसान अमित कुमार के खेत में भारत सरकार ने नेशनल रिसर्च सेंटर ऑफ बनाना तिरची तमिलनाडु से वैज्ञानिकों की तीन सदस्यीय टीम भेज कर एक एकड़ जमीन में 536

देश के 424 और विश्व के 112 प्रजाति 536 केला प्रजाति पर शोध 99 करीब 25 वर्ष के कठिन परिश्रम और खोज के बाद बिहार के कटिहार जिले स्थित फलका प्रखंड के एक युवा किसान अमित कुमार के खेत में भारत सरकार ने नेशनल रिसर्च सेंटर ऑफ बनाना तिरची तमिलनाडु से वैज्ञानिकों की तीन सदस्यीय टीम भेज कर एक एकड़ जमीन में 536 उन्नत प्रजाति के केला की खेती शोध हेतु लगया गया है।
एनआरसी से पहुंचे टीम के नेतृत्व कर रहे वरीय कृषि शोध वैज्ञानिक डॉ आर थांगवेलु ने बताया कि यहां शोध हेतु 536 किस्म की केला की शोध की पहली खेती है।
जिसमें भारत के 424 और विश्व स्तर के 112 प्रजाति शामिल है।
उन्होंने बताया कि पिछले दो साल से यह शोध चल रहा है।
जिस पर किसानों के हित में भारत सरकार 20 लाख रुपये खर्च कर चुकी है, आगे भी लाखों रुपये खर्च की संभावना है।
एनआरसी के शोध वैज्ञानिकों की टीम के एक वर्ष देख - रेख में यह खेती की जाएगी।
पूरी खेती उच्च स्तरीय वैज्ञानिक पद्धति से की जाएगी।
बताया कि बिहार सहित उड़ीसा और बंगाल राज्यों में किसान अमरीकी बीमारी पनामा बिल्ट नाम रोग से ग्रसित होकर केला खेती छोड़ चुके हैं।
इस शोध का उद्देश्य के बारे में वैज्ञानिकआर थांगवेलु ने बताया कि पनामा बिल्ट सहित अन्य रोग से परेशान केला खेती छोड़े किसान के लिए यह शोध उन्नति का रास्ता खोलेगा।
शोध के बाद देश के किसान विभिन्न प्रजाति के रंग - बिरंगे केला खेती कर पाएंगे।
यहां के किसानों को पनामा बिल्ट रोग से अब मुक्ति मिल जाएगी।
दस साल बाद एक बार फिर यहाँ के किसानों के खेत में केला की खेती लह लहायेगी।
शुक्रवार को पहुँचे इस तीन सदस्य टीम में नेशनल रिसर्च सेंटर बनाना त्रिची तमिलनाडु के डायरेक्टर डॉ. एस उमा,वरीय वैज्ञानिक डॉक्टर थांगवेलु, और इंटरनेशनल ट्रांजी सेंटर बेल्जियम के डॉक्टर निकोलस शामिल थे।
वैज्ञानिक डॉ. एस उमा ने बताया कि अब परेशान होने की जरूरत नहीं है,कुछ ही दिनों के बाद एक बार फिर यह क्षेत्र केलांचल के नाम से जाना जाएगा।
बताया कि इस शोध से बिहार ,उड़ीसा और बंगाल सहित अन्य कई राज्यों के केला किसानों को फायदा मिलने वाला है,जो किसान पनामा बिल्ट रोग के कारण केला खेती छोड़ चुके हैं।
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