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ग़रीबों का मसीहा से राजनीतिक धुरंधर तक: पप्पू यादव का सफर

ग़रीबों का मसीहा से राजनीतिक धुरंधर तक: पप्पू यादव का सफर बिहार की राजनीति में विवाद, संघर्ष और वापसी की आदर्श प्रतिरूप माने जाने वाले सांसद राजेश रंजन , जिन्हें लोग 'पप्पू यादव' नाम से जानते हैं, का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं। 24 दिसंबर 1967 को मधेपुरा जिले के खुरडा करवेली गांव में जन्मा यह र

ग़रीबों का मसीहा से राजनीतिक धुरंधर तक: पप्पू यादव का सफर

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ग़रीबों का मसीहा से राजनीतिक धुरंधर तक: पप्पू यादव का सफर बिहार की राजनीति में विवाद, संघर्ष और वापसी की आदर्श प्रतिरूप माने जाने वाले सांसद राजेश रंजन , जिन्हें लोग 'पप्पू यादव' नाम से जानते हैं, का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं। 24 दिसंबर 1967 को मधेपुरा जिले के खुरडा करवेली गांव में जन्मा यह राजनेता अपनी जन-आधारित राजनीति और लोकप्रिय छवि के साथ बिहार की सियासत में प्रमुख हस्ती बन चुका है। प्रारंभिक जीवन और शिक्षा राजेश रंजन ने राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री प्राप्त की और IGNOU से डिजास्टर मैनेजमेंट और मानवाधिकार में डिप्लोमा हासिल किया, जिससे उनकी छवि शिक्षित और जन-कल्याण की राजनीति से जुड़ी बनी। उनकी प्रारंभिक पहचान जमीन से जुड़े नेता के तौर पर बनी। राजनीतिक आरंभ 1990 में स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में उन्होंने सिंहेश्वर विधानसभा सीट से पहला चुनाव जीता। फिर 1991 में पूर्णिया लोकसभा सीट से सांसद बनने का कीर्तिमान स्थापित किया। इसके बाद 1996, 1999, 2004 और 2014 के चुनावों में विभिन्न पार्टियों—SP, RJD, निर्दलीय विधेय—के जरिए जीत हासिल की जन अधिकार पार्टी की स्थापना 2015 में RJD से निष्कासित होने पर उन्होंने जन अधिकार पार्टी (लोकतांत्रिक) की स्थापना की, जिसका उद्देश्य भ्रष्टाचार से लड़ने और समाज में न्याय दिलाने का था। हालांकि रुझानों में यह पार्टी ज्यादा प्रभावी साबित नहीं हो पाई। गठजोड़ और कांग्रेस में विलय 2020 विधानसभा चुनाव से पहले पप्पू यादव ने Progressive Democratic Alliance (PDA) गठित की, लेकिन इसका प्रभाव सीमित रहा। मार्च 2024 में उन्होंने अपनी पार्टी कांग्रेस में विलय कर दी, जिससे उनकी राष्ट्रीय स्तर पर वापसी की राह आसान हो गई। विवाद और आपराधिक पृष्ठभूमि उनका राजनीतिक जीवन विवादों से भी घिरा रहा है। 1998 में CPI(M) नेता अजीत सरकार की हत्या के आरोप में दोषी ठहराकर जेल भी गए, लेकिन 2013 में पटना हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया। इसके अलावा Purulia arms drop जैसे विवादों में भी उनका नाम आया संसदीय सक्रियता लोकसभा में पप्पू यादव ने कई बार उच्च उपस्थिति और बहस में भागीदारी दिखाई। उन्हें 2015 में "बिहार के सर्वश्रेष्ठ सांसद" के रूप में मान्यता भी मिली पारिवारिक जीवन उनकी पत्नी रंजीत रंजन भी कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद हैं। उनके दो बच्चे— सार्थक रंजन (दिल्ली क्रिकेट टीम के खिलाड़ी) और प्रकृति रंजन (राष्ट्रीय टेनिस खिलाड़ी)—खुद भी अलग पहचान रखते हैं वर्तमान स्थिति 2024 में उन्होंने पूर्णिया लोकसभा सीट से जीत हासिल की और वर्तमान में कांग्रेस के सांसद हैं। उन्हें केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा Y श्रेणी सुरक्षा प्रदान की गई है—जो उनकी राजनीतिक सक्रियता और सुरक्षा जोखिम की पहचान है निष्कर्ष पप्पू यादव की राजनीतिक यात्रा किसी संघर्ष, विवाद और लोक-समर्थन की कहानी से कम नहीं है। दंगल और अदालतों के बीच पनपे यह नेता अब भी बिहार की राजनीति में एक प्रभावी और चर्चित चेहरा है।

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