अपने जिले की आवाज़ बनें! Seemanchal Live में रिपोर्टर बनने के लिए अभी आवेदन करें।
BREAKING
आजतक की खबर का असर: दरभंगा के प्राइमरी स्कूल को शिफ्ट करने का आदेश, अब गोसवा में चलेंगी क्लास'कभी नहीं सोचा था CM और केंद्र में मंत्री बनूंगा', जन्मदिन पर माता-पिता को याद कर रो पड़े जीतन राम मांझी, ब...Bihar Weather Tomorrow: मानसून गया, अब शुष्क हवाओं का असर, बिहार के मौसम में आया बदलाव, जानें IMD अलर्टबिहार और यूपी में बाढ़ से भारी तबाही, कई जिलों में घुसा नदियों का पानीPatna MLC Election: अनंत सिंह के विरोध के बीच नीरज कुमार से मिले नीतीश, बोले- 'अच्छे से लड़ो और जीतो'NASA की सैटेलाइट तस्वीरों में दिखी बिहार की बाढ़, अंतरिक्ष से दिखा 9 दिन में गंडक का बदला हुआ रूप, आखिर क्य...एक करोड़ महिलाएं बनेंगी अब लखपति, 'समृद्ध महिला-समृद्ध बिहार' योजना के तहत मिलेगा 5-5 लाख का लोनबिहार में कोसी नदी पर तैयार हो रहा देश का सबसे लंबा पुल! जल्द फर्राटा भरेंगी गाड़ियां, मिथिला-सीमांचल का सफर होगा आसानGanga Path Project: बिहार में गंगा किनारे बनेंगी 3 नई सड़कें, 219 किमी होगी लंबाई, जानिए DPR में क्या-क्या रहेगाबिहार सीमांचलः किशनगंज में अल्पसंख्यक आबादी 70 और अररिया में 40 प्रतिशत?, नई बस्तियों-धार्मिक स्थलों के तेज...Nawada News: गोविंदपुर में सीएसपी की दीवार काट 1.75 लाख की चोरीआजतक की खबर का असर: दरभंगा के प्राइमरी स्कूल को शिफ्ट करने का आदेश, अब गोसवा में चलेंगी क्लास'कभी नहीं सोचा था CM और केंद्र में मंत्री बनूंगा', जन्मदिन पर माता-पिता को याद कर रो पड़े जीतन राम मांझी, ब...Bihar Weather Tomorrow: मानसून गया, अब शुष्क हवाओं का असर, बिहार के मौसम में आया बदलाव, जानें IMD अलर्टबिहार और यूपी में बाढ़ से भारी तबाही, कई जिलों में घुसा नदियों का पानीPatna MLC Election: अनंत सिंह के विरोध के बीच नीरज कुमार से मिले नीतीश, बोले- 'अच्छे से लड़ो और जीतो'NASA की सैटेलाइट तस्वीरों में दिखी बिहार की बाढ़, अंतरिक्ष से दिखा 9 दिन में गंडक का बदला हुआ रूप, आखिर क्य...एक करोड़ महिलाएं बनेंगी अब लखपति, 'समृद्ध महिला-समृद्ध बिहार' योजना के तहत मिलेगा 5-5 लाख का लोनबिहार में कोसी नदी पर तैयार हो रहा देश का सबसे लंबा पुल! जल्द फर्राटा भरेंगी गाड़ियां, मिथिला-सीमांचल का सफर होगा आसानGanga Path Project: बिहार में गंगा किनारे बनेंगी 3 नई सड़कें, 219 किमी होगी लंबाई, जानिए DPR में क्या-क्या रहेगाबिहार सीमांचलः किशनगंज में अल्पसंख्यक आबादी 70 और अररिया में 40 प्रतिशत?, नई बस्तियों-धार्मिक स्थलों के तेज...Nawada News: गोविंदपुर में सीएसपी की दीवार काट 1.75 लाख की चोरी

Article Advertisement

Bihar

पंपसेट के सहारे धान की खेती करने को किसान मजबूर, कर रहे अत्यधिक बारिश का इंतजार

बारिश की कमी से मंडरा रहा है सूखे का संकट किसानों को खरीफ मौसम के शुरुआती दौर में ही मौसम की मार झेलनी पड़ रही है. अनुमंडल क्षेत्र में बीते दो सप्ताह से बारिश के दगा के बाद गुरुवार के दोपहर कुछ जगहों पर हुई हल्की बारिश से सूख रही धान की फसल को कुछ संजीवनी मिली, लेकिन लगातार हो रहे प्रचंड गर्मी की वज

पंपसेट के सहारे धान की खेती करने को किसान मजबूर, कर रहे अत्यधिक बारिश का इंतजार

Article Advertisement

बारिश की कमी से मंडरा रहा है सूखे का संकट किसानों को खरीफ मौसम के शुरुआती दौर में ही मौसम की मार झेलनी पड़ रही है. अनुमंडल क्षेत्र में बीते दो सप्ताह से बारिश के दगा के बाद गुरुवार के दोपहर कुछ जगहों पर हुई हल्की बारिश से सूख रही धान की फसल को कुछ संजीवनी मिली, लेकिन लगातार हो रहे प्रचंड गर्मी की वजह से धान की फसल पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है. पानी के अभाव में जहां खेतों में लगे धान के बिचड़े झुलसने लगे हैं, वहीं किसान आगे बारिश होने की उम्मीद में पंपसेट के सहारे पटवन कर जैसे-तैसे धान रोपाई में जुटे हैं, जबकि रोपनी किए गए धान के पौधे में हरियाली बरकरार रखने के लिए किसान कर्ज लेकर या फिर तीन पटवन के लिए विभाग द्वारा घोषित डीजल अनुदान की राशि मिलने की आस में दिन-रात पंपसेट से सिंचाई करने में जुटे हैं. प्रखंड क्षेत्र के अधिकतर किसान धान की रोपनी के लिए जहां बारिश का इंतजार कर रहे हैं.   वहीं बारिश की आशा छोड़ पंपसेट के सहारे धान की रोपनी करने वाले किसानों के सूखने की कगार पर पहुंच चुकी खेत उसकी हालत पतली करने पर आमादा है. किसानों का कहना है कि एक तरफ जहां बिचड़े उखाड़ने के लिए पंपसेट के सहारे उसकी सिंचाई की जा रही है, वहीं निचले स्तर वाली भूमि में पंपसेट के सहारे ही पटवन कर धान की रोपाई की जा रही है, लेकिन रोपाई के बाद से ही लगातार धूप से खेत सूखने लगे हैं. सुखाड़ की संभावना से सहमे किसान मौसम के रौद्ररुप का असर धान की खेती पर भी नजर आने लगा है.   किसानों का कहना है कि धान के बिचड़े की हालत खराब है. किसी तरह पटवन कर खेतों में महंगे दर का बीज गिराया था, लेकिन जब रोपनी का समय आया तो किस्मत ही दगा दे रही है. बिचड़े बड़ा होने से पहले ही सुखकर बर्बाद होने की कगार पर पहुंच चुका है. लाचार होकर किसान बारिश होने के इंतजार में आसमान की ओर टकटकी लगाने को विवश हैं. वहीं अगर ऐसी स्थिति रही तो रोपाई किए गए धान के पौधे सूख कर बर्बाद हो जायेंगे. इस स्थिति में किसानों को इस बार सुखाड़ का भी सामना करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा. कहते हैं कृषि विशेषज्ञ मौसम के प्रतिकूल रहने की स्थिति में कृषि विशेषज्ञ किसानों को अब लेट वेरायटी के धान श्रीविधि तरीके से लगाने की सलाह दे रहे हैं. श्रीविधि में कम लागत लगती है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि लेट वेरायटी धान में सहभागी, सबौर अर्धजल, सबौर दीप, प्रभात आदि किस्म के बीज की बुआई की जा सकती है. यह धान 110 से 115 दिनों में पक कर तैयार हो जाता है. लेकिन किसानों के साथ मजबूरी यह है कि वह लेट वेरायटी के कोई भी किस्म का बिचड़ा नहीं लगाया है. पूर्व में किसान सरकारी स्तर से अनुदानित दरों पर मिलने वाले बीज के अलावा बाजार से महंगी दरों पर बीज की खरीदारी कर खेतों में गिराया था.

What do you think?

Leave a Comment

Article Bottom Advertisement

यह भी पढ़ें

Trending News

Most Read