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लखनऊ अग्निकांड पर सीएम योगी का बड़ा एक्शन: SIT गठित, चार अधिकारी निलंबित, एक हफ्ते में मांगी रिपोर्ट

Published: 23/06/2026, 04:06:52 pm3 viewsSeemanchal Live

लखनऊ: राजधानी लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने मामले की गहन जांच के लिए विशेष…

लखनऊ अग्निकांड पर सीएम योगी का बड़ा एक्शन: SIT गठित, चार अधिकारी निलंबित, एक हफ्ते में मांगी रिपोर्ट
लखनऊ: राजधानी लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने मामले की गहन जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने के साथ ही चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस हादसे में कई छात्रों की मौत और दर्जनों लोगों के घायल होने के बाद प्रशासनिक लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। दो सदस्यीय SIT करेगी जांच मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित SIT पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच करेगी। टीम को घटना के कारणों, जनहानि, संपत्ति के नुकसान और संभावित लापरवाही की जांच कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। SIT में शामिल अधिकारी: Amrit Abhijat, अतिरिक्त मुख्य सचिव (पर्यटन एवं संस्कृति विभाग) Praveen Kumar, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (लखनऊ जोन) मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाए और किसी भी स्तर पर हुई लापरवाही को छिपाया न जाए। चार अधिकारियों पर गिरी गाज घटना के बाद सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। निलंबित अधिकारियों में शामिल हैं: Gaurav Kumar Anil Kumar Pramod Kumar Kamlendra Kumar सरकार का मानना है कि प्रथम दृष्टया सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था में गंभीर चूक की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कैसे हुआ हादसा? प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र स्थित एक व्यावसायिक भवन में लगी, जहां लाइब्रेरी, कंप्यूटर प्रशिक्षण संस्थान, कोचिंग सेंटर और गेमिंग जोन संचालित हो रहे थे। शुरुआती आशंका शॉर्ट सर्किट की जताई जा रही है, हालांकि वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। 18 छात्रों की मौत से दहला शहर इस दर्दनाक हादसे में कम से कम 18 छात्रों की मौत हो गई। मृतकों की उम्र लगभग 20 से 24 वर्ष के बीच बताई जा रही है। आग लगने के बाद भवन में तेजी से धुआं भर गया, जिससे अंदर मौजूद छात्र और अन्य लोग फंस गए। कई लोगों ने जान बचाने के लिए ऊपरी मंजिलों और छत से छलांग लगा दी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। बायोमेट्रिक गेट बना मौत का कारण? प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कोचिंग संस्थान के प्रवेश और निकास द्वार बायोमेट्रिक सिस्टम (फिंगरप्रिंट/अंगूठा सत्यापन) से नियंत्रित थे। आग लगने के दौरान बिजली और सिस्टम प्रभावित होने के कारण गेट समय पर नहीं खुल सके, जिससे कई लोग अंदर फंस गए। इसी वजह से मृतकों की संख्या अधिक होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि इस पहलू की भी SIT द्वारा जांच की जाएगी। सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल घटना के बाद कोचिंग संस्थानों, लाइब्रेरी और व्यावसायिक परिसरों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सार्वजनिक भवन में आपातकालीन निकास (Emergency Exit), फायर अलार्म, अग्निशमन उपकरण और मैनुअल निकासी व्यवस्था अनिवार्य होनी चाहिए। एक सप्ताह में सामने आएगी रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने SIT को एक सप्ताह के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। फिलहाल पूरे प्रदेश की निगाहें इस जांच पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि हादसे के लिए जिम्मेदार कौन था और सुरक्षा मानकों में आखिर कहां चूक हुई।

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